दिल्ली हिंसा की जांच को लेकर दिल्ली पुलिस को कोर्ट की फटकार

दिल्ली हिंसा की जांच को लेकर दिल्ली पुलिस को कोर्ट की फटकार
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नई दिल्ली, 26 अप्रैल (हि.स.)। दिल्ली की कड़कड़डूमा कोर्ट ने उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हुए हिंसा की जांच को लेकर दिल्ली पुलिस को फटकार लगाई है। एडिशनल सेशंस जज विनोद यादव ने कहा कि जांच में वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने ठीक से निगरानी नहीं की है। दरअसल नवंबर 2020 में मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट राकेश रामपुरी ने दिल्ली पुलिस को निर्देश दिया था कि दिल्ली हिंसा के दौरान रेडीमेड कपड़ों के व्यापारी निसार अहमद की उस शिकायत पर एफआईआर दर्ज करने का निर्देश दिया जिसमें दावा किया गया था कि हिंसा के दौरान बुर्का पहनने वाली महिलाओं की हत्या की गई थी और उनके शवों को भागीरथी विहार नाले में फेंक दिया गया था। मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट के आदेश के खिलाफ दिल्ली पुलिस ने सेशंस कोर्ट में अर्जी दायर किया था। दिल्ली पुलिस की अर्जी को खारिज करते हुए कोर्ट ने कहा कि जांच एजेंसी कानून के गलत पक्ष के साथ खड़ी दिखाई दे रही है। कोर्ट ने कहा कि कोर्ट ने उत्तर-पूर्वी दिल्ली में पिछले साल हुई हिंसा से संबंधित कई मामलों की जांच में जिले के वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने निगरानी नहीं की। कोर्ट ने कहा कि अभी भी समय है, अगर वरिष्ठ अफसर इन मामलों की जांच कर सुधारात्मक कदम उठाए तो पीड़ितों को न्याय मिल सकता है। सुनवाई के दौरान गोकलपुरी थाने के जांच अधिकारी आशीष गर्ग ने अपने जवाब में कहा था कि उन्होंने दूसरे शिकायतकर्ता आस मोहम्मद की शिकायत पर एफआईआर नंबर 78 दर्ज की थी। उसके बाद शिकायतकर्ता ने 4 मार्च को लिखित शिकायत दी जिसे एफआईआर नंबर 78 में ही क्लब कर दिया गया। उन्होंने शिकायतकर्ता के इस आरोप को गलत बताया कि बुर्का पहनी महिलाओं के शवों को भागीरथी विहार नाले में फेंका गया था। जांच अधिकारी ने कहा था कि उसने एफआईआर नंबर 78 के संबंध में चार्जशीट दाखिल कर दिया है। मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट ने पाया था कि ये समझ में नहीं आ रहा है कि पुलिस शिकायतकर्ता के सभी आरोपों की जांच कैसे करेगी, जबकि उसने एफआईआर नंबर 78 में चार्जशीट भी दाखिल कर दिया है। शिकायतकर्ता ने शिकायत की है कि कुछ शवों को नाले में फेंका गया। मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट ने कहा था कि इस मामले की सच्चाई जानने के लिए जांच जरुरी है। ऐसे में एफआईआर दर्ज किया जाना चाहिए। हिन्दुस्थान समाचार/संजय/सुनीत