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स्वास्थ्य के क्षेत्र में अहम शख्सियत बनकर उभरे डॉ. हर्षवर्धन

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नीति गोपेन्द्र भट्ट केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्री डॉ. हर्षवर्धन स्वास्थ्य के क्षेत्र में अहम शख्सियत बनकर उभर रहे हैं। पिछले वर्ष मई माह में विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के कार्यकारी बोर्ड के अध्यक्ष बनने के बाद डॉ. हर्षवर्धन को हाल ही में 'स्टॉप टीबी पार्टरशिप बोर्ड' नामक ग्लोबल संस्था का तीन वर्षों के लिए अध्यक्ष बनाया गया है। उन्हें इस पद पर भारत द्वारा वर्ष 2025 तक देश को टीबी से मुक्त कराने की प्रतिबद्धता दर्शाने के फलस्वरूप नियुक्त किया गया है। इससे पहले पिछले वर्ष दिसम्बर में डॉ. हर्षवर्धन को 'वैक्सीन और टीकाकरण के लिए ग्लोबल एलायंस' (गावी) का भी तीन वर्षों के लिए सदस्य बनाया गया है। डॉ. हर्षवर्धन का विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के कार्यकारी बोर्ड अध्यक्ष के रूप में एक वर्ष का कार्यकाल आगामी माह मई में पूरा हो जाएगा लेकिन वे वर्ष 2023 तक विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के इस कार्यकारी बोर्ड के सदस्य बने रहेंगे। इन सभी नए दायित्वों के बाद डॉ. हर्षवर्धन के कन्धों पर बहुत बड़ी जिम्मेदारी आ गई है। वे ऐसे समय इन सभी महत्वपूर्ण पदों पर आसीन हुए हैं जब सारा विश्व कोविड-19 की वैश्विक महामारी के दौर से गुजर रहा है। देश-दुनिया में हालात सुधरने के बाद पुनः विकट हो रहे हैं। कोरोना से मुक्ति के लिए भारत सहित विश्व के कई अन्य देशों में टीकाकरण अभियान चलाया जा रहा है। भारत के वैज्ञानिकों ने रिकॉर्ड समय में दो स्वदेशी वैक्सीन का निर्माण कर इस जानलेवा वायरस से छुटकारा पाने की दिशा में क्रांतिकारी कदम उठाये हैं। डॉ. हर्षवर्धन पूर्व में भी विश्व स्वास्थ्य संगठन के पोलियो उन्मूलन पर महत्वपूर्ण विशेषज्ञ सलाहकार समूह और वैश्विक टेक्नीकल परामर्श समूह जैसी कई प्रतिष्ठित समितियों के सदस्य रहे हैं। उन्होंने विश्व स्वास्थ्य संगठन के सलाहकार के रूप में भी कार्य किया है। डॉ. हर्षवर्धन के पास भारत और दक्षिणी एशिया में पोलियो उन्मूलन कार्यक्रम को सफल बनाने के साथ ही पर्यावरण की रक्षा के लिए एक बड़े नागरिक अभियान 'ग्रीन गुड डीड्स' की शुरुआत करने और स्वयं के एक वरिष्ठ चिकित्सक होने का व्यापक अनुभव है। इससे विश्व को उनके इन महत्वपूर्ण पदों पर रहते हुए स्वास्थ्य के क्षेत्र में और भी बेहतर परिणाम मिलने का विश्वास है। डॉ. हर्षवर्धन निश्चित ही इस परीक्षा में खरे उतरेंगे और दुनिया को कोरोना मुक्त करने में भारत की भूमिका को एक नई प्रतिष्ठा दिलायेंगे, इसमें सन्देह नहीं है। वे कर्मठ व्यक्ति हैं और अपनी नई जिम्मेदारी को निभाने में सक्षम हैं। उन्हें पूर्व में पोलियो 'ईरेडिकेशन चेंपियन अवॉर्ड' भी मिला है। पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने रोटरी इंटरनेशनल के एक कार्यक्रम में इस अवॉर्ड के लिए उन्हें 'स्वास्थ्य वर्धन' नाम से विभूषित किया था। आज देश और दुनिया के सामने सबसे बड़ी अग्नि परीक्षा कोविड-19 की अनसुलझी पहेली की चुनौती से निपटना है। जहां तक भारत का प्रश्न है, कोरोना महामारी से बचाव के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के