SC ने दी पर्यावरण मंजूरी को चुनौती देने की इजाजत, केंद्र के महत्वाकांक्षी सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट का मामला
SC ने दी पर्यावरण मंजूरी को चुनौती देने की इजाजत, केंद्र के महत्वाकांक्षी सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट का मामला
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SC ने दी पर्यावरण मंजूरी को चुनौती देने की इजाजत, केंद्र के महत्वाकांक्षी सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट का मामला

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केंद्र सरकार के महत्वाकांक्षी सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट को 17 जून को मिली पर्यावरण मंजूरी को सुप्रीम कोर्ट ने चुनौती देने की इजाजत दे दी है। सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ता को इस संबंध में एक सप्ताह में याचिका दाखिल करने की छूट देते हुए सरकार व अन्य प्रतिवादियों से उसके एक सप्ताह बाद याचिका का जवाब दाखिल करने को कहा है। कोर्ट मामले पर अगस्त के तीसरे सप्ताह में फिर सुनवाई करेगा।सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट में नई संसद और मंत्रालयों के दफ्तर बनाए जाने की योजना है। यह प्रोजेक्ट विजय चौक से लेकर इंडिया गेट तक करीब साढ़े तीन किलोमीटर में प्रस्तावित है। सुप्रीम कोर्ट में कई याचिकाएं लंबित हैं जिनमें इस प्रोजेक्ट को चुनौती दी गई है। बुधवार को जस्टिस एएम खानविल्कर, दिनेश महेश्वरी और संजीव खन्ना की पीठ ने याचिकाकर्ता की ओर से पेश वरिष्ठ वकील श्याम दीवान के सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट को 17 जून को दी गई पर्यावरण मंजूरी पर सवाल उठाने और उसे अलग से चुनौती देने की इजाजत मांगने पर सुनवाई करते हुए उपरोक्त आदेश दिए। इससे पहले दीवान ने हस्तक्षेप अर्जी का जिक्र करते हुए कहा कि सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट का जो मामला सुप्रीम कोर्ट में अभी लंबित है उसमें मुख्य तौर पर भूमि उपयोग बदलने के आधार पर चुनौती दी गई है, लेकिन 17 जून को सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट को पर्यावरण मंजूरी दी गई है जिसे वह अलग से याचिका दाखिल कर चुनौती देना चाहते हैं। दीवान ने कहा कि कोर्ट में मामला लंबित रहने से उन्हें अन्य कानूनों में मिले विधायी अधिकार खत्म नहीं होने चाहिए। दीवान ने कहा कि यह एक बड़ा प्रोजेक्ट है इसे बहुत सी मंजूरियां चाहिए इसलिए याचिका दाखिल करने के कई कारण और आधार हो सकते हैं। इस पर पीठ ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट में दो याचिकाओं में पर्यावरण मंजूरी का मुद्दा उठाया गया है। अगर आप भी वही कहना चाहते हैं तो आप भी उसी में शामिल हो जाएं। इस पर मुख्य याचिकाकर्ता राजीव सूरी के वकील ने कहा कि उनकी ओर से दो अर्जियां दाखिल की गई हैं परन्तु उनमें नई संसद के निर्माण को मिली पर्यावरण मंजूरी को चुनौती दी गई है। जबकि सेंट्रल विस्टा पूरा एक बड़ा प्रोजेक्ट है। इस पर दीवान ने कहा कि 17 जून को विस्तृत पर्यावरण मंजूरी दी गई है जिसमें कई खामियां हैं वह उसे एनजीटी के समक्ष याचिका दाखिल कर उठाना चाहते हैं। एनजीटी का मानना है कि प्रोजेक्ट से पूरे पर्यावरण पर पड़ने वाले समग्र असर का आकलन होना चाहिए। पूरे सेंट्रल विस्टा को एक लाख वर्ग फीट की पूरी टाउनशिप की तरह देखा जाना चाहिए। कोर्ट ने दीवान से कहा कि वह तकनीकी आधारों को नहीं सुनेंगे। दीवान ने कहा कि वह पर्यावरण मंजूरी को संपूर्णता में चुनौती देंगे। हालांकि सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने दीवान की दलीलों का विरोध किया। उन्होंने कहा कि इस मामले में ध्यान दिया जाना चाहिए कि यहां किसी निजी उद्योग की बात नहीं हो रही है। यह प्रोजेक्ट राष्ट्रहित में है। इस सबसे प्रोजेक्ट में देरी होगी। कोर्ट ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद याचिकाकर्ता को प्रोजेक्ट को दी गई पर्यावरण मंजूरी को चुनौती देने के लिए अलग से याचिका दाखिल करने की इजाजत दे दी।-newsindialive.in