दिल्ली हिंसा मामले में सुनवाई के दौरान कोर्ट ने मीडियाकर्मियों को किया बाहर
court-expels-media-persons-during-hearing-in-delhi-violence-case

दिल्ली हिंसा मामले में सुनवाई के दौरान कोर्ट ने मीडियाकर्मियों को किया बाहर

नई दिल्ली, 16 जून (हि.स.)। दिल्ली के कड़कड़डूमा कोर्ट ने बुधवार को दिल्ली हिंसा के मामले में यूएपीए के तहत जेल में बंद आसिफ इकबाल तान्हा, देवांगन कलीता और नताशा नरवाल को हाई कोर्ट से मिली नियमित जमानत के बाद वेरिफिकेशन के मामले पर सुनवाई के दौरान मीडियाकर्मियों को वीडियो कांफ्रेंसिंग से सुनवाई से बाहर कर दिया। सुनवाई के दौरान आरोपितों की ओर से वकील सिद्धार्थ अग्रवाल ने कहा कि जमानतियों की रिपोर्ट उपलब्ध कराई जाए। तब एडिशनल सेशंस जज रविंद्र बेदी ने कहा कि इस संबंध में कोई रिपोर्ट नहीं मिली है। कोर्ट इस मामले पर लंच ब्रेक के बाद जब बैठी तो सुनवाई में शामिल मीडियाकर्मियों की उपस्थिति पर आपत्ति जताई। कोर्ट ने कहा कि ये मामला कोर्ट और अभियोजन के बीच का है। कोर्ट ने मीडियाकर्मियों को वीडियो कांफ्रेंसिंग के लिंक के जरिये हो रही सुनवाई से बाहर कर दिया। सुनवाई के बाद वकीलों ने बताया कि दिल्ली पुलिस ने वेरिफिकेशन के लिए समय देने की मांग की। इस पर आरोपितों के वकीलों ने कहा कि दिल्ली पुलिस इस मामले में देर करना चाहती है। आरोपितों के वकील ने कहा कि दिल्ली पुलिस के पास हाईकोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने के लिए समय है लेकिन जमानतियों का वेरिफिकेशन करने का समय नहीं है। दिल्ली पुलिस चाहती है कि आरोपितों के रिहा होने से पहले सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हो जाए। दिल्ली पुलिस का कहना है कि वो जमानतियों के आधार कार्ड का सत्यापन करना है। दिल्ली पुलिस ने कोर्ट से मांग की है कि आरोपितों को रिहा करने में देर की जाए। हाईकोर्ट ने पिछले 15 जून को तीनों आरोपितों को नियमित जमानत दी थी। जस्टिस सिद्धार्थ मृदुल और जस्टिस अजय जयराम भांभानी की बेंच ने नियमित जमानत देने का आदेश दिया था। कोर्ट ने कहा था कि दिल्ली पुलिस ने इस मामले में चार्जशीट दाखिल कर दी है। इस मामले में 740 गवाह हैं। इन गवाहों में स्वतंत्र गवाहों के अलावा, सुरक्षित गवाह, पुलिस गवाह इत्यादि शामिल हैं। ऐसे में इन आरोपितों को इन 740 गवाहों की गवाही खत्म होने तक जेल के अंदर नहीं रखा जा सकता है। कोर्ट ने कहा था कि कोरोना के वर्तमान समय में जब कोर्ट का प्रभावी काम बिल्कुल ठप हो गया है। कोर्ट क्या उस समय तक का इंतजार करे जब तक कि आरोपितों के मामले का जल्दी ट्रायल पूरा नहीं हो जाता है। कोर्ट ने तीनों आरोपितों को 50-50 हजार रुपये के निजी और दो स्थानीय जमानतियों के आधार पर जमानत देने का आदेश दिया है। कोर्ट ने तीनों को अपना पासपोर्ट सरेंडर करने का आदेश दिया। कोर्ट ने कहा कि तीनों आरोपित वैसा कोई काम नहीं करेंगे जिससे केस प्रभावित हो। आसिफ इकबाल तान्हा जामिया यूनिवर्सिटी का छात्र है। उसे मई, 2020 में दिल्ली हिंसा के मामले में गिरफ्तार किया गया था। नताशा नरवाल और देवांगन कलीता पिंजरा तोड़ संगठन की सदस्य है। दोनों को मई, 2020 में गिरफ्तार किया गया था। तीनों पर दिल्ली में हिंसा भड़काने का आरोप है। दंगों में साजिश रचने के मामले में दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने अब तक ताहिर हुसैन, सफूरा जरगर, उमर खालिद, खालिद सैफी, इशरत जहां, मीरान हैदर, गुलफिशा, शफा उर रहमान, आसिफ इकबाल तान्हा, शादाब अहमद, तसलीम अहमद, सलीम मलिक, मोहम्मद सलीम खान, अतहर खान, शरजील इमाम, फैजान खान, नताशा नरवाल और देवांगन कलीता को मामले में आरोपित किया है। सफूरा जरगर को पहले ही मानवीय आधार पर जमानत मिल चुकी है। हिन्दुस्थान समाचार/संजय/सुनीत

Related Stories

No stories found.