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कोविड के खिलाफ जनभागीदारी सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं राज्यपाल : प्रधानमंत्री

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नई दिल्ली, 14 अप्रैल (हि.स.)। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने बुधवार को कहा कि राज्यपाल कोविड के खिलाफ लड़ाई में जनभागीदारी के एक महत्वपूर्ण स्तंभ हैं और राज्य सरकारों के साथ उनका समन्वय और राज्य के संस्थानों को दिए उनके मार्गदर्शन से महामारी के खिलाफ राष्ट्र के संकल्प को मजबूती मिलेगी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को कोरोना महामारी और वर्तमान में जारी वैक्सीनेशन कार्यक्रम पर राज्यों के राज्यपालों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से चर्चा की। उन्होंने कहा कि कोरोना के खिलाफ हमारी लड़ाई में हमारे मूल्य और कर्तव्य की भावना हमारी सबसे बड़ी शक्ति है। पिछले साल लोगों के बीमारी के खिलाफ किए गए प्रयासों की प्रशंसा करते हुए उन्होंने कहा कि वर्तमान में भी इसी जनभागीदारी की भावना को मजबूत किए जाने की जरूरत है। इन सब में राज्यपालों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। राज्यपाल सरकार और समाज के बीच बेहतर समन्वय से जुड़े एक महत्वपूर्ण संपर्क हैं। इसमें जोड़ते हुए उन्होंने कहा कि सामुदायिक संगठनों, राजनीतिक दलों, एनजीओ और सामाजिक संस्थानों की संयुक्त शक्ति को उपयोग में लाया जाना चाहिए। प्रधानमंत्री ने युवाओं और वर्कफोर्स को अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण अंग बताया और कहा कि ऐसे में यह सुनिश्चित किया जाना महत्वपूर्ण है कि वह सभी कोरोना संबंधी दिशा-निर्देशों और सावधानियों का पालन करें। राज्यपाल विश्वविद्यालय कैंपस के माध्यम से छात्रों को जनभागीदारी अभियान से जोड़ने में एक महती भूमिका निभा सकते हैं। उन्होंने विश्वविद्यालयों और कॉलेज परिसरों के सुविधाओं का बेहतर उपयोग करने पर ध्यान केंद्रित करने की जरूरत पर बल दिया। उन्होंने कहा कि पिछली बार की तरह इस बार भी एनसीसी और एनएसएस केंद्रीय भूमिका निभा सकते हैं। प्रधानमंत्री ने इस दौरान कहा कि पिछले साल के मुकाबले अब कोरोना से लड़ने के लिए स्वास्थ्य सेवाएं बेहतर हैं। आरटी पीसीआर जांच क्षमता में बढ़ोतरी का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि इससे जुड़े हुए सभी विषयों पर आज भारत आत्मनिर्भर है। इससे जांच की खर्च में कमी आई है। प्रधानमंत्री ने जांच और पहचान के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि आरटी पीसीआर जांच को 60 प्रतिशत से 70 प्रतिशत तक लाया जाना चाहिए। उनका मानना है कि ज्यादा से ज्यादा लोगों की जांच होनी चाहिए। प्रधानमंत्री ने इस दौरान आश्वासन दिया कि सरकार वैक्सीन को उपलब्ध कराने के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध है। साथ ही इस बात को रेखांकित किया कि भारत ने 10 करोड़ टीके लगाने की बड़ी उपलब्धि हासिल कर ली है। टीका उत्सव के सकारात्मक प्रभाव का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि पिछले 4 दिनों में कई नए वैक्सीनेशन केंद्र बने हैं। इस चर्चा में उपराष्ट्रपति एम वेंकैया नायडू, गृह मंत्री अमित शाह और स्वास्थ्य मंत्री डॉ हर्षवर्धन ने भी भाग लिया। उपराष्ट्रपति ने कोरोना के खिलाफ लड़ाई में देश का नेतृत्व करने और आगे बढ़कर कदम उठाने के लिए प्रधानमंत्री की प्रशंसा की। उन्होंने वैक्सीन विकास के लिए वैज्ञानिक समुदाय के सहयोग को रेखांकित किया। साथ ही उन्होंने स्वास्थ्य कर्मियों, स्वच्छता कर्मियों और अन्य अग्रिम पंक्ति के कार्यकर्ताओं की महत्वपूर्ण भूमिका के बारे में भी अपने विचार व्यक्त किए। उपराष्ट्रपति ने राज्यपालों को आगे आकर समन्वय करने की भूमिका निभाने का आग्रह किया। इस संबंध में सर्वदलीय बैठक कराने और नागरिक समाज से जुड़े संगठनों को जोड़कर कोविड-19 उचित व्यवहार से जुड़ी जागरूकता फैलाने का अनुरोध किया। उन्होंने कहा कि टीम इंडिया स्पिरिट को अपनाया जाना चाहिये। केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने कोविड से लोगों की जीवन रक्षा के महत्व पर बल दिया। वहीं स्वास्थ्य मंत्री ने कोविड-19 और वैक्सीनेशन पर प्रस्तुति दी। राज्यों के राज्यपालों ने अपने राज्य में महामारी से निपटने के लिए किए जा रहे प्रयासों का जिक्र किया। हिन्दुस्थान समाचार/अनूप