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पाकिस्तानी अखबारों सेः सीनेट चुनाव, कर्ज और मंहगाई पर सरकार व विपक्ष में खींचतान जारी

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नई दिल्ली, 19 फरवरी (हि.स.)। पाकिस्तान से शुक्रवार को प्रकाशित अधिकांश समाचारपत्रों ने सीनेट चुनाव को लेकर सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस गुलजार अहमद के जरिए की गई सख्त टिप्पणी पर समाचार प्रकाशित किए हैं। अखबारों ने लिखा है कि जस्टिस गुलजार अहमद ने कहा है कि पहले पाकिस्तान मुस्लिम लीग नवाज गुरूप और पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी ने सीनेट चुनाव खुफिया बैलेट से कराने के बजाय खुले बैलेट से कराने से सम्बंधित फैसला लिया था लेकिन अब वह इससे पलट गए हैं। जस्टिस गुलजार का कहना है कि अपने राजनीतिक स्वार्थों के कारण दोनों पार्टियां पर्टियां संविधान और गणतंत्र का गला घोट रही हैं। अखबारों ने सत्ताधारी तहरीक-ए-इंसाफ पार्टी को सिंध प्रांत से सीनेट चुनाव में बिना मुकाबला दो सीटों पर जीत हासिल होने और पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी को भी दो सीटें हासिल होने से सम्बंधित खबरें प्रकाशित की हैं। अखबारों ने पाकिस्तान के सेना प्रमुख जनरल कमर वाजवा की पाकिस्तान में स्थित चीन के राजदूत से मुलाकात करने की खबरें भी प्रकाशित की हैं। अखबारों ने लिखा है कि जरनल कमर बाजवा की चीनी राजदूत से मुलाकात में चीन के जरिए पाकिस्तान में बनाए जा रहे सीपैक के कामों को लेकर संतोष व्यक्कत किया गया है। वाधवा ने कहा है कि सीपैक निर्माण से पाकिस्तान में खुशहाली आएगी लेकिन चीन को भी इससे काफी फायदा होने वाला है। अखबारों ने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान का एक बयान भी काफी प्रमुखता से प्रकाशित किया है जिसमें उन्होंने कहा है कि जरदारी और नवाज शरीफ के दौर का 20 अरब डालर का विदेशी कर्जा हमने वापस किया है और अब देश में बढ़ रही मंहगाई को कंट्रोल करने का प्रयास किया जाएगा। उन्होंने यह बातें एक सम्मेलन को सम्बोधित करते हुए कही हैं। इसी सम्मेलन में उन्होंने यह भी कहा है कि पाकिस्तान अमेरिका के साथ मिलकर अफगानिस्तान में शांति बहाली के लिए किए जा रहे प्रयासों में पूरी तरह से सहयोग करने को तैयार है। उन्होंने कहा है कि अफगानिस्तान हमारा बिरादर मुल्क है और वहां पर शांति बहाली कराने की जिम्मेदारी हमारी है। अखबारों ने यह खबर भी काफी प्रमुखता से छापी है जिसमें बताया गया है कि पाकिस्तान के विपक्षी दलों के मोर्चा पीडीएम के लांग मार्च करने का जो फैसला लिया है, उसका खर्चा पीपीपी उठाने के लिए तैयार नहीं है। अखबार का कहना है कि पीडीएम ने इसके लिए एक कमेटी बनाई गई है जिसकी रिपोर्ट आने के बाद रणनीति बनाई जाएगी। पीडीएम नेताओं ने यह तय किया है कि लांग मार्च को सरकार की तरफ से जिस जगह भी रोका जाएगा, उस जगह पर धरना देकर बैठ जाएंगे और तब तक धरना जारी रहेगा जब तक इमरान सरकार का पतन नहीं हो जाता है। पीपीपी का कहना है कि लांग मार्च पर काफी पैसा खर्च होगा जिसको सहन कर पाना हमारे बस की बात नहीं है। यह सभी खबरें रोजनामा औसाफ, रोजनामा जिन्नाह, रोजनामा नवाएवक्त, रोजनामा खबरें, रोजनामा पाकिस्तान और रोजनामा जंग ने अपने पहले पृष्ठ पर प्रकाशित की हैं। रोजनामा नवाएवक्त ने पाकिस्तान के विदेश मंत्री मखदूम शाह महमूद कुरैशी का एक बयान प्रकाशित किया है जिसमें उन्होंने कहा है कि पाकिस्तान के सम्बंध 10 साल बाद फिर से मिस्र से स्थापित हुए हैं। उनका कहना है कि मिस्र हमारा बिरादर मुल्क है और इससे हमारे अच्छे और बेहतर ताल्लुकात बनाने की उम्मीद है। महमूद कुरैशी ने अरब लीग मिशन के मुख्यालय का भी दौरा कर मिशन के महासचिव से मुलाकात की है। अखबार ने लिखा है कि कुरैशी ने अरब लीग महासचिव से क्षेत्र में व्याप्त स्थिति से उन्हें अवगत कराया है। रोजनामा जंग ने भारत में चल रहा है किसान आंदोलन से संबंधित खबर प्रकाशित करते हुए लिखा है कि कल गुरुवार के दिन किसान संगठनों के आह्वान पर देशभर में जगह-जगह रेलों को रोककर के अपना विरोध दर्ज कराया गया है। अखबार का कहना है कि इस कारण रेल यात्रियों को काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ा है। अखबार कहना है की रेलों के जगह-जगह रुक जाने की वजह से यात्रियों को अपने गंतव्य स्थानों तक जाने में कई घंटे का विलंब सहना पड़ा है। अखबार का कहना है कि मोदी सरकार ने किसानों को किसान विरोधी कानूनों का विरोध करने पर मजबूर किया है। संगठनों का कहना है कि भारत सरकार के जरिए जो तीन कृषि कानून संसद से पास कराए गए हैं, वह किसान विरोधी हैं। जब तक इन कानूनों को सरकार वापस नहीं ले लेती तब तक किसान प्रदर्शन करते रहेंगे। रोजनामा खबरें ने एक खबर काफी अहमियत से छापी है। खबर में बताया गया है कि जिस यूरोपियन यूनियन के राजनयिकों को भारतीय जम्मू कश्मीर का दौरा कराया गया है, उससे कुछ खास निककल कर नहीं आने वाला है। अखबार का कहना है कि इन राजनयिको में से अधिकांश भारत समर्थित थे ओर वह भारत की ही गाएंगे। पाकिस्तान विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा है कि यह दौरा प्रायोजित था। अगर भारत सच में कश्मीर की समस्या से दुनिया को आगाह कराना चाहता है तो वह एक स्वतंत्रता और निष्पक्ष सांसदों और राजनयिकों को वहां पर भेजने की इजाजत दे तभी कश्मीर के सही हालात सामने आ पाएंगे। अखबार का कहना है कि विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा है कि कश्मीर में हालात काफी खराब हं।ै वहां पर नेताओं को सरकारी एजेंसियों के जरिए प्रताणित करने की कोशिश की जा रही है। अधिकांश नेताओं को नजरबंद रखा जा रहा है और उन्हें किसी से मिलने नहीं दिया जा रहा है। हिन्दुस्थान समाचार/एम ओवैस/मोहम्मद शहजाद