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पाकिस्तानी अखबारों सेः भारत के साथ व्यापार की बात चलते ही हर तरफ सुनाई दी कश्मीर की रट

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- आतंकवाद के पालनहार देश ने अब प्रधानमंत्री मोदी को दी कट्टरपंथ त्यागने की नसीहत नई दिल्ली, 03 अप्रैल (हि.स.)। पाकिस्तान से शनिवार को प्रकाशित अधिकांश समाचारपत्रों ने भारत-पाकिस्तान सम्बंधों को लेकर इमरान खान सरकार के जरिए लिए गए फैसले से सम्बंधित खबरें प्रकाशित की हैं। अखबारों का कहना है कि इमरान खान सरकार ने शुक्रवार को आयोजित एक बैठक में फैसला लिया है कि भारत के साथ कश्मीर समस्या के समाधान होने तक किसी भी तरह का कोई व्यापार नहीं किया जाएगा। अखबारों का कहना है कि प्रधानमंत्री इमरान खान ने स्पष्ट किया है कि जम्मू-कश्मीर का संवैधानिक दर्जा बहाल होने तक भारत से किसी भी तरह का कोई व्यापार नहीं किया जाएगा और ना ही किसी तरह की कोई बातचीत की जाएगी। अखबारों ने ब्रिटेन के जरिए पाकिस्तान सहित बांग्लादेश व अन्य देशों को कोरोना वायरस के फैलाव के चलते रेड लिस्ट में शामिल किए जाने की खबरें भी दी हैं। अखबारों का कहना है कि ब्रिटेन में इन देशों से आने वालों पर प्रतिबंध लगाया जा रहा है। यह प्रतिबंध 9 अप्रैल सुबह चार बजे से लागू किया जाएगा। अखबारों ने चुनाव आयोग का एक फैसला काफी अहमियत से प्रकाशित किया है। इस फैसले में चुनाव आयोग ने डसका विधानसभा क्षेत्र में हुए उपचुनाव को रद्द करके वहां पर दोबारा चुनाव कराने का फैसला लिया है। चुनाव आयोग ने तहरीक-ए-इंसाफ पार्टी की मांग को रद्द करते हुए यहां पर 10 अप्रैल को बैलेट पेपर से चुनाव कराने का फैसला लिया है। अखबारों ने पाकिस्तान इंटरनेशनल एयरलाइंस की संपत्तियों को बेचे जाने से सम्बंधित एक खबर भी काफी प्रमुखता से प्रकाशित की है। अखबारों का कहना है कि सरकार की तरफ से यह संदेश दिया गया है कि पीआईए की कोई भी संपत्ति बेची नहीं जाएगी। सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि पीआईए का होटल रोजवेल्ट बेचने का कोई इरादा नहीं है। सरकार का कहना है कि फिलहाल होटल को कोरोना वायरस के बढ़ते फैलाव को देखते हुए बंद करने का फैसला किया गया है। यह सभी खबरें रोजनामा औसाफ, रोजनामा जिन्नाह, रोजनामा नवाएवक्त, रोजनामा खबरें, रोजनामा पाकिस्तान और रोजनामा जंग ने अपने पहले पृष्ठ पर प्रकाशित की हैं। रोजनामा जंग ने हिमालयन कश्मीर क्षेत्र में मशीनगन और भारी तोपों के शांत रहने की खबर काफी अहमियत से प्रकाशित की है। इस खबर में बताया गया है कि भारत-पाकिस्तान सीमा पर दोनों देशों के बीच हुए सीजफायर समझौते पर अमल करते हुए वहां पर फिलहाल शांति बनी हुई है। दोनों देशों की सेनाओं की तरफ से कोई भी फायरिंग की घटना को अंजाम नहीं दिया जा रहा है। अखबार का कहना है कि भारतीय सेना की तरफ से क्रैकडाउन और बागियों के हमले के सिलसिले को रोकने के लिए जम्मू-कश्मीर में अभियान को जारी रखा गया है। विशेषज्ञों का कहना है कि जंगबंदी इस समस्या को मजबूती दे सकती है। अखबार का कहना है कि भारतीय सेना के जरिए दसियों हजार लोगों की जान ली गई है। रोजनामा पाकिस्तान ने पाकिस्तान के साइंस और टेक्नोलॉजी मंत्री फव्वाद चौधरी का एक बयान काफी अहमियत से प्रकाशित किया है जिसमें उन्होंने कहा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कट्टरपंथ की पॉलिसी से जब तक पीछे नहीं हटते तब तक भारत से किसी भी तरह का व्यापार नहीं हो सकता है। उनका कहना है कि राजनीतिक स्तर पर हमारे सम्बंध भारत से अच्छे नहीं हैं। अखबार का कहना है कि कश्मीर में जो कुछ भी हो रहा है वह किसी से भी ढका छिपा नहीं है। कैदियों के साथ नाइंसाफी, राजनीतिक दलों के नेताओं को नजरबंद करना और उन्हें परेशान करना उचित नहीं है। पाकिस्तान भारत से सम्बंधों को बेहतर बनाना चाहता है। क्षेत्र में अमन-चैन कायम करना चाहता है तो क्या हम भारत में होने वाले लाखों मुसलमानों के खून को भूल जाएं। हिन्दुस्थान समाचार/एम ओवैस/मोहम्मद शहजाद