मनरेगा के तहत रोजगार उपलब्ध कराने में रोल मॉडल बना गुजरात का दाहोद

 मनरेगा के तहत रोजगार उपलब्ध कराने में रोल मॉडल बना गुजरात का दाहोद
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अहमदाबाद, 20 जून (आईएएनएस)। कोविड 19 महामारी के कारण जब विभिन्न क्षेत्रों में कार्यरत लाखों लोग बेरोजगार हो गए हैं, तब गुजरात के आदिवासी जिलों में से एक दाहोद ने महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) के तहत रिकॉर्ड संख्या में रोजगार दिया है। केंद्र सरकार के आंकड़ों के मुताबिक, दाहोद ने 17 जून को 24 घंटे में 2,78,484 लोगों को रोजगार देकर पिछले साल मनरेगा के तहत प्रतिदिन 2,40,500 श्रम का अपना ही रिकॉर्ड तोड़ दिया। आईएएस अधिकारी और दाहोद के निवर्तमान जिला विकास अधिकारी रचित राज को 19 जून को जिला मजिस्ट्रेट के रूप में जूनागढ़ स्थानांतरित किया गया था। उन्होंने आईएएनएस से बात करते हुए कहा, कोविड महामारी के दौरान, कई लोगों ने अपनी नौकरी खो दी और अपने गांवों को वापस लौट आए। विभिन्न शहरों से अपने गांव लौटे लोगों को रोजगार देना हमारे लिए चुनौती थी। 2014 बैच के आईएएस अधिकारी ने कहा कि गुजरात में इतिहास रच दिया गया है, क्योंकि आज तक किसी भी जिले ने एक दिन में इतना श्रम रोजगार पैदा नहीं किया है। उन्होंने कहा कि अखिल भारतीय स्तर पर पश्चिम बंगाल का दक्षिण परगना जिला एक दिन में 2.20 लाख रोजगार पैदा करने के मामले में दूसरे नंबर पर है। महामारी के मद्देनजर पहल पर प्रकाश डालते हुए, आईएएस अधिकारी ने कहा, हमने जिले में काम वितरित किया है। हमने सामुदायिक कुओं की खुदाई का काम शुरू किया, जिससे खेती, पीने और अन्य उद्देश्यों के लिए पानी मिल सके। उन्होंने कहा कि प्रशासन ने लोगों को रोजगार देने के लिए प्रधानमंत्री आवास योजना के काम को भी मनरेगा के तहत लाया है। उन्होंने कहा कि दाहोद जिले ने मनरेगा के तहत सबसे अधिक लेबर इंगेजमेंट की सूचना दी, जिनमें से अधिकांश प्रधान मंत्री आवास योजना और सुजलम सुफलाम जल संचय योजना के तहत कार्यरत हैं। अधिकारी के अनुसार अप्रैल में 12,378 और इस साल मई में 77,429 परिवारों को रोजगार मिला। उन्होंने कहा कि दैनिक मजदूरी को 198 रुपये से बढ़ाकर 224 रुपये कर दिया गया है। जिससे मजदूर आराम से अपनी आजीविका चला रहे है। यह पूछे जाने पर कि दाहोद गुजरात के आदिवासी बहुल जिलों में से एक है, उसने गांवों में वायरस के प्रसार को कैसे नियंत्रित किया, राज ने कहा, हमने सुनिश्चित किया कि मनरेगा लोगों को काम के साथ साथ सुरक्षा भी प्रदान करेगा। हमने गांवों के सरपंचों को भी उनके गांवों में कोविड रोगियों पर नजर रखने के लिए जागरूक किया। हमने प्राथमिक विद्यालयों में भी कोविड केंद्र स्थापित किए और लोगों के लिए दवाओं की पर्याप्त व्यवस्था की। अधिकारी ने बताया कि उन्होंने कोविड संकट से निपटने के लिए पंच मंत्र नाम की एक नई पहल भी शुरू की है। इसमें पांच मंत्र शामिल है। जिसमें पहले मंत्र के तहत हमने आयुष मंत्रालय द्वारा सुझाए गए जिले में लोगों की इम्यूनटी को बढ़ाने के लिए उकला कड़ा दिया । दूसरा मंत्र सामूहिक स्वच्छता था, तीसरे मंत्र में व्यक्तिगत स्वच्छता शामिल थी, चौथा मंत्र छिडकाव था, ताकि मच्छरों या कीटाणुओं या अन्य परजीवियों को मारा जा सके। पांचवें मंत्र में सार्वजनिक संबोधन प्रणाली शामिल थी, जिसमें हमने बड़े पैमाने कोरोना के लिए क्या करें क्या न करें, तैयारियों, बुजुर्गों की देखभाल आदि के संबंध में जागरूकता पैदा करने के लिए लाउडस्पीकर का इस्तेमाल किया। इस तरह हमने कोविड को हराने और पूरे क्षेत्र को कोरोना मुक्त करने का प्रयास किया। अधिकारी ने कहा, इन गतिविधियों को पंचायत वाइज किया जा रहा है, यह सुनिश्चित करते हुए कि सामाजिक दूरी सहित देखभाल और सावधानी के सभी सिद्धांतों को बनाए रखा जाए। महामारी की दूसरी लहर से प्रभावित लोगों की संख्या और लोगों को अस्पताल में बिस्तर नहीं मिलने की कई रिपोटरें के बारे में एक सवाल के बारे में, राज ने कहा, 18 अप्रैल को, हमने रोगी ऑडिट के लिए डॉक्टरों और जिला प्रशासन के अधिकारियों की एक समिति बनाई जो अस्पतालों में भर्ती लोगों की पहचान करने के लिए जो लगभग ठीक हो चुके थे और उन्हें अस्पताल के बिस्तरों की आवश्यकता नहीं है उन मराजों की पहचान कर सके। हमने डॉक्टरों से बात की और उन रोगियों को स्थानांतरित कर दिया, जिन्हें अन्य कोविड वाडरें में कम से कम चिकित्सा की आवश्यकता थी, ताकि अस्पताल के बेड या आईसीयू बेड जरूरत वाले लोगों को मिल सकें। उन्होंने यह भी बताया कि इस साल की शुरूआत में, दाहोद ने प्रधान मंत्री किसान सम्मान निधि (पीएम किसान) योजना के कार्यान्वयन के लिए केंद्र सरकार द्वारा घोषित पुरस्कारों में शिकायत निवारण श्रेणी के तहत सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन का पुरस्कार जीता था। आईएएस अधिकारी ने आगे कहा कि दाहोद राज्य के आदिवासी जिलों में से एक होने के कारण, उन्होंने लोगों, विशेषकर बच्चों और लड़कियों के पोषण में सुधार पर भी ध्यान केंद्रित किया। उन्होंने कहा कि हमने इन लोगों की जांच की और फिर समस्या को हल करने के लिए उन्हें उपचार प्रदान किया। आईएएस अधिकारी ने आगे बताया कि जिले में एक मिशन मंगलम (महिला स्वयं सहायता समूह) परियोजना शुरू की गई है, जिसके माध्यम से महिलाएं अच्छी कमाई कर रही हैं, जिससे उन्हें आत्मनिर्भर और टिकाऊ बनने में मदद मिल रही है। --आईएएनएस एमएसबी/आरजेएस

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