कोलकाता में अब गंगा नदी के नीचे से होगी मालगाड़ियों की आवाजाही, बनेगी वाटर सुरंग
कोलकाता में अब गंगा नदी के नीचे से होगी मालगाड़ियों की आवाजाही, बनेगी वाटर सुरंग
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कोलकाता में अब गंगा नदी के नीचे से होगी मालगाड़ियों की आवाजाही, बनेगी वाटर सुरंग

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कोलकाता, 27 जुलाई (हि.स.)। पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता में गंगा नदी के नीचे से अत्याधुनिक ईस्ट वेस्ट मेट्रो के सुरंगे बनने के बाद अब एक और शानदार काम होने जा रहा है। खबर है कि श्यामा प्रसाद मुखर्जी पतन न्यास अब कोलकाता के एक सिरे से दूसरे सिरे तक मालवाही ट्रकों की आवाजाही के लिए अंडर वाटर सुरंग बनाने जा रहे हैं। यह सुरंग हावड़ा में गंगा नदी के नीचे से होते हुए कोलकाता में प्रवेश करेगी और कोलकाता पोर्ट ट्रस्ट तक पहुंचेगी। इससे बंगाल के बाहरी हिस्से से कोलकाता आने वाले ट्रक आसानी से इस सुरंग के जरिए कोलकाता पोर्ट ट्रस्ट पहुंच जाएंगे, जहां से माल को जहाजों पर लादकर समुद्र के रास्ते दुनिया भर में आयात निर्यात किया जा सकेगा। अगर ऐसा हुआ तो भारत में माल ढुलाई को लेकर एक मील का पत्थर स्थापित होगा। कोलकाता पोर्ट ट्रस्ट के चेयरमैन विनीत कुमार ने बताया कि बेल्जियम में इसी तरह की सुरंग उन्होंने देखा है। इसलिए कोलकाता में भी ऐसी सुरंग बनाने के लिए एक सलाहकार समिति की नियुक्ति की जाएगी। पूर्वी-पश्चिमी मेट्रो गलियारे की सफलता से उत्साहित होकर इस बारे में विचार किया जा रहा है। इसके लिए न्यास ने नदी के नीचे उसी तरह की सुरंग बनाने के बारे में अध्ययन करने के लिये परामर्शदाता बहाल करने की योजना तैयार की है। कुमार ने कहा कि यह सिर्फ एक विचार है, क्योंकि मैंने एंटवर्प बंदरगाह (बेल्जियम) में ऐसी सुरंगें देखीं। इसलिए हम एक सलाहकार की नियुक्ति कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह रोजाना 700-800 मालवाहक ट्रकों को शहर की सड़कों से दूर कर सकता है। गार्डन रीच सर्कुलर रोड, खिदिरपोर रोड, हेस्टिंग्स और विद्यासागर सेतु (दूसरा हुगली पुल) आदि से गुजरने वाले ट्रक सड़कों पर ट्रैफिक और प्रदूषण का कारण बनते हैं। उन्होंने कहा कि बंदरगाह के अधिकारी शहर के यातायात से बचने के लिये तथा ट्रकों की आवाजाही को आसान बनाने के लिये रोरो (रोल ऑन, रोल ऑफ) नौका सेवाओं पर भी विचार कर रहे हैं। यह पूछे जाने पर कि क्या कोविड-19 के मौजूदा प्रकोप ने बंदरगाह की गतिविधियों को प्रभावित किया है, उन्होंने कहा, "पिछले सप्ताह एक दिन में आठ पोतचालक इस बीमारी से संक्रमित पाये गये। बंदरगाह के कर्मचारियों और सहायक कर्मचारियों को मिलाकर अभी तक 180 लोग इससे संक्रमित हो चुके हैं। हमने एक दिन के लिये भी परिचालन बंद नहीं किया, क्योंकि ऐसा करना बंदरगाह के उपयोगकर्ताओं के लिये असुविधा का कारण बनता है।’ हिन्दुस्थान समाचार/ओम प्रकाश/बच्चन-hindusthansamachar.in