ईएसआईसी ने ​​भी अपने अस्पतालों में किये ​कोविड​ से निपटने के इंतजाम ​

ईएसआईसी ने ​​भी अपने अस्पतालों में किये ​कोविड​ से निपटने के इंतजाम ​
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- कोविड आइसोलेशन बिस्तर, आईसीयू व वेंटिलेटर 20% बिस्तर आरक्षित - कोविड-19 संक्रमित होने पर अस्पतालों में करा सकते हैं नि:शुल्क इलाज सुनीत निगम नई दिल्ली, 29 अप्रैल (हि.स.)। कोविड-19 महामारी के दौरान कर्मचारी राज्य बीमा निगम (ईएसआईसी) ने भी अपने हितलाभार्थियों को चिकित्सा देखभाल और राहत प्रदान करने के लिए प्रयास तेज किये हैं। ईएसआईसी ने अपने अस्पतालों में कोविड आइसोलेशन बिस्तर, आईसीयू तथा वेंटिलेटर के इंतजाम किये हैं। बीमाकृत व्यक्ति या उसके परिवार के सदस्य कोविड-19 से संक्रमित होने की स्थिति में इन अस्पतालों में निशुल्क इलाज करा सकते हैं। कर्मचारी राज्य बीमा निगम ने अपने अस्पतालों को कोविड-19 समर्पित घोषित करके उनमें 3676 कोविड आइसोलेशन बिस्तर, 229 आईसीयू बिस्तर तथा 163 वेंटिलेटर बिस्तर के इंतजाम किये हैं। इसके अलावा राज्य सरकारों द्वारा संचालित 26 अस्पतालों में 2023 बिस्तरों की व्यवस्था की गई है। इसके साथ ही अस्पतालों में न्यूनतम 20% बिस्तर बीमाकृत व्यक्तियों, लाभार्थियों, स्टाफ तथा पेंशनरों के लिए आरक्षित करने के निर्देश दिए गए हैं। फरीदाबाद (हरियाणा) के चिकित्सा महाविद्यालय एवं अस्पताल और सनथ नगर (तेलंगाना) के चिकित्सा महाविद्यालय एवं अस्पताल में प्लाज्मा थेरेपी ने गंभीर कोविड-19 रोगियों के जीवन को बचाने के लिए आशाजनक परिणाम दिए हैं। बीमाकृत व्यक्ति बिना किसी रेफरल पत्र के इन अस्पतालों से सीधे ही आकस्मिक या गैर-आकस्मिक चिकित्सा उपचार ले सकते हैं। श्रम और रोजगार मंत्रालय की ओर से बताया गया है कि बीमाकृत व्यक्ति या उसके परिवार का सदस्य कोविड-19 से संक्रमित होने पर किसी निजी अस्पताल में उपचार लेने में हुए खर्च का भुगतान ले सकता है। कोविड-19 से संक्रमित होने पर कार्य से अनुपस्थित होने की स्थिति में अपनी पात्रता के अनुरूप बीमारी हितलाभ का दावा किया जा सकता है। यह बीमारी हितलाभ औसत दैनिक मजदूरी के 70% की दर पर 91 दिन के लिए दिया जाता है। बीमाकृत व्यक्ति बेरोजगार होने पर अटल बीमित व्यक्ति कल्याण योजना (एबीवीकेवाई) के अंतर्गत अधिकतम 90 दिन के लिए दैनिक अर्जन के 50% की दर पर राहत प्राप्त कर सकता है। इसे पाने के लिए बीमाकृत व्यक्ति को अपना दावा www.esic.in पर ऑनलाइन जमा करना होगा। मंत्रालय की ओर से यह भी बताया गया है कि बीमाकृत व्यक्ति आईडी एक्ट, 1947 के अनुरूप छंटनी या फैक्ट्री के बंद होने के कारण बेरोजगार होने पर आरजीएसकेवाई के अंतर्गत 2 वर्ष की अवधि के लिए बेरोजगारी भत्ते का दावा कर सकता है। इसके अलावा बीमाकृत व्यक्ति की दुर्भाग्यपूर्ण मृत्यु की स्थिति में उसके परिवार के सबसे बड़े जीवित सदस्य को 15 हजार रुपये अंत्येष्टि व्यय के लिए भुगतान किया जाता है। हिन्दुस्थान समाचार