बंगाल चुनाव : भाजपा उम्मीदवार कल्याण चौबे मानिकतला में बचा पायेंगे प्रतिपक्ष के गोल !

बंगाल चुनाव :  भाजपा उम्मीदवार कल्याण चौबे मानिकतला में  बचा पायेंगे  प्रतिपक्ष  के गोल !
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कोलकाता, 26 अप्रैल (हि.स.)। अपनी आधी जिंदगी फुटबॉल को दे चुके मशहूर गोल रक्षक कल्याण चौबे भारतीय जनता पार्टी के जरिये राजनीति में अपनी किस्मत आजमा रहे हैं। विधानसभा चुनाव में भाजपा ने उन्हें कोलकाता के मानिकतला जैसी महत्वपूर्ण सीट से मैदान में उतारा है। सोमवार को हिन्दुस्थान समाचार से खास बातचीत में कल्याण चौबे ने पारिवारिक पृष्ठभूमि के बारे में पूछने पर बताया कि हमारे पास मुर्शिदाबाद मके कांदी महकमा के बरोया में लगभग दो हजार बीघा जमीन थी। आप इसे जमींदारी भी कह सकते हैं। दादाजी के निधन के बाद मेरे माता-पिता गांव छोड़कर कलकत्ता चले आये। 1976 में जब मेरे माता-पिता बेहद कठिन दौर से गुजर रहे थे तब कोलकाता के आरजी कर अस्पताल में मेरा जन्म हुआ। मैं मुरारीपुकुर के एलआईजी स्कूल में पढ़ता था। यहीं से मुझे फुटबॉल से प्यार हो गया। अपने फुटबाल प्रेम के बारे में उन्होंने बताया, "मैं फुटबॉल के लिए इतना पागल था कि पूरे दिन मेरे दिमाग में बस यही चलता रहता था। स्पोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया (साई) ने देश भर में 12 साल से कम उम्र के लगभग 12 हजार लड़कों में से कुछ का चयन किया। उनमें मैं भी शामिल था। यहीं से मेरी फुटबॉल यात्रा शुरू हुई। मैंने बंगाल, महाराष्ट्र, पंजाब, गोवा और बिहार के लिए राष्ट्रीय स्तर पर स्वर्ण पदक जीते। 15 सालों तक 27 देशों में खेलता रहा हूं। उसके बाद लगभग तीन वर्षों तक मोहन बागान फुटबॉल एकेडमी का सीईओ रहा। प्रसिद्ध जर्मन फुटबॉल टीम बेयर्न म्यूनिख के साथ भी जुड़ा हुआ था। फुटबाल में इतना व्यस्त रहने के बाद पढाई कैसे पूरी हुई? कल्याण ने बताया कि खेल के साथ पढाई भी चलती रही। जमशेदपुर में टाटा अकादमी के दूसरे बैच से स्नातक किया। जर्मनी में कोलोन विश्वविद्यालय से और बाद में टाटा अकादमी से स्पोर्ट्स में मास्टर की डिग्री हासिल की। उन्होंने क्रमशः मोहन बागान, पूर्वी बंगाल और सालगांवकर के लिए 27, 67 और 53 मैच खेले। 1997-98 और 2001-02 में भारत के लिए कई महत्वपूर्ण मैच खेल चुके कल्याण चौबे संन्यास लेने के बाद भी खेल से जुड़े रहे हैं । कभी कमेंटेटर की भूमिका में तो कभी फुटबॉल से संबंधित विभिन्न परियोजनाओं में शामिल होकर योगदान देते रहे हैं। इसके अलावा उन्होंने सिरडी के श्री सांई बाबा के 'सत्चरित्र' का अंग्रेजी से बांग्ला में अनुवाद किया है। राजनीति में प्रवेश के सवाल पर उन्होंने बताया, “इस मामले में मैं एक लंबा सफर तय कर चुका हूं। 2014 में केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली का हाथ पकड़ कर भाजपा में आया। 2019 में पार्टी ने मुझे कृष्णानगर लोकसभा सीट से उम्मीदवार बनाया।’’ 2019 के लोकसभा चुनाव में तृणमूल की महुआ मोइत्रा को 7,14,872 मत मिले जबकि कल्याण चौबे को 5,51,654 वोट मिले। माकपा 1,20,222 मतों के साथ तीसरे स्थान पर रही। मानिकौला सीट के पिछले आंकड़ों पर नजर डालें तो 2011 के विधानसभा चुनाव में तृणमूल, माकपा और भाजपा उम्मीदवारों को मानिकतला निर्वाचन क्षेत्र में क्रमशः 60.05, 35.40 और 2.47 प्रतिशत जबकि 2016 में 50.60, 33.09 और 12.55 प्रतिशत वोट मिले थे । यहां से लगातार दो बार तृणमूल के टिकट पर चुनाव जीत चुके साधना पांडे ममता सरकार में मंत्री रहे हैं और पार्टी ने उन्हें फिर से टिकट दिया है। दूसरी तरफ संयुक्त मोर्चा की ओर से माकपा नेता रूपा बागची मैदान में हैं। चुनाव नतीजों को लेकर आशावादी कल्याण चौबे ने दावा किया कि ना केवल मानिकतला क्षेत्र बल्कि पूरे राज्य में परिवर्तन की संभावना है । लोग बदलाव चाहते हैं। बतौर गोलकीपर कई बार मुश्किल समय में टीम को उबारने वाले कल्याण इस बार तृणमूल के दिग्गज साधना पांडे को शिकस्त दे पायेंगे? इसका जवाब पाने के लिए अगले रविवार तक इंतजार करना होगा। मानिकतला सीट के आगामी 29 अप्रैल को अंतिम चरण में मतदान होना है। हिन्दुस्थान समाचार/सुगंधी/मधुप