कोरोना के संकट के बीच रबी की फसल खरीदने में आधी आबादी की अहम भूमिका

कोरोना के संकट के बीच रबी की फसल खरीदने में आधी आबादी की अहम भूमिका
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- हम किसी से कम नहीं की तर्ज पर कर रहीं ग्रामीण महिलाएं कीर्तिमान स्थापित भोपाल, 28 मई (हि.स.)। महिलाएं यदि ठान लें तो उनके लिए कुछ भी कर पाना असंभव नहीं होता है, कम तक जो तमाम कार्य पुरुषों के ही माने जाते रहे आज उन सभी कामों में महिलाएं बढ़ चढ़कर हिस्सा ले रही हैं, बल्कि कहना होगा कि इस कोरोना के महासंकट के बीच ऐसे कार्यों में अपनी उच्च स्तरीय सहभागिता दिखाकर महिलाओं ने फिर एक बार सिद्ध कर दिया है कि देश की आधी आबादी हर कार्य करने में पूरी तरह से सक्षम है। मुरैना में 19 महिला स्व-सहायता समूहों ने निभाई अहम भूमिका वास्वत में मध्य प्रदेश के ग्वालियर संभाग के मुरैना जिले की महिलाओं ने भी ऐसा ही कुछ किया है, जिसके लिए उनकी जितनी तारीफ की जाएगी वह कम ही होगी। यहां जिले के 19 महिला स्व-सहायता समूहों ने रबी उपार्जन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इन स्व-सहायता समूहों ने जिले के दो हजार 389 कृषकों से एक लाख 21 हजार 417 क्विंटल की खरीद कराई है। जिसमें कि खास बात यह है कि कृषकों के खातों में 23 करोड़ 97 लाख 99 हजार 396 रूपये का भुगतान भी कराया गया है। महिलाएं कहती हैं, आगे भी करेंगे फसलों की खरीद जिले में स्व-सहायता समूह की महिलाएं रबी उपार्जन के खरीद कार्य से प्रफुल्लित है और वे कह रहीं है कि इस प्रकार का कार्य आगे आने वाले खरीफ में भी हम करेंगे। जिसमें 27 रूपये प्रति क्विंटल के हिसाब से शासन द्वारा समूह को राशि प्राप्त होती है। जो समूह में जुड़ी महिलाओं के लिये आत्मनिर्भर बनने के लिये कारगर सिद्ध हो रही है। इस महिला स्व-सहायता समूह का कार्य रहा अग्रणी मुरैना जिले में सबलगढ़ विकासखण्ड की ग्राम पंचायत लखनपुरा के ग्राम शिवलाल पुरा के जय दुर्गा स्व-सहायता समूह जोकि 12 महिलाओं को जोड़कर बनाया गया है कि इन महिलाओं ने अपने बल पर इस वर्ष रबी उपार्जन में 3700 क्विंटल गेहूं की खरीद करवाई है। इस स्व-सहायता समूह की अध्यक्ष मीरा जाटव ने कहती हैं कि समूह का गठन करने के पीछे का उद्देश्य महिलाओं की ताकत बताना था कि अब महिलाएं हर उस काम को पूर्ण जिम्मेदारी के साथ निभा सकती हैं जिसे पुरुष करते है। मीरा जाटव कहती हैं कि मैंने इस समूह का गठन किया था जिसमें समूह में रम्मो, कमला, कंपूरी, रामबेटी, रूपा, भगवती, सुनीता, मीना, मीरा और मुन्नी ने कंधे से कंधा मिलाकर अब तक लगातार कार्य किया है। सभी महिलाओं के बल पर हमने इस वर्ष रबी उपार्जन का काम हाथ में लिया, जिसमें खरीद केन्द्र की पूरी जिम्मेदारियां महिलाओं ने संभाली। बोरियों की सिलाई से लेकर पोर्टल पर अपडेट भी किया इन ग्रामीण महिलाओं ने उन्होंने बताया कि हमने कम्प्यूटर के माध्यम से किसानों को एसएमएस भेजे। एसएमएस भेजने