हाईकोर्ट ने दिल्ली यूनिवर्सिटी से पूछा परीक्षा का शेड्यूल
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हाईकोर्ट ने दिल्ली यूनिवर्सिटी से पूछा परीक्षा का शेड्यूल

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नई दिल्ली, 09 जुलाई (हि.स.)। दिल्ली हाईकोर्ट ने दिल्ली यूनिवर्सिटी को आदेश दिया कि वह परीक्षा का पक्का शेड्यूल और डेटलाइन तैयार कर कोर्ट को बताए। जस्टिस हीमा कोहली की अध्यक्षता वाली बेंच ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये सुनवाई के बाद फाइनल ईयर की परीक्षाएं अगस्त महीने के मध्य तक टाले जाने के उसके फैसले की खिंचाई की। कोर्ट ने दिल्ली यूनिवर्सिटी को परीक्षा के पक्के शेड्यूल को लेकर 13 जुलाई तक हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया। सुनवाई के दौरान यूजीसी की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि हर यूनिवर्सिटी को सितंबर के अंत तक परीक्षा पूरी कर लेने का निर्देश दिया गया है। इसके लिए यूनिवर्सिटीज ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों मोड में परीक्षा आयोजित कर सकते हैं। यूजीसी ने फाइनल ईयर के छात्रों को आंतरिक आकलन के आधार पर प्रमोट करने का विकल्प नहीं दिया है। तब कोर्ट ने कहा कि दिल्ली यूनिवर्सिटी ने छात्रों के समक्ष काफी कम विकल्प रखे हैं। दिल्ली यूनिवर्सिटी कछुआ की गति से काम कर रही है। हाईकोर्ट ने दिल्ली यूनिवर्सिटी को अपनी पॉलिसी लगातार बदलने को लेकर फटकार लगाते हुए कहा कि क्या आप चाहते हैं कोर्ट यूनिवर्सिटी को मानिटर करे। तब दिल्ली यूनिवर्सिटी ने कहा कि इस बारे में एक आपात बैठक हुई थी जिसमें ये तय हुआ कि छात्रों को और समय दिया जाए ताकि वे बदलावों के अनुरूप अपने को ढाल सकें। तब कोर्ट ने हस्तक्षेप करते हुए पूछा कि लेकिन उस बैठक का हिस्सा यूजीसी नहीं थी। कोर्ट ने कहा कि दिल्ली यूनिवर्सिटी अंतिम समय तक अपने दस्तावेज दाखिल कर रही है। हमारे पास दस्तावेजों के ढेर लगे हैं। आपने बैठक के मिनट्स समय पर क्यों नहीं दाखिल किए। तब दिल्ली यूनिवर्सिटी ने कहा कि उप-कुलपति की अध्यक्षता में हुई बैठक में फैसला हुआ कि छात्रों को परीक्षा की तैयारी के लिए और समय दिया जाए। तब कोर्ट ने दिल्ली यूनिवर्सिटी से परीक्षा के डेट को लेकर भ्रम के बारे में फटकार लगाते हुए कहा कि छात्रों का करियर दांव पर है। हम आपकी दलीलों से संतुष्ट नहीं हैं। उसके बाद दिल्ली यूनिवर्सिटी ने कहा कि हम जल्द ही यूजीसी के दिशानिर्देशों के मुताबिक परीक्षा की डेडलाइन का ब्यौरा पेश करेंगे। तब कोर्ट ने पूछा कि जो छात्र अभी परीक्षा के लिए तैयार हैं उनका क्या होगा। कोर्ट ने कहा कि यूजीसी और मानव संसाधन मंत्रालय यूनिवर्सिटीज के एक-एक मामलों का प्रबंधन नहीं करेंगे। दिल्ली यूनिवर्सिटी को परीक्षा को लेकर अपनी खुद की नीति बनानी होगी। कोर्ट ने दिल्ली यूनिवर्सिटी से कहा कि आपने परीक्षा की तिथि छात्रों के हित को ध्यान में रखकर नहीं स्थगित की है बल्कि अपने अधिकारियों की चिंताओं का ख्याल रखा है। जब कोर्ट ने दिल्ली यूनिवर्सिटी से पूछा कि परीक्षा स्थगित करने की वजह क्या थी तो दिल्ली यूनिवर्सिटी ने बताया कि उसने ऑफलाइन परीक्षा के भविष्य को सोचकर ये फैसला