बिहार: लॉकडाउन में निर्धनों का पेट भर रहा सामुदायिक किचन

 बिहार: लॉकडाउन में निर्धनों का पेट भर रहा सामुदायिक किचन
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पटना, 7 मई (आईएएनएस)। बिहार में कोरोना संक्रमण के मद्देनजर लगे संपूर्ण लॉकडाउन के बाद सरकार द्वारा विभिन्न स्थलों पर प्रारंभ किए सामुदायिक किचन अब निर्धनों का पेट भर रहा है। अलग-अलग दिनों के लिए अलग-अलग मेन्यू के साथ इन सामुदायिक किचन में खाना बनाए जा रहे हैें। लॉकडाउन में जहां लोगों के व्यापार व छोटे-मोटे धंधे एकबार फिर से प्रभावित होने लगे हैं। वहीं खासकर वैसे गरीब-मजदूर जिन्हें दो वक्त की रोटी भी बड़ी कठिनाइयों से नसीब हो पाती है, उनके लिए परेशानी और बढ गई थी। इसे देखते हुए आपदा प्रबंधन विभाग अब सामुदायिक किचन के जरिए वैसे गरीब-गुरबों का पेट भर रहा है। पटना में फिलहाल 11 स्थानों पर सामुदायिक किचन चलाया जा रहा है। इस दौरान गुरुवार को दिन में 6000 से अधिक लोगों को खाना परोसा गया। पटना के जिलाधिकारी डॉ. चंद्रशेखर सिंह कहते हैं कि दो दिनों में 9 हजार से अधिक लोग इसका लाभ ले चुके हैं। उन्होंने बताया कि सामुदायिक किचन में फुटपाथ पर रहने वाले दैनिक श्रमिकों और राहगीरों के लिए काफी मददगार साबित हो रहा है। आपदा प्रबंधन विभाग ने लॉकडाउन के बाद गरीबों, मजदूरों के लिये राज्य भर में सामुदायिक रसोई शुरू करने का सभी जिलाधिकारी को निर्देश दिया था, जिसके बाद अधिकांश जिलों में सामुदायिक रसोई की शुरूआत कर दी गई है। गुरुवार की देर शाम तक जिलों से विभाग को मिली जानकारी के मुताबिक सामुदायिक रसाइयों में लगभग तीन लाख से ज्यादा लोगों ने पहले दिन भोजन किया। पूर्णिया में फिलहाल 20 सामुदायिक किचन चलाए जा रहे हैं जिसमें गुरुवार को 2500 से 3000 लोगों ने भोजन किया। पूर्णिया के जिलाधिकारी राहुल कुमार बताते हैं कि सभी सामुदायिक किचन में कोरोना गाइड लाइन का पालन करया जा रहा है। उन्होंने कहा कि कोशिश यही की जा रही है कि लोग दूूरी बनाकर भोजन करें। उन्होंने बताया, जिले भर में गरीब, बेघर, असहाय, मजदूर एवं जरूरतमंदों के लिए संचालित सामुदायिक किचन में दिन-रात खाना बनाकर लोगों को कोविड नियमों का पालन करते हुए खिलाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि सामुदायिक किचन में वैसे लोग भी आकर भोजन कर सकते हैं, जिन्हें होटल में किसी कारण से खाना न मिल पा रहा हो या वे होटलों के जरिए पार्सल नहीं ले जाना चाहते हों। वैसे लोग यहीं बैठकर भोजन कर सकते हैं। --आईएएनएस एमएनपी /आरजेएस