बिहार:बक्सर का एक गांव जो डिजिटल इंडिया के कांसेप्ट को साकार कर रहा है

बिहार:बक्सर का एक गांव जो डिजिटल इंडिया के कांसेप्ट को साकार कर रहा है
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बक्सर 22 मई (हि.स.)। बिहार में बक्सर जिले के सदर प्रखंड का दलसागर गांव केंद्र सरकार के डिजिटल इंडिया के कांसेप्ट को वास्तविक धरातल पर हूबहू साकार कर रहा है।इस संदर्भ में ग्रामीणों के बीच जागरूकता लाने के लिए कॉमन सर्विस सेंटर के माध्यम से विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन भी ग्रामीण युवकों द्वारा किया जा रहा है।राष्ट्रीय इलेक्ट्रानिक्स एवं सूचना प्रौद्यौगिकी संस्थान द्वारा दलसागर गांव को जिले का पूर्ण डिजिटल गांव का दर्जा दिया गया है। सुखद आश्चर्य यह है कि छह सौ परिवारों के आबादी वाला इस गांव में ग्रामीण महिलाओं द्वारा भी निपुणता पूर्वक मोबाइल के माध्यम से अनेकों कार्य को घर बैठे ही निपटाया जा रहा है।कभी इसके लिए ग्रामीण महिलाए पूरी तरह पुरुषों पर आश्रित थी। पुरुषों को भी छोटी से छोटी आवश्यकताओ के लिए कभी दस किलोमीटर की दूरी तय कर जिला मुख्यालय का शरण लेना पड़ता था।बात चाहे रुपये ट्रांसफर करने की हो ,मोबाइल में रिचार्ज करने की या गैस बुकिंग करने की और बच्चो की स्कूली फ़ीस जमा करने की इस काम को डिजिटल रूप में अंजाम दिया जा रहा है।क्या पुरुष क्या महिला सभी इस काम में दक्ष है। केंद्र सरकार के योजनाओं की और से जिला प्रशासन और स्थानीय जनप्रतिनिधि द्वारा सोलर लाईट से पूरे गांव को रौशन कर दिया गया है।गांव के युवको द्वारा गांव में तीन की संख्या में कॉमन सर्विस सेंटर चलाया जा रहा है।जिसमे एक शारदा सेंटर इस गांव की युवतियों के द्वारा संचालित है। कोरोना के इस दौर में उक्त सेंटर के माध्यम से ग्रामीण स्थानीय सांसद द्वारा शुरू किये गये टेलीमेडिसिन समेत प्राथमिक स्वास्थ्य जांच अमूमन सुगर लेबल की जांच होमोग्लोबिन ,टायफाइड ,मलेरिया आदि की जांच आसानी से कर ले रहे है।टेलीमेडिसिन से केवल लोगोका ही नही ,पशुओ के भी ईलाज की ब्यवस्था दी जा रही है। उल्लेखनीय है कि डिजिटल गांव के अंतर्गत कुछ संस्थानो द्वारा निःशुल्क ग्रामीण युवक ,युवतियों समेत जागरूक पढ़ी-लिखी महिलाओं को टैली ,ट्रिपल -सी और बीसीसी की प्रशिक्षण दिया जा रहा है। प्रशिक्षण पश्चात लोगो को नाईलेट का प्रमाणपत्र भी दिया जा रहा है।ताकी प्रशिक्षण के बाद ग्रामीण युवा रोजगार की दिशा में आगे बढ़ सके।छह सौ परिवारों में अबतक एक सौ पांच युवक व युवतियां विभिन्न संस्थानों से जुड़कर घर बैठे ही रोजगार कर रही है। डिजिटल इंडिया के कांसेप्ट को गांव में साकार होता देख तीन एनजीओं द्वारा गांव को वाईफाई की सुबिधा से निम्न चार्ज पर लैश किया गया है।ऐसा नही है कि इस गांव को उक्त कामयाबी यू ही नहीं मिली है। इसके पीछे गांव के पढ़े लिखे युवक युवतियों का कठिन परिश्रम है। इन्होनें पहले अपने अपने घरों की महिलाओं को साक्षर किया फिर आस पड़स के लोगो को आज आलम यह है कि जिले का यह पहला गांव है जहां साक्षरता दर 95 प्रतिशत है। सरकार का मकसद डिजिटल साक्षर बनाने के अलावे लोगो को स्वावलम्बी भी बनाना है।अतः इस दिशा में कुछ ग्रामीण युवक महिलाओं द्वारा नैपकिन ,पत्तल -डोंगा ,एलईडी बल्ब बना कर या रिपेयर कर अच्छी आर्थिक आय की जा रही है। ग्रामीण महिलाओं द्वारा कोरोना काल में एक लाख मास्क बनाये गये और स्थानीय बजार को जरूरत के अनुरूप सप्लाई कर उन्हें खपाया भी गया।इस कार्य में सेविका दीदियो द्वारा इसका भरपूर सहयोग किया गया है। हिन्दुस्थान समाचार /अजय मिश्रा