कुशल नेतृत्व में केन्द्रीय स्वास्थ्य मन्त्रालय ने अन्य मन्त्रालयों और राज्य सरकारों के साथ मिलकर समय रहते सामूहिक प्रयास और कारगर उपाय किए हैं। जिससे अन्य देशों के मुकाबले भारत में मृत्यु दर और रिकवरी दर बहुत बेहतर रही है। डॉ. हर्षवर्धन भारतीय राजनीति के कर्मठ और जुझारू नेता हैं। उनकी गिनती भारत के बहुत ही सज्जन और सुसंस्कृत जननेता के रूप में होती है। चिकित्सा-विशेषज्ञ और कुशल प्रशासक होने के साथ-साथ उन्होंने प्रौद्योगिकी विशेषज्ञ के रूप में भी देश का गौरव बढ़ाया है। वे अपनी प्रतिभा को विश्वव्यापी कर देश का गौरव बढ़ा रहे हैं। वे कर्मयोगी हैं, देश की सेवा के लिये सदैव तत्पर रहते हैं। वे किसी भी पद पर रहे, हर स्थिति में उनकी सक्रियता जीवंत बनी रहती है। वे सिद्धांतों एवं आदर्शों पर जीने वाले व्यक्तियों के प्रतीक हैं। डब्ल्यूएचओ सहित अन्य वैश्विक संस्थाओं के अध्यक्ष और सदस्य के रूप में उनका चयन विश्व स्वास्थ्य स्तर के ऊँचे मापदण्डों पर उनका कौशल और विशेषज्ञता, राजनैतिक जीवन में शुद्धता, सिद्धान्तों और मूल्यों की राजनीति का सम्मान है। डॉ. हर्षवर्धन ने गणेश शंकर विद्यार्थी मेमोरियल मेडिकल कॉलेज कानपुर से 1979 में चिकित्सा में स्नातक और 1983 में चिकित्सा में स्नातकोत्तर उपाधि प्राप्त की। वे 1993 से जनसेवा से जुड़े हैं। 1993 में वे दिल्ली विधानसभा के लिए पहली बार विधायक चुने गए। वे लगातार पांच बार विधानसभा के सदस्य रहे और मई 2014 में चांदनी चौक संसदीय क्षेत्र से 16वीं लोकसभा के सदस्य निर्वाचित हुए। वर्ष 1993 से 1998 के बीच उन्होंने दिल्ली सरकार के स्वास्थ्य, शिक्षा, विधि और न्याय तथा विधायी कार्य के मंत्री के रूप में कार्य किया। दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री के रूप में 1994 में उनके नेतृत्व में 'पल्स पोलियो कार्यक्रम' की पायलट परियोजना का सफल कार्यान्वयन हुआ जिसके तहत दिल्ली में तीन वर्ष तक की आयु के 12 लाख शिशुओं का टीकाकरण किया गया। इस कार्यक्रम से 2014 में भारत के पोलियो मुक्त बनने की बुनियाद रखी गई। उन्होंने धूम्रपान निषेध और गैर धूम्रपान कर्ता स्वास्थ्य संरक्षण बिल पारित कराने और उसे लागू करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इस कानून का बाद में देश के विभिन्न राज्यों ने अनुसरण किया। डॉ. हर्षवर्धन को 2014 में भारत सरकार के केबिनेट मन्त्री के रूप में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री बनाया गया। बाद में उन्हें केंद्रीय विज्ञान और प्रौद्योगिकी तथा पृथ्वी विज्ञान मंत्री बनाया गया। वे पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री भी रहे। वे दिल्ली के चांदनी चौक संसदीय क्षेत्र से 17वीं लोकसभा के लिए दोबारा संसद सदस्य निर्वाचित हुए है। उन्हें 30 मई, 2019 को केन्द्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण, विज्ञान और प्रौद्योगिकी तथा पृथ्वी विज्ञान मंत्री बनाया गया। डॉ. हर्षवर्धन कोरोना काल में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के प्रमुख सेनापति के रूप में भी उभरे। उन्होंने पिछले एक वर्ष में जिस प्रकार रात-दिन मेहनत कर अपने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय कर्तव्यों एवं जिम्मेदारियों का निर्वहन किया है उसकी सर्वत्र प्रशंसा हो रही है। (लेखक, स्वतंत्र पत्रकार हैं।)