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हाईकोर्ट ने दिल्ली सरकार को दिये कोविड टेस्टिंग सेंटर बढ़ाने के निर्देश

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नई दिल्ली, 26 अप्रैल (हि.स.)। दिल्ली हाईकोर्ट ने दिल्ली सरकार को निर्देश दिया है कि वह टेस्टिंग सेंटर बढ़ाएं। कोर्ट ने केंद्र टेस्ट सैंपलिंग का दायरा बढ़ाने का निर्देश दिया। सुनवाई के दौरान केंद्र की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने केरल सरकार के ऑक्सीजन के इस्तेमाल की काफी सराहना की। उन्होंने कहा कि केरल सरकार और तमिलनाडु सरकार काफी अच्छे से ऑक्सीजन का इस्तेमाल कर रहे हैं। तुषार मेहता ने कहा कि केंद्र सरकार ने सभी राज्यों को ऑक्सीजन की सप्लाई में बाधा नहीं खड़ी करने का निर्देश दिया है। मेहता ने कहा कि सभी राज्यों में ऑक्सीजन सप्लाई सुनिश्चित करने के लिए दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। उन्होंने कहा कि सभी राज्य सरकारों ने केंद्र के सुझावों को सकारात्मक तरीके से लिया है। दिल्ली के नागरिकों की समस्या सुलझाने की कोशिश हो रही है। हालांकि सबसे ज्यादा खराब हालत महाराष्ट्र की है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकारों को प्रभावी वार रुम बनाने पर विचार करना चाहिए। केंद्र सरकार ने वार रुम बना रखा है। इसे जारी रखने की जरूरत है। मेहता ने कहा कि दिल्ली को 480 मीट्रिक टन ऑक्सीजन आवंटित किया गया है। अगर केंद्र सरकार 340 मीट्रिक टन भी ऑक्सीजन दिया जाता है तो स्थिति ठीक ही रहेगी। उन्होंने कहा कि ऑक्सीजन की सप्लाई बढ़ाने पर युद्ध स्तर पर काम हो रहा है। दिल्ली सरकार टैंकर की व्यवस्था भी नहीं कर पाई। उनसे टैंकर की व्यवस्था करने का आग्रह किया गया है। दिल्ली सरकार ने दूसरे अस्पतालों के लिए कोई वैकल्पिक व्यवस्था नहीं की है। दिल्ली सरकार की ओर से वकील राहुल मेहरा ने कहा कि केंद्र सरकार हमें ग्रीन कॉरीडोर दे, हम ऑक्सीजन लाएंगे। इस पर कोर्ट ने कहा कि पिछली सुनवाई में आपको टैंकर की व्यवस्था करने को कहा गया था। अगर आप टैंकर की व्यवस्था करते हैं तो केंद्र सरकार को कोई आपत्ति नहीं है। आप केंद्र सरकार को इसकी सूचना दे सकते हैं। राहुल मेहरा ने कहा कि हमने जिंदल को टैंकर देने का आग्रह किया है। तब मेहता ने कहा कि ऑक्सीजन देने के लिए टैंकर मिलता है तो जरूर मिलेगा। राहुल मेहरा ने कहा कि केंद्र सरकार को ऑक्सीजन के उत्पादन और उसके वितरण का अधिकार है। ऑक्सीजन का उत्पादन हो रहा है, लेकिन समस्या उसके परिवहन की है। अगर किसी प्लांट में ऑक्सीजन पड़ा है तो उसे ले आने की हमें अनुमति दें। ताकि जान बचाई जा सके। इस पर तुषार मेहता ने कहा कि इसे नाटकीय बनाने की जरूरत नहीं है। आप टैंकर ले आएं और ऑक्सीजन ले जाएं। इस पर राहुल मेहरा ने कहा कि ये विवाद का विषय नहीं है। आप हमारे शब्दों पर मत जाइए, हमारी नीयत को समझिए। जस्टिस रेखा पल्ली ने कहा कि जिस तरह दिल्ली सरकार ने कई उद्योगपतियों से ऑक्सीजन देने का आग्रह किया है, वैसे ही केंद्र सरकार को भी उद्योगपतियों से ऑक्सीजन के लिए आग्रह करना चाहिए। तब मेहता ने कहा कि इसकी जरूरत नहीं है। जो उद्योगपति औद्योगिक ऑक्सीजन का उत्पादन कर रहे हैं, उन्हें अभी अस्पतालों को देने के लिए कहा गया है। हम अपने अधिकार का उपयोग कर रहे हैं। तुषार मेहता ने कहा कि दिल्ली सरकार ने ऑक्सीजन सप्लायर को कारण बताओ नोटिस दिया कि उनके खिलाफ कार्रवाई नहीं की जाए। आईनॉक्स की ओर से वकील राजीव नय्यर ने कहा कि हमें 45 अस्पतालों को ऑक्सीजन की सप्लाई करने का निर्देश दिया गया है। लेकिन दिल्ली सरकार ने हमें चेतावनी देते हुए कहा कि केवल 17 अस्पतालों को ऑक्सीजन दी जाए। ऐसे में बाकी 28 अस्पतालों को ऑक्सीजन कैसे मिलेगी। तब कोर्ट ने कहा कि ऑक्सीजन की जरूरत है। इसकी जरूरत बढ़ती जा रही है। आप कोर्ट के आदेश का पालन करें। अगर ऑक्सीजन दिल्ली आती है तो दिल्ली सरकार उसके लिए जिम्मेदार है कि वो कैसे बंटवारा करेगी। नय्यर ने कहा कि अगर हम 17 अस्पतालों को सप्लाई करेंगे तो 28 अस्पतालों को सप्लाई कौन करेगा। 