कलकत्ता हाईकोर्ट ने पीड़ित गाड़ी के घोड़ों की मदद के लिए दिया आदेश

 कलकत्ता हाईकोर्ट ने पीड़ित गाड़ी के घोड़ों की मदद के लिए दिया आदेश
calcutta-high-court-orders-to-help-the-horses-of-the-victim-vehicle

कोलकाता, 5 अप्रैल (आईएएनएस)। कलकत्ता हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश प्रकाश श्रीवास्तव की खंडपीठ का एक आदेश कोलकाता में पीड़ित गाड़ी के घोड़ों की मदद के लिए आया है। कलकत्ता हाईकोर्ट की खंडपीठ ने मंगलवार को पीपल फॉर द एथिकल ट्रीटमेंट ऑफ एनिमल्स (पेटा) इंडिया और केप फाउंडेशन को पश्चिम बंगाल सरकार के साथ मिलकर सवारी गाड़ी के लिए इस्तेमाल होने वाले पीड़ित घोड़ों की देखभाल करने की अनुमति दे दी। खंडपीठ ने घोड़ों की भलाई में सुधार के लिए पशु चिकित्सा सेवाएं और भोजन उपलब्ध कराने का भी आह्वान किया। खंडपीठ ने राज्य सरकार को मध्य कोलकाता में प्रतिष्ठित विक्टोरिया मेमोरियल के पास गाड़ी और अन्य सवारी के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले घोड़ों की दयनीय स्थिति सुधारने के लिए एक नीति निर्धारित करने के लिए चार सप्ताह का समय दिया। पेटा इंडिया के कानूनी वकील अपूर्व विक्रम सिंह ने इस फैसले के लिए हाईकोर्ट को धन्यवाद देते हुए कहा कि इससे घोड़ों की स्थिति सुधारने में काफी मदद मिलेगी। सिंह के अनुसार, मुंबई और दिल्ली ने पहले ही गाड़ी या तांगा खींचने के लिए घोड़ों के इस्तेमाल पर प्रतिबंध लगा दिया है। उन्होंने कहा, उन शहरों में घोड़ों के पुनर्वास और गाड़ी के मालिकों और ड्राइवरों के लिए ई-कैरिज या अन्य गैर-पशु साधनों के माध्यम से आजीविका कमाने के लिए नीतिगत निर्णय हैं, और कोलकाता ऐसा ही कर सकता है। पेटा इंडिया की एक हालिया रिपोर्ट से पता चला है कि कमजोर और घायल घोड़ों को काम करने के लिए मजबूर करने जैसी क्रूर प्रथाएं जारी हैं जो अक्सर धीमी, दर्दनाक मौत की ओर ले जाती हैं। नवीनतम रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि घोड़ों को उचित पशु चिकित्सा सेवाओं से वंचित किया जाता है। इससे पहले 18 जनवरी, 2022 को पेटा इंडिया ने पश्चिम बंगाल सरकार को अपनी सिफारिशें पेश कीं, जिसमें अनुरोध किया गया कि कोलकाता में पर्यटकों और सवारी के लिए घोड़ों के उपयोग पर प्रतिबंध लगाया जाए, घोड़ों का पुनर्वास किया जाए और घोड़े के मालिकों व गाड़ी चालकों को ई-कैरिज या अन्य माध्यमों, जैसे टैक्सियों और वाणिज्यिक माल वाहनों के माध्यम से आजीविका का विकल्प दिया जाए। --आईएएनएस एसजीके/एएनएम

अन्य खबरें

No stories found.