के बाद खरीद का कार्य प्रारंभ किया गया। शासन की गाइडलाइन के अनुसार एफएक्यू का परीक्षण किया, किसानों को टोकन दिये। टोकन के बाद गेहूं की तुलवाई कराई गई। मीरा कहती हैं कि हमारी इन्हीं महिला साथियों ने ही बोरियों की सिलाई कर पोर्टल पर इन्द्राज किया और खरीदे गये गेहूं की एक या दो दिन में ट्रान्सपोटेशन का कार्य लगातार करती गईं। ट्रान्सपोटेशन होने के बाद किसान का नाम इन्द्राज होने लगा और बेचे गये गेहूं की राशि भोपाल से किसान के खाते में समय-समय पर भेजी गई। हम्माली करने में भी पीछे नहीं रहीं महिलाएं इसके साथ ही स्व सहायता समूह की रामबेटी कहती हैं कि खरीद केन्द्र पर हम्माली का कार्य करने वालों का पैसा बराबर उनके खाते में जा रहा है। समूह को प्रति क्विंटल 27 रुपये कमीशन प्राप्त होगा जो महिलाओं की स्वावलम्बी बनने में परिवार में खुशहाली लायेगा। आज महिलाएं आत्मनिर्भर बन चुकीं है। मुरैना जिले में इस प्रकार के 19 स्व-सहायता समूह रबी उपार्जन का कार्य कर रहीं हैं। आजीविका मिशन के समन्वयक बोले दूसरी ओर इस संबंध में मध्यप्रदेश डे राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के समन्वयक दिनेश तोमर कहते हैं कि जिले में 19 स्व-सहायता समूहों ने इस वर्ष रबी उपार्जन के दौरान गेहूं खरीद का कार्य किया है। जय महाकाल बाबा स्व-सहायता समूह कुतधान ने 189 कृषकों से आठ हजार 195, मां शुन्ती देवी आजीविका स्व-सहायता समूह पहाड़ी ने 169 कृषकों से छह हजार 150, शिवशंकर स्व-सहायता समूह हड़वासी ने 151 कृषकों ने सात हजार 112, उम्मेदपुरी स्व-सहायता समूह कुडे़रा ने 99 कृषकों से पांच हजार 496, जय गिर्राज स्व-सहायता समूह सुरजनपुर ने 80 कृषकों से दो हजार 932, जय लोड़ी मां स्व-सहायता समूह लोहाबसई ने 191 कृषकों से 12 हजार 767 क्विंटल गेहूं खरीद की। इसी तरह से महादेव स्व-सहायता रामपुरगंज ने 218 कृषकों से 13 हजार 367, शीतला स्व-सहायता समूह अरहेला ने 89 कृषकों से पांच हजार 874, दुर्गे स्व-सहायता बघेल ने 112 कृषकों से सात हजार 113, शिवानी स्व-सहायता उम्मेदगढ़ वांसी ने 176 कृषकों से नौ हजार 462, सिद्ध बाबा स्व-सहायता पहावली ने 62 कृषकों से दो हजार 232, बजरंग स्व-सहायता मदनबसई ने 63 कृषकों से तीन हजार 258, लवकुश स्व-सहायता इमलिया ने 179 कृषकों से नौ हजार 343 क्विंटल गेहूं खरीद करने में सफलता अर्जित की। उन्होंने बताया कि इस प्रकार से अन्य स्व-सहायता समूहों में बजरंग स्व-सहायता विसंगपुरा ने 257 कृषकों से 11 हजार 906, संत रवीदास स्व-सहायता डोंगरपुर ने 134 कृषकों से छह हजार 741, जय दुर्गे स्व-सहायता समूह लखनपुरा ने 127 कृषकों से चार हजार 841, आशा स्व-सहायता नरहाई का पुरा ने एक कृषक से 46, भैरों बाबा स्व-सहायता समूह शिवसिंह के पुरा ने 65 कृषकों से तीन हजार 806 और ठाकुर बाबा स्व-सहायता समूह बदरेटा ने 27 कृषकों से एक हजार 170 क्विंटल गेहूं खरीद आज तक की गई है। हिन्दुस्थान समाचार/डॉ. मयंक चतुर्वेदी