चीन का साइनोफार्म कोविड टीका बुजुर्गो में कम प्रभावी : शोध

 चीन का साइनोफार्म कोविड टीका बुजुर्गो में कम प्रभावी : शोध
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बीजिंग, 24 जुलाई (आईएएनएस)। चीन के साइनोफार्म कोविड टीका, जिसे 50 से अधिक देशों में स्वीकृत किया गया है, बुजुर्ग लोगों में कोरोनावायरस के खिलाफ कम सुरक्षात्मक एंटीबॉडी का उत्पादन करता है, यह एक शोध में पता चला है। ओबुडा विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं और हंगरी के बुडापेस्ट के प्राकृतिक विज्ञान के लिए ईएलकेएच रिसर्च सेंटर के शोधकर्ताओं के नेतृत्व में अध्ययन को इस सप्ताह मेड्रिक्सिव पर प्री-प्रिंट पोस्ट किया गया था और अभी इसकी समीक्षा की जानी बाकी है। टीम ने 450 लोगों में साइनोफार्म कोविड टीका, जिसे बीबीआईबीपी-कोरवी के रूप में जाना जाता है, की दो खुराक लगाने के बाद एंटीबॉडी टिट्स को मापा। दूसरी खुराक के बाद से जेंडर और समय का एंटीबॉडी टिट्स के साथ बहुत कम संबंध था। टीम ने 50 वर्ष से कम आयु के लगभग 90 प्रतिशत व्यक्तियों में एंटीबॉडी के स्तर का पता लगाया, लेकिन बीबीआईबीपी-कोरवी टीकाकरण के बाद एंटीबॉडी का उत्पादन बढ़ती उम्र के साथ काफी कम हो गया। ओबुडा में फिजियोलॉजिकल कंट्रोल रिसर्च सेंटर के तमस फेरेन्सी ने कहा, 60 साल की उम्र के 25 फीसदी और 80 साल से अधिक उम्र के 50 फीसदी बुजुर्ग लोग किसी भी सुरक्षात्मक एंटीबॉडी का उत्पादन नहीं करते हैं। ईएलकेएच स्थित एंजाइमोलॉजी संस्थान के बालाज्स सरकादी ने कहा, बीबीआईबीपी-कोरवी वैक्सीन की वास्तविक दुनिया की प्रभावशीलता की सावधानीपूर्वक निगरानी की जानी चाहिए। बुजुर्ग विषयों में विशेष रूप से टीकाकरण के बाद कोई सुरक्षात्मक एंटीबॉडी नहीं बनने का खतरा होता है। इसकी निगरानी की जानी चाहिए और कोविड-19 के संभावित प्रकोप को रोकने के लिए उचित उपाय किए जाने चाहिए। बीबीआईबीपी-कोरवी में टीका लगाया गया लेकिन अंतत: बुजुर्ग व्यक्तियों को असुरक्षित पाया गया। शोधकर्ताओं ने कहा कि जबकि तीसरे चरण के परीक्षण में शामिल कुछ महिलाओं बीबीआईबीपी-कोरवी वैक्सीन प्रभावी पाया गया। उन्होंने कहा कि यह महत्वपूर्ण महत्व का है, क्योंकि 50 से अधिक देशों में टीके को मंजूरी दी गई है, और इस टीके के साथ निकट भविष्य में टीकाकरण की योजना के साथ लाखों लोगों को पहले ही टीका लगाया जा चुका है। श्रीलंका में श्री जयवर्धनेपुरा विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं ने कहा कि इस बीच, वैक्सीन डेल्टा वेरिएंट के खिलाफ अत्यधिक कुशल पाया गया है, जो दुनियाभर में प्रमुख वेरिएंट बन गया है। समाचार एजेंसी सिन्हुआ की रिपोर्ट के अनुसार, शोध में पाया गया कि जिन लोगों को साइनोफार्म वैक्सीन की दो खुराक मिली, उनमें से 95 प्रतिशत ने स्वाभाविक रूप से संक्रमित कोविड-19 व्यक्ति के समान एंटीबॉडी विकसित की हैं। --आईएएनएस एसजीके/एएनएम

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