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लोकतंत्र की सफलता के लिए समाज के अंतिम व्यक्ति का भला होना जरूरीः लोकसभा अध्यक्ष

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शिलांग/नई दिल्ली, 25 फरवरी (हि.स.)। लोक सभा अध्यक्ष ओम बिरला ने कहा कि भारत में लोकतंत्र की समृद्ध परम्परा रही है और पूरी दुनिया में यदि आज लोकतंत्र का प्रसार हो रहा है तो इसके पीछे कहीं न कहीं भारत के महान लोकतंत्र की भूमिका अग्रणी रही है। उन्होंने यह भी कहा कि संसद से लेकर राज्य विधानमंडलों और स्थानीय निकायों तक सभी संस्थाओं को आपसी समन्वय और सहभागिता से कार्य करना चाहिए और अपनी सर्वोत्तम प्रक्रियाओं को एक-दूसरे के साथ साझा करना चाहिए। उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि लोकतंत्र तभी सफल हो सकता है जब हमारे कार्यों से समाज के अंतिम व्यक्ति का भला हो। संवाद, वाद-विवाद और चर्चा से इस लक्ष्य को प्राप्त किया जा सकता है। लोक सभा अध्यक्ष ओम बिरला ने गुरुवार को शिलांग में मेघालय विधान सभा के सदस्यों को सम्बोधित किया। मेघालय विधान सभा के अध्यक्ष मेतबाह लिंग्दोह, मुख्यमंत्री, डॉ. कॉनरेड ए. संगमा, नेता प्रतिपक्ष मुकुल संगमा भी इस अवसर पर उपस्थित थे। कोविड-19 महामारी के दौरान लोक सभा में हुए विधायी कार्य का जिक्र करते हुए बिरला ने कहा कि संसद ने महामारी के दौरान कार्य करके जनता को सकारात्मक संदेश दिया और उनका विश्वास बढ़ाया। उन्होंने कहा कि ऐसे चुनौतीपूर्ण समय में विधायकों की ज़िम्मेदारी और अधिक बढ़ जाती है और हमारे संयुक्त प्रयासों से ही हमें कोविड-19 के कारण आई चुनौतियों का सामना करने में मदद मिली। इस सम्बन्ध में लोक सभा अध्यक्ष ने महामारी के दौरान विधान सभा का सत्र बुलाये जाने के लिए मेघालय विधान सभा की सराहना की। उन्होंने विधान सभा की पद्धति और प्रक्रिया में शून्यकाल को शामिल किए जाने की पहल की भी सराहना की। सरदार वल्लभ भाई पटेल का स्मरण करते हुए लोक सभा अध्यक्ष ने कहा कि हमारे युवाओं को अपने संवैधानिक कर्तव्यों और दायित्वों के प्रति संकल्पित होना चाहिए। बिरला ने कहा कि नेशन फर्स्ट’ ही हमारे देश के युवाओं के लिए ‘मूलमंत्र होना चाहिए। इस अवसर पर बिरला ने विधायी निकायों की कार्यकुशलता को बढ़ाने के लिए सूचना और संचार साधनों का अधिकाधिक उपयोग किए जाने पर बल दिया ताकि जनाकांक्षाओं को शीघ्र और अधिक पारदर्शी ढंग से पूरा किया जा सके। उन्होंने डिजिटल डिवाइड को दूर करके ‘जन-केंद्रित, समावेशी और विकासोन्मुख समाज’ के निर्माण की अपील की। हिन्दुस्थान समाचार/अजीत