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डॉ मोहन मिश्र के निधन पर सीएम व मंत्रियों ने जताया शोक

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पटना, 07 मई (हि.स.)। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने प्रख्यात फिजीशियन पद्मश्री डॉ मोहन मिश्र के निधन पर शोक संवेदना प्रकट की है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने अपने शोक संदेश में कहा कि पद्मश्री डॉ मोहन मिश्र जी का निधन दु:खद है। वे प्रख्यात चिकित्सक थे। कालाजार पर शोध के लिए उन्हें 2014 में पद्मश्री सम्मान से सम्मानित किया गया था। वे दरभंगा मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में मेडिसिन विभाग के विभागाध्यक्ष भी रहे थे। उनके निधन से चिकित्सा जगत को अपूरणीय क्षति हुई है। मुख्यमंत्री ने दिवंगत की आत्मा की शान्ति तथा उनके परिजन को दुःख की इस घड़ी में धैर्य धारण करने की शक्ति प्रदान करने की ईश्वर से प्रार्थना की। बिहार सरकार के श्रम संसाधन तथा सूचना प्रौद्योगिकी विभाग और दरभंगा निवासी मंत्री जीवेश कुमार ने मिथिला के लाल ख्याति प्राप्त चिकित्सक डॉ मोहन मिश्र के निधन पर शोक व्यक्त किया है। उन्होंने अपने शोक संवेदना में कहा कि दरभंगा मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (डीएमसीएच) में मेडिसिन विभाग के अध्यक्ष रहे, ख्यातिप्राप्त फिजिशियन डॉ मोहन मिश्र जी के देहांत की सूचना अत्यंत दु:खद है। उनका निधन चिकित्सा जगत के लिए एक अपूरणीय क्षति है। लहेरियासराय (दरभंगा) में रहने वाले डॉ मोहन मिश्र मिथिलावासियों के लिए सिर्फ डॉक्टर नहीं, भगवान तुल्य थे। विगत फरवरी महीने में ही मुझे उनके दरभंगा स्थित आवास पर जाने का सौभाग्य प्राप्त हुआ था। उल्लेखनीय है कि डॉ. मोहन मिश्र ने ब्राह्मी नामक पौधे से कालाजार के इलाज में सफलता पाई थी। उनके इस रिसर्च को ब्रिटिश जर्नल में जगह दी गई थी। उन्हें कालाजार पर शोध के लिए 2014 में पद्मश्री से सम्मानित किया गया। दरभंगा मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पीटल में मेडिसीन विभाग के एचओडी रहे डॉ. मोहन मिश्र वर्ष 1995 में सेवानिवृत्त हुए। इसके बाद वे बंगाली टोला स्थित घर पर ही मरीजों को देखा करते थे। इस दौरान उनके पास डिमेंशिया के कई मरीज आते थे। इसकी कोई सटीक दवा नहीं होने के चलते बहुत फायदा नहीं होता था। उनका ध्यान आयुर्वेद की तरफ गया तो ब्राह्मी के पौधे की विशेषता की जानकारी हुई। इस विषय में काफी जानकारी जुटाई। आयुर्वेद के कई चिकित्सकों से बात की। फिर इस पौधे से डिमेंशिया के इलाज पर रिसर्च का निर्णय लिया। उनके निधन से दरभंगा समेत पूरे बिहार में शोक की लहर है। हिन्दुस्थान समाचार/गोविन्द / प्रभात ओझा