सामूहिक प्रयासों से भारत में टीबी मामलों में 33 और मृत्यु में 47 प्रतिशत कमी आई : डॉ. हर्षवर्धन

सामूहिक प्रयासों से भारत में टीबी मामलों में 33 और मृत्यु में 47 प्रतिशत कमी आई : डॉ. हर्षवर्धन
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-डॉ. हर्षवर्धन ने दुर्लभ रोगों से ग्रस्त मरीजों के लिए वालेंटरी क्राउड फंडिग और टीबी मुक्त कार्यस्थल से संबंधित वेबिनार को किया संबोधित नई दिल्ली, 17 जून (हि.स.)। केन्द्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्री डॉ. हर्षवर्धन ने गुरुवार को दुर्लभ रोगों से ग्रस्त मरीजों के लिए वालंटरी क्राउड फंडिंग और टीबी मुक्त कार्य स्थल से संबंधित वेबिनार को संबोधित किया। इस वेबिनार में केन्द्रीय मंत्रालयों, सीआईआई और फिक्की, एसोचैम, पीएचडी जैसे संगठनों, केन्द्र सरकार के सार्वजनिक उपक्रमों के कुल मिलाकर 155 से ज्यादा प्रतिनिधियों ने भाग लिया। इस मौके पर डॉ. हर्षवर्धन ने कहा कि सामूहिक प्रयासों से भारत में टीबी मामलों में 33 प्रतिशत और मृत्यु में 47 प्रतिशत कमी आई है। देश को 2025 तक टीबी मुक्त बनाना है। यह लक्ष्य सभी के सहयोग से ही प्राप्त हो सकेगा। उन्होंने कहा कि टी.बी समाप्त करने के पूर्ण पोषित राष्ट्रीय कार्यनीति योजना को तेजी से लागू करने के लिए हम आज भी प्रतिबद्ध हैं ताकि अगले 18 महीनों में 4 करोड़ लोगों के लिए शुरू किए टी.बी रोकथाम के उपचार के काम को राष्ट्रीय स्तर पर बढ़ाकर तेजी से पूरा कर सकें। केंद्रीय मंत्री ने बताया कि कश्मीर के जम्मू कश्मीर के जिले बडगाम को टीबी मुक्त प्रमाणित किया गया है, यह एक विनम्र शुरुआत है। उन्होंने बताया कि लगभग सात हजार तरह के दुर्लभ रोगों में से केवल पांच प्रतिशत का उपचार उपलब्ध है। दुर्लभ रोगियों में से आठ प्रतिशत रोगी अलग-अलग किस्म के दुर्लभ रोगों से ग्रस्त होते हैं। डॉ. हर्षवर्धन ने दुर्लभ रोगों के उपचार में सहायता के लिए सभी कॉर्पोरेट्स से वित्तीय योगदान करने की अपील की। उन्होंने बताया कि स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने राष्ट्रीय दुर्लभ रोग नीति बनाई है और क्राउड फंडिंग के लिए एक राष्ट्रीय डिजिटल पोर्टल बनाया गया है। दुर्लभ रोगों की चिंता को देखते हुए राष्ट्रीय दुर्लभ रोग नीति को कोरोना काल में तैयार किया गया है। डॉ. हर्ष वर्धन ने बताया कि देश में दुर्लभ रोगों के उपचार के लिए आठ उत्कृष्ट केन्द्र बनाए गए हैं। इसके अलावा देश में पांच निदान केन्द्र भी बनाए गए हैं। जैव प्रौद्योगिकी विभाग ने नई दिल्ली के लेडी हार्डिंग मेडिकल कॉलेज में पहला निदान केन्द्र बनाया और अब देश के आकांक्षी जिलों में और निदान केन्द्र बनाए जा रहे हैं। आशा है कि और प्रदेशों तथा जिलों को मानदंड के अनुसार टीबी मुक्त प्रमाणित किया जाता रहेगा। उन्होंने बताया कि भारत से 2025 तक टीबी उन्मूलन के लिए सारा देश मिलकर काम कर रहा है। हिन्दुस्थान समाचार/ विजयालक्ष्मी