विशेषः बांग्लादेश सीमा पर घुसपैठ रोकने के लिए बाड़ लगाना नितांत अनिवार्य : अश्विनी कुमार सिंह
विशेषः बांग्लादेश सीमा पर घुसपैठ रोकने के लिए बाड़ लगाना नितांत अनिवार्य : अश्विनी कुमार सिंह
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विशेषः बांग्लादेश सीमा पर घुसपैठ रोकने के लिए बाड़ लगाना नितांत अनिवार्य : अश्विनी कुमार सिंह

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सीमा सुरक्षा बले के महानिरीक्षक अश्विनी कुमार सिंह से ओम प्रकाश सिंह की खास बातचीत कोलकाता, 24 जुलाई (हि.स.)। भारत-बांग्लादेश सीमा से लगातार हो रहे बांग्लादेशी घुसपैठ को रोकने के लिए सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) के जवान काफी सजग हैं, लेकिन बल की क्षमता को बढ़ाने के लिए यह नितांत जरूरी है कि दोनों ही देशों की सीमा पर तार की बाड़ अति शीघ्र लगाई जाए। यह कहना है बीएसएफ के दक्षिण बंगाल के आईजी अश्विनी कुमार सिंह का। "हिन्दुस्थान समाचार" को दिए विशेष साक्षात्कार में उन्होंने कहा कि भले ही भारत- बांग्लादेश के बीच संबंध दोस्ताना हैं लेकिन इसे बनाए रखने के लिएअति आवश्यक है कि सीमा पर घुसपैठ को रोका जाए। इसके लिए तार के बाड़बंदी काफी मददगार साबित होगी। भारत-बांग्लादेश सीमा पर मौजूदा हालात के बारे में विशेष बातचीत के दौरान उन्होंने कहा कि बीएसएफ के साथ-साथ बांग्लादेश के बॉर्डर गार्ड्स (बीजीबी) ने भी भारत में घुसपैठ रोकने में मदद का आश्वासन दिया है। उन्होंने बताया कि अक्सर पशु और मादक तस्कर बीएसएफ जवानों पर घात लगाकर हमला करते हैं। इसे लेकर बीजीबी को एक आपत्ति पत्र सौंपा गया था, जिसमें बांग्लादेश की सीमा से भारत की ओर घुसपैठ रोकने की अपील की गई थी। वहां के बीजीबी प्रमुख ने निर्देशिका जारी किया है जिसमें घुसपैठ को रोकने हेतु बीजीबी जवानों को और अधिक सजग रहने को कहा गया है। इसके अलावा बीजीबी के साथ फ्लैग मीटिंग में सीमा के विभिन्न मुद्दों को उठाया गया है, जिसमें सीमाई अपराध रोकथाम सबसे अहम है। बीएसएफ के खिलाफ दुष्प्रचार कर रहे हैं अवांछनीय तत्व बीएसएफ के आईजी का कहना है कि आजकल बांग्लादेश में बीएसएफ के खिलाफ जबरदस्त दुष्प्रचार हो रहा है। आरोप लगाए जा रहे हैं कि सीमा पर बांग्लादेशी नागरिकों के साथ बीएसएफ के जवान सख्ती बरत रहे हैं और उन पर क्रूरता की जाती है। जबकि बीएसएफ मानव जीवन के मूल्यों को प्राथमिकता देती है। तस्करों पर प्रहार तभी किया जाता है जब बीएसएफ जवानों पर आंच आती है। अमूमन पशु, मादक पदार्थों अथवा हथियारों की तस्करी करने वाले बीएसएफ जवानों को घेरकर उनकी हत्या की कोशिश करते हैं। बचाव में बीएसएफ जवान फायरिंग करते हैं। सबसे पहले हवाई फायरिंग की जाती है। अगर तस्कर बीएसएफ जवानों पर हमले करते रहते हैं तो जान बचाने के लिए छर्रा फायर किए जाते हैं जिससे किसी की जान जाने की संभावना बहुत कम होती है। इससे तस्कर डरकर फरार हो जाते हैं और तस्करी पर भी लगाम लगती है तथा बीएसएफ जवानों की जान भी बचती है। उन्होंने कहा कि बांग्लादेश के लोग हों या भारत के, जान सबकी कीमती है और बीएसएफ इसके महत्व को समझती है। इसलिए किसी पर क्रूरता कभी भी नहीं की जाती। राज्य सरकार का मिलता है सहयोग अश्विनी कुमार सिंह ने बंगाल सरकार की सराहना करते हुए कहा कि जब भी सीमाई क्षेत्रों में कोई जरूरत पड़ती है तो राज्य सरकार