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सीबीआई निदेशक की नियुक्ति के लिए बने हाई पॉवर कमेटीः सुप्रीम कोर्ट

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- 16 अप्रैल को होगी अगली सुनवाई नई दिल्ली, 05 अप्रैल (हि.स.)। सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई निदेशक की जल्द नियुक्ति के मामले पर सुनवाई करते हुए केंद्र सरकार से कहा कि एजेंसी में लंबे समय तक अंतरिम प्रबंध जारी नहीं रह सकता है। जस्टिस एल नागेश्वर राव की अध्यक्षता वाली बेंच ने केंद्र सरकार से कहा कि वो जल्द ही निदेशक की नियुक्ति के लिए हाई पावर सेलेक्शन कमेटी का गठन करे। सुप्रीम कोर्ट इस मामले पर 16 अप्रैल को अगली सुनवाई करेगा। सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार ने कहा कि सीबीआई निदेशक चुनने के लिए प्रधानमंत्री, चीफ जस्टिस और नेता विपक्ष की चयन समिति की बैठक 2 मई को होगी। तब कोर्ट ने सरकार से कहा कि वह सीबीआई निदेशक का चयन जल्द करने की कोशिश करे। सुनवाई के दौरान वकील प्रशांत भूषण ने कहा कि केंद्र सरकार वर्तमान चीफ जस्टिस के रिटायर होने का इंतजार कर रही है। इस बात का सॉलिसीटर जनरल तुषार मेहता ने कड़ा विरोध किया। मेहता ने कहा कि विधानसभा चुनाव में नेताओं की व्यस्तता के कारण बैठक नहीं हो पा रही है। इसका चीफ जस्टिस के रिटायरमेंट से कोई संबंध नहीं है। पिछले 12 मार्च को कोर्ट ने केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया था। याचिका एनजीओ कॉमन कॉज ने दायर की है। याचिकाकर्ता की ओर से वकील प्रशांत भूषण ने इस साल दो फरवरी को ऋषि कुमार शुक्ला का कार्यकाल समाप्त होने के बाद अंतरिम या कार्यवाहक सीबीआई निदेशक के रूप में प्रवीण सिन्हा की नियुक्ति का विरोध किया। उन्होंने कोर्ट से कहा कि किसी कार्यवाहक निदेशक की नियुक्ति का कोई प्रावधान नहीं है। एक नियमित निदेशक की कमी के कारण सीबीआई का काम प्रभावित हो रहा है। याचिका में कहा गया है कि संविधान की धारा 14 और 21 के तहत कानून के शासन को बनाए रखने और नागरिकों के अधिकारों को लागू करने के लिए वैधानिक कानून के मुताबिक पूर्णकालिक निदेशक की नियुक्ति जरूरी है। याचिका में कहा गया है कि कोर्ट ये दिशा निर्देश जारी करे कि सीबीआई निदेशक के पद के खाली होने से एक से दो महीने पहले ही केंद्र सरकार सीबीआई निदेशक के चयन की प्रक्रिया को शुरू कर दे। हिन्दुस्थान समाचार/संजय /प्रभात ओझा