विश्व स्तन पान दिवस :  मां का स्तन पान शिशु के लिए रक्षा कवच - डॉ. दलवीर सिंह
विश्व स्तन पान दिवस : मां का स्तन पान शिशु के लिए रक्षा कवच - डॉ. दलवीर सिंह
देश

विश्व स्तन पान दिवस : मां का स्तन पान शिशु के लिए रक्षा कवच - डॉ. दलवीर सिंह

news

चन्द्रपाल सिंह सेंगर फर्रुखाबाद, 31 जुलाई (हि.स.)। विश्व स्तनपान सप्ताह हर साल अगस्त माह के पहले सप्ताह 1 अगस्त से 7 अगस्त तक मनाया जाता है। इसकी शुरुआत 1991 में महिलायों के बीच स्तनपान को लेकर जागरूकता फैलाने से हुई थी। हर वर्ष इसे एक नए विषय के साथ मनाया जाता है। इस वर्ष “स्वस्थ समाज के लिए स्तनपान का संकल्प" इस विषय के साथ मनाया जा रहा है। परिवार कल्याण कार्यक्रम के नोडल डॉ. दलवीर सिंह ने बताया कि नवजात शिशु के लिए पीला गाढ़ा चिपचिपा युक्त मां का के स्तन का पहला दूध (कोलेस्ट्रम) संपूर्ण आहार होता है। जिसे बच्चे के जन्म के तुरंत बाद एक घंटे के भीतर ही शुरू कर देना चाहिए। इसके अलावा सामान्यत: बच्चे को 6 महीने की अवस्था तक नियमित रूप से स्तनपान कराते रहना चाहिए। शिशु को 6 महीने की अवस्था के बाद भी लगभग दो वर्ष तक अथवा उससे अधिक समय तक स्तनपान कराते रहना चाहिए। साथ ही साथ छह माह के बाद बच्चे को पौष्टिक पूरक आहार भी देने शुरू कर देना चाहिए। कोविड महामारी के दौरान स्तनपान से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारी - शिशु को जन्म के एक घंटे के अंदर मां का दूध पिलाएं और पहले 6 महीने सिर्फ स्तनपान कराएं। - यदि मां कोविड से संक्रमित है या उसकी संभावना है तब भी मां शिशु को स्तनपान करा सकती है। - यदि बच्चा बीमार है और वह कोविड से संक्रमित है और यदि वह दूध पी पा रहा है तो मां अवश्य शिशु को स्तनपान करायें। जनपद स्तरीय कार्यशाला के उद्देश्य - स्तनपान सप्ताह से जुड़ी गतिविधियों से प्रतिभागियों को अवगत कराना। - कोविड के दौरान स्तनपान संबंधी प्रोटोकॉल से सभी को अवगत कराना। - स्तनपान अभियान की गतिविधियों को गुणवत्तापूर्वक चलाने से स्वास्थ्य विभाग की भूमिका को सभी को अवगत करना। बच्चे को स्तनपान से लाभ मां के दूध में बच्चे के लिए आवश्यक प्रोटीन, वसा, कैलोरी, लैक्टोज, विटामिन, लोहा, खनिज, पानी और एंजाइम पर्याप्त मात्रा में होते है। मां का दूध पचने में त्वरित और आसान होता है । यह बच्चे की प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाता है, जो कि भविष्य में उसे कई तरह के संक्रमणों से सुरक्षित करता है। - यह बच्चे के मस्तिष्क के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका का निभाता है। - यह किफ़ायती और संक्रमण मुक्त होता है। - स्तनपान बच्चे और मां के बीच भावनात्मक बंधन को बढ़ाता है। मां को स्तनपान कराने के लाभ - यह स्तन व डिम्बग्रंथि के कैंसर की संभावना को कम करता है। - यह प्रसव पूर्व खून बहने और एनीमिया की संभावना को कम करता है। - यह मां को अपनी पुरानी शारीरिक संरचना वापस प्राप्त करने में सहायता करता हैं। - स्तनपान कराने वाली माताओं के बीच मोटापा सामान्यत: कम पाया जाता है। राष्ट्रीय स्वास्थ्य सर्वेक्षण 4 (2015-2016) के अनुसार जनपद में तीन वर्ष से कम उम्र के 22.1 प्रतिशत बच्चे ही जन्म के एक घंटे के भीतर माँ को दूध पीते हैं और 56.4 प्रतिशत बच्चे ही छह माह के अन्दर माँ का दूध पी पाते हैं। हिन्दुस्थान समाचार-hindusthansamachar.in