45 अस्पतालों के साथ हमारा करार है। तब कोर्ट ने कहा कि इस पर नोडल अफसर विचार करेंगे। जयपुर गोल्डेन अस्पताल की ओर से वकील सचिन दत्ता ने कहा कि दिल्ली सरकार के आवंटन की नीति गड़बड़ है। अस्पताल और आईनॉक्स के बीच दिल्ली सरकार है। हम सप्लायर से संपर्क करते हैं तो हमारा फोन तक नहीं उठाता है और वो कहता है कि सरकार से कहिए। दत्ता ने कहा कि दिल्ली सरकार की वजह से ऑक्सीजन की सप्लाई में अनिश्चितता हो गई है। अस्पताल सप्लायर तक से संपर्क नहीं कर रहे हैं। दत्ता ने उप मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया के उस बयान का जिक्र किया कि अस्पताल गैरजरूरी भय पैदा कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि अस्पताल पहले नहीं कहेंगे तो उन्हें समय पर कैसे ऑक्सीजन मिलेगा। दिल्ली सरकार ऑक्सीजन देने से ज्यादा समस्या पैदा कर रही है। कोर्ट ने कहा कि ऑक्सीजन की सप्लाई केंद्र सरकार की जिम्मेदारी है। केंद्र सरकार राज्यवार सप्लाई कर रही है। अगर आईनॉक्स केंद्र सरकार की योजना के मुताबिक दिल्ली सरकार को ऑक्सीजन सप्लाई कर रही है। तो दिल्ली सरकार ही जरूरत के मुताबिक अस्पतालों को देगी। अनिश्चितता नहीं होनी चाहिए। इस पर दत्ता ने कहा कि अगर अस्पताल नौ बजे सुबह ऑक्सीजन की मांग करे तो उसे कम से कम सूचना मिलनी चाहिए कि ऑक्सीजन कब तक मिलेगी। दिल्ली सरकार के अधिकारी जवाब तक नहीं देते हैं। इसका राहुल मेहरा ने विरोध करते हुए कहा कि ये बदनाम करने की कोशिश हो रही है। तब तुषार मेहता और कोर्ट ने कहा कि ये विवाद का विषय नहीं है। मेहता ने सुझाव दिया कि दिल्ली सरकार को सभी अस्पतालों और सप्लायर के साथ बैठक कर एक मेकानिज्म बनानी चाहिए। सचिन दत्ता की आक्रामकता जायज है। एक अस्पताल की ओर से वकील आलोक अग्रवाल ने कहा कि हम बार-बार राज्य सरकार, केंद्र सरकार और सांसद को मैसेज कर रहे हैं, लेकिन उसका कोई उत्तर नहीं दिया जाता है। इस पर कोर्ट ने कहा कि आप इसे कोर्ट में दाखिल करें। हम आदेश पारित करेंगे। तुषार मेहता ने सुझाव दिया कि दूसरे राज्यों में लोग टैंकर दे रहे हैं। दिल्ली सरकार एक अधिकारी नियुक्त करे जिनसे टैंकर देनेवाले संपर्क कर सकें और उन टैंकरों से ऑक्सीजन की सप्लाई जा सके। स्टील विभाग के अतिरिक्त सचिव रसिका ने कहा कि स्टील उद्योग ने कहा कि हम पल-पल की खबर रख रहे हैं, किस प्लांट में कितना ऑक्सीजन स्टॉक है। शांतिमुकुंद अस्पताल की ओर से विराज दातार ने कहा कि उनके अस्पातल में बफर स्टॉक दस बजे रात तक खत्म हो जाएगा। आईनॉक्स के राजीव नय्यर ने कहा कि केंद्र सरकार ने कहा है कि आप उत्पादन बढ़ाईए। आईनॉक्स के प्रबंध निदेशक सिद्धार्थ जैन ने कहा कि हमें 45 अस्पतालों को सप्लाई करना था। पहले दिल्ली सरकार ने कहा कि 17 अस्पतालों की सप्लाई करें और बाद में 24 अस्पतालों का करें। दिल्ली सरकार ने 125 मीट्रिक टन सप्लाई करने को कहा। केंद्र सरकार ने 85 मीट्रिक टन देने के लिए कहा। जैन ने कहा कि हमें अस्पतालों से कॉल आते हैं। इस पर आदेश पारित किया जाए। हमारी फैक्ट्री चौबीसों घंटे काम कर रही है। जब हमारे ट्रक फैक्ट्री से चलते हैं तो वो मिल्कमैन की तरह काम करते हैं। उनका मार्ग बदल दिया जाता है। हिन्दुस्थान समाचार/संजय/सुनीत