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उत्तर प्रदेश, दिल्ली में मौजूदा वैक्सीन शेयर जरूरत से काफी कम : रिपोर्ट

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नई दिल्ली, 22 मई (आईएएनएस)। कोविड-रोधी टीके की उपलब्धता आसान होने के बावजूद उत्तर प्रदेश, दिल्ली और तमिलनाडु जैसे राज्यों को इसकी कमी का सामना करना पड़ सकता है। एमके ग्लोबल फाइनेंशियल सर्विसेज की एक शोध रिपोर्ट के अनुसार, उत्तर प्रदेश और दिल्ली की मौजूदा वैक्सीन हिस्सेदारी मांग से काफी कम है। एमके के अर्थशास्त्रियों ने कहा है कि उनकी स्टडी के अनुसार, उत्तर प्रदेश, तमिलनाडु और दिल्ली जैसे राज्यों को वैक्सीन का हिस्सा उनकी जरूरत से कम मिल रहा है, जबकि राजस्थान, गुजरात और महाराष्ट्र को अपेक्षाकृत अधिक प्राप्त हो रहा है। एमके की प्रमुख अर्थशास्त्री माधवी अरोड़ा ने कहा, वर्तमान में राज्यों में और यहां तक कि राज्यों के भीतर, शहरी और ग्रामीण जिलों के बीच भी वैक्सीन प्रशासन में बड़ा बिखराव (डिस्परशन) है। जुलाई तक वैक्सीन की आपूर्ति की चिंता कम हो सकती है, फिर भी हमें एक लंबा रास्ता तय करना होगा। इसके अलावा, रिपोर्ट में कहा गया है कि टीकाकरण का राजकोषीय बोझ राज्यों के बीच उनकी आबादी के अनुसार अलग-अलग होगा। राज्यों के लिए, टीकाकरण का राजकोषीय बोझ उनकी आबादी और 45 वर्ष आयु वर्ग के लिए वितरण के हिसाब से अलग-अलग होगा। टीकाकरण लागत के अध्ययन के आकलन से पता चलता है कि उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ जैसे राज्य अपने राज्यों के उत्पादन के प्रतिशत के रूप में टीकाकरण की उच्चतम लागत वहन करने में सबसे आगे हैं। इसके अलावा, रिपोर्ट में कहा गया है कि टीकाकरण अभियान को आगे बढ़ाना आर्थिक सामान्यीकरण के लिए सबसे सस्ता और सबसे व्यवहार्य नीति मार्ग है। अरोड़ा ने कहा कि यह मानते हुए कि कोई अपव्यय या कोई भी वैक्सीन बर्बाद नहीं हुई है, सार्वभौमिक आबादी के टीकाकरण की कुल अनुमानित कल्याण लागत सकल घरेलू उत्पाद का लगभग 0.7 प्रतिशत होगी। --आईएएनएस एकेके/एसजीके