राम मंदिर का निर्माण आजादी के समय हो जाना चाहिए था: दत्तात्रेय होसबोले
राम मंदिर का निर्माण आजादी के समय हो जाना चाहिए था: दत्तात्रेय होसबोले
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राम मंदिर का निर्माण आजादी के समय हो जाना चाहिए था: दत्तात्रेय होसबोले

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अनूप शर्मा वाशिंगटन, 31 जुलाई (हि.स.)। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सह सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबोले ने शुक्रवार को कहा कि राममंदिर का निर्माण सांस्कृतिक और वैचारिक आजादी का प्रतीक है और इसका निर्माण आजादी के साथ ही हो जाना चाहिए था। दीनदयाल शोध संस्थान में शुक्रवार को राममंदिर सत्य, साक्ष्य और विश्वास नामक अंग्रेजी पुस्तक का विमोचन किया गया। इस अवसर पर दत्तात्रेय होसबोले ने कहा कि देश में किसी का भी शासन रहा हो लेकिन भारत कभी भी अपनी सांस्कृतिक पहचान नहीं भूला है। इसी के चलते इसका पुनर्जागरण हुआ और राम मंदिर आंदोलन चला। इसे रिलीजियस (मजहबी) और सेकुलरिज्म (धर्मनिर्पेक्षता) से जोड़कर इसकी आलोचना करना सही नहीं है। उन्होंने राममंदिर आंदोलन को जर्मनी के एकीकरण और अमेरिका में रंगभेद के खिलाफ चल रहे आंदोलन से जोड़ा और कहा कि राममंदिर का विरोध रंगभेद के खिलाफ अमेरिका में चल रही मुहिम का विरोध करने जैसा है। आज दुनिया में रंगभेद से जुड़ी गुलामी के प्रतीकों को तोड़ा जा रहा है। इसी प्रकार भारत ने भी सांस्कृतिक गुलामी के प्रतीक को तोड़ा है और राममंदिर बनाने का इरादा किया है। सह सरकार्यवाह ने कहा कि रामंदिर निर्माण विकास, सांस्कृतिक एकता और सबको सुख देने वाला कार्य है। इसपर कुछ लोग राजनीति कर रहे हैं लेकिन राममंदिर निर्माण भारत की आत्मा को पहचान देने जैसा है। वहीं विश्व हिन्दू परिषद (विहिप) के कार्यकारी अध्यक्ष आलोक कुमार ने कहा कि सदियों से हमारे आत्मविश्वास को तोड़कर हममें हीनता पैदा करने का दुष्चक्र चलता रहा है। रामजन्मभूमि केवल संपत्ति नहीं बल्कि स्वाभिमान है। उन्होंने कहा कि केवल उद्धव ठाकरे को छोड़कर किसी भी बड़े दल के नेता ने राममंदिर निर्माण के खिलाफ कोई बयानबाजी नहीं की है। उन्होंने कहा कि राममंदिर निर्माण को वृहद दृष्टिकोण से देखना चाहिए। यह देश में रामत्व जगाने का कार्य है। राम राज्य की तरह देश में अशिक्षा, गरीबी और भेदभाव मिटाने के लिए रामत्व बेहद जरूरी है। राममंदिर पर विमोचित पुस्तक वरिष्ठ पत्रकार अरुण आनंद और उनके साथ विनय नलवा ने लिखी है। दोनों ने कार्यक्रम में पुस्तक की विषयवस्तु पर प्रकाश डाला। अरुण आनंद ने कहा कि पुस्तक में राम मंदिर क्यों? इस प्रश्न का उत्तर दिया गया है। वहीं विनय नलवा ने कहा कि पुस्तक में ऐतिहासिक विषयों पर गहन शोध के निष्कर्ष को प्रस्तुत करने की कोशिश की गई है। हिन्दुस्थान समाचार-hindusthansamachar.in