किया। क्योंकि उन सारे छात्रों का जीवन दांव पर है जो डिग्रियों पर निर्भर हैं। तब कोर्ट ने कहा कि आपने मॉक परीक्षा को जिस तरह हैंडल किया है उस पर काफी कुछ कहने की जरूरत है। आप छात्रों के साथ स्पष्ट रूप से पेश आएं और परीक्षा के शेड्यूल को लेकर स्पष्ट दिशनिर्देश लेकर आएं। कुछ छात्रों का भी ख्याल कर लीजिए। कोर्ट ने तुषार मेहता से कहा कि यूजीसी ने दूसरे किन मामलों पर यूनिवर्सिटी को निर्देश जारी किया है। तब मेहता ने कहा कि वे कल तक इस पर विस्तृत हलफनामा देंगे। कोर्ट ने कहा कि अगर यूजीसी के दिशानिर्देश में असाइमेंट आधारित असेसमेंट शामिल नहीं है तो यूनिवर्सिटी को उस पर विचार करने को नहीं कहा जा सकता है। सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने कहा कि दिल्ली यूनिवर्सिटी को सभी प्रक्रियाओं का पालन करना चाहिए। उन्हें गवर्निंग काउंसिल और एकेडमिक काउंसिल से सलाह लेनी चाहिए। इस मामले पर अगली सुनवाई 14 जुलाई को होगी।दिल्ली यूनिवर्सिटी ने पिछले 8 जुलाई को कहा था कि उसने 10 जुलाई से शुरू हो रहे ओपन बुक एग्जाम को स्थगित करने का फैसला किया है। दिल्ली यूनिवर्सिटी ने बताया था कि वो 15 अगस्त तक ओपन बुक एग्जाम स्थगित करेगी। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने परीक्षा के मुद्दे पर अभी तक कोई सटीक फैसला न ले पाने के लिए दिल्ली यूनिवर्सिटी को फटकार लगाई। हाईकोर्ट ने दिल्ली यूनिवर्सिटी से कहा कि आप छात्रों के भविष्य से खिलवाड़ कैसे कर सकते हैं। आज एनएसयूआई की ओर से ओपन बुक एग्जामिनेश के खिलाफ दायर एक याचिका जस्टिस जयंत नाथ की बेंच के समक्ष लिस्ट की गई थी। सुनवाई के दौरान दिल्ली यूनिवर्सिटी के वकील ने कहा कि ऐसी ही याचिका जस्टिस मुक्ता गुप्ता की बेंच के समक्ष पहले से लंबित है। उसके बाद जस्टिस जयंत नाथ ने एनएसयूआई की याचिका को जस्टिस मुक्ता गुप्ता की बेंच को ट्रांसफर कर दिया। कोर्ट ने पिछले 7 जुलाई को दिल्ली यूनिवर्सिटी से पूछा था कि आपको इस बात का अंदाजा है कि छात्र किस मानसिक परेशानी से गुजर रहे हैं। इस तरह आप उनसे परीक्षा की तैयारी की उम्मीद कैसे कर सकते हैं। यूनिवर्सिटी प्रशासन ने बताया था कि मॉक टेस्ट के दौरान 4 लाख 86 हजार पेपर्स डाउनलोड किए गए थे और कई छात्रों ने डाउनलोड करने की कोशिश की थी। उनमें से 4 लाख 68 हजार फाईल अपलोड किए गए थे। दिल्ली यूनिवर्सिटी ने बताया था कि फाइनल ईयर में दो लाख 45 हजार छात्र हैं, जिनमें से एक लाख 86 हजार छात्र दिल्ली के हैं जबकि 59 हजार दिल्ली के बाहर के हैं। अब तक एक लाख 58 हजार छात्रों ने आनलाइन परीक्षा के लिए रजिस्ट्रेशन कराया है। हाईकोर्ट ने पिछले 6 जुलाई को यूजीसी को दिल्ली यूनिवर्सिटी समेत देश की सभी यूनिवर्सिटी के लिए एक स्पष्ट दिशानिर्देश के साथ आने का निर्देश दिया था। हाईकोर्ट ने यूजीसी से पूछा था कि कोरोना के संकट के दौरान यूनिवर्सिटीज परीक्षाएं कराएंगी कि नहीं। पिछले 30 जून को हाईकोर्ट ने दिल्ली यूनिवर्सिटी से पूछा था कि उनके खिलाफ अवमानना की प्रक्रिया क्यों नहीं शुरू की जाए। ओपन बुक एग्जाम 1 जुलाई से शुरू होने वाली थी लेकिन दिल्ली यूनिवर्सिटी ने इसे 10 दिनों के लिए टाल दिया था। हिन्दुस्थान समाचार/संजय/सुनीत-hindusthansamachar.in