Congress veteran Madhav Singh Solanki dies
Congress veteran Madhav Singh Solanki dies
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कांग्रेस के दिग्गज नेता माधव सिंह सोलंकी का निधन

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गांधीनगर/अहमदाबाद, 9 जनवरी (हि.स.)| कांग्रेस के दिग्गज नेता एवं गुजरात के पूर्व मुख्यमंत्री माधवसिंह सोलंकी का शनिवार को 94 साल की उम्र में निधन हो गया। वह नरसिम्हा राव सरकार में विदेश मंत्री भी रहे थे।गुजरात की राजनीति में उन्होंने क्षत्रिय, हरिजन, आदिवासी एवं मुस्लिमों को लेकर एक नई रणनीति बनाई, जो केएचएएम थ्योरी के नाम से चर्चित है। 1980 के दशक में सोलंकी इन्हीं चार समुदायों को साथ लेकर भारी बहुमत के साथ सत्ता में आए। सोलंकी का जन्म 30 जुलाई, 1927 को हुआ था। वह गुजरात कांग्रेस के नेता भरतसिंह सोलंकी के पिता हैं। उनके पास गुजरात में सबसे अधिक विधानसभा सीटें जीतने और मुख्यमंत्री बनने का रिकॉर्ड है। माधव सिंह सोलंकी गुजरात के 7वें मुख्यमंत्री थे। विधानसभा चुनाव में उन्होंने 182 में से 149 सीटें जीतीं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पूर्व मुख्यमंत्री सोलंकी के निधन पर दुख व्यक्त किया है। उन्होंने ट्वीट किया कि माधव सिंह सोलंकी एक दुर्जेय नेता थे जिन्होंने दशकों तक गुजरात की राजनीति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। समाज के प्रति उनकी समृद्ध सेवा के लिए उन्हें याद किया जाएगा। उनके निधन से दुखी हूं। मोदी ने उनके बेटे भरत सोलंकी से बात की और दुख व्यक्त किया। प्रधानमंत्री ने ट्वीट किया कि राजनीति के अलावा, माधव सिंह सोलंकी पढ़ना पसंद करते थे। जब भी मैं उनसे मिलने जाता या उनसे बात करता, हम किताबों पर चर्चा करते और वह मुझे एक नई किताब के बारे में बताते थे। मुझे हमेशा हमारे बीच की बातचीत याद रहेगी। मुख्यमंत्री विजय रूपानी ने पूर्व मुख्यमंत्री सोलंकी के निधन पर गहरा दुख व्यक्त किया है और उन्हें श्रद्धांजलि दी है। राज्य ने दिवंगत माधव सिंह सोलंकी के सम्मान में एक दिवसीय राजकीय शोक की घोषणा की है। मुख्यमंत्री ने स्वर्गीय माधवसिंह सोलंकी के अंतिम संस्कार को पूरे राजकीय सम्मान के साथ आयोजित करने का फैसला किया है। साथ ही, रूपानी ने आज महिसागर जिले में अपने कार्यक्रमों को रद्द कर दिया है। पिछले साल, पूर्व मुख्यमंत्री सोलंकी ने गांधीनगर में अपना जन्मदिन मनाया था। 2017 में अपनी गुजरात यात्रा के दौरान, कांग्रेस नेता राहुल गांधी माधव सिंह से मिलने गए थे। माधव सिंह सोलंकी 1976 में गुजरात के मुख्यमंत्री बने। फिर 1881 में एक बार फिर सत्ता में आये। उन्होंने सामाजिक और आर्थिक रूप से पिछड़े वर्गों के लिए आरक्षण शुरू किया, फिर 1985 में इस्तीफा दे दिया, लेकिन फिर से उन्होंने विधानसभा की 182 सीटों में से 149 सीटें जीतीं। आज तक किसी ने उनका रिकॉर्ड नहीं तोड़ा है। सोलंकी की देन देशभर में दोपहर के भोजन की शुरुआत है। राज्यभर में लड़कियों की मुफ्त शिक्षा भी उनके समय में शुरू हुई। ताजा जानकारी के अनुसार, भरतसिंह सोलंकी इस समय अमेरिका में हैं, इसलिए वह कल, रविवार सुबह अमेरिका से लौटेंगे। माधव सिंह सोलंकी का अंतिम संस्कार शाम 4 बजे किया जाएगा। हिदुस्थान समाचार/हर्ष/पारस-hindusthansamachar.in