का सहयोग हमेशा मिलता रहा है। उन्होंने कहा कि कई बार सीमा क्षेत्रों में तस्करों को पकड़ने अथवा अपराध रोकथाम में बीएसएफ को कार्रवाई करनी पड़ती है तो ऐसा कभी नहीं हुआ कि स्थानीय पुलिस की टीम ने मदद नहीं की है। उन्होंने कहा कि सीमा क्षेत्र के निवासी बीएसएफ के वृहद परिवार की तरह हैं और एक परिवार की तरह सुख-दुख में हमेशा एक दूसरे के साथ खड़े रहते हैं। सीमा पर अपराध रोकने के लिए जागरूकता अभियान दरअसल, भारत-बांग्लादेश सीमा के निवासियों का एक बड़ा हिस्सा तस्करी के कारोबार से जुड़ा हुआ है। कई लोग तो ऐसे हैं जिनका मुख्य पेशा ही तस्करी हैं। मवेशियों, मादक पदार्थों, हथियारों आदि की तस्करी में बड़ी धनराशि उन्हें मिलती है, लेकिन अब बीएसएफ ने इसके रोकथाम के लिए न केवल सख्त कदम उठाना शुरू किया है बल्कि सीमा क्षेत्रों में लोगों को इस अपराध के प्रति जागरूक करने हेतु कैंप लगाए जाते हैं। लोगों को समझाया जाता है कि इस आपराधिक गतिविधि का जीवन पर क्या असर पड़ता है। अगर नौजवान लड़के इसमें फंसते हैं तो वे जीवन में दूसरी कोई नौकरी नहीं कर पाते। यहां तक कि शिक्षा-दीक्षा भी खत्म हो जाती है और जीवन दिशाहीन बनकर रह जाता है। अश्विनी कुमार सिंह ने दावा किया कि बीएसएफ के इस जागरूकता अभियान का व्यापक असर हुआ है और सीमा क्षेत्रों में लोग तस्करी संबंधी अपराधों से तौबा कर रहे हैं। छात्रों के लिए चलाए जाते हैं कैरियर गाइड सिंह ने बताया कि सीमा क्षेत्रों के छात्र कई बार बीएसएफ के जवानों और अधिकारियों से कैरियर गाइडेंस के लिए संपर्क करते हैं। इसे देखते हुए बीएसएफ जगह-जगह कैंप लगाती है और छात्रों को कैरियर संबंधी दिशा-निर्देश दिया जाता है। बीएसएफ में भर्ती होने से लेकर अन्य सैन्य बलों में भर्ती तथा शैक्षणिक लक्ष्य को हासिल करने के लिए बीएसएफ के जवान समय-समय पर स्थानीय छात्रों को दिशा-निर्देश देते हैं। आपदा के समय स्थानीय लोगों के लिए फरिश्ता बनते हैं बीएसएफ जवान - अश्विनी कुमार ने कहा कि आपातकालीन परिस्थिति जैसे चक्रवात या अन्य किसी हालात में बीएसएफ के जवान सीमा क्षेत्रों के निवासियों के लिए जी-तोड़ काम करते हैं लोगों के रहने, खाने, चिकित्सा आदि की सारी व्यवस्थाएं की जाती हैं। परिवार के सदस्यों की तरह लोगों की देखरेख की जाती है। सीमा पर शून्य अपराध का है लक्ष्य "हिन्दुस्थान समाचार" को दिए विशेष साक्षात्कार में सिंह ने इस बात पर जोर दिया कि बीएसएफ सीमा पर शून्य अपराध का लक्ष्य लेकर चल रही है। इसमें तस्करी रोकथाम से लेकर सीमाई अपराधों पर पूरी तरह से लगाम शामिल है। इसके लिए स्थानीय पुलिस बांग्लादेश बॉर्डर गार्ड्स और नागरिक प्रतिनिधियों की भागीदारी महत्वपूर्ण है। इसके लिए जवानों को विशेष तौर पर सतर्कता बरतने को कहा गया है। विभिन्न टुकड़ियों में बंटी बीएसएफ की टीम के अधिकारियों को भी विशेष तौर पर अपराध रोकथाम हेतु अभियान चलाने को कहा गया है। इसमें ना केवल सख्ती बरतना शामिल है बल्कि नैतिक और मानसिक तौर पर भी लोगों को अपराध से दूर करने हेतु उपाय किए जा रहे हैं। नागरिकता अधिनियम की वजह से घटे हैं घुसपैठ क्या भारत में एनआरसी लागू होने के डर अथवा नागरिकता अधिनियम के लागू होने के कारण सीमा पर घुसपैठ कम हुआ है? इस पर अश्विनी कुमार ने अप्रत्यक्ष रूप से कहा कि हां इस वजह से कम हुआ है। लेकिन हाल के दौर में सीमा पर घुसपैठ बहुत कम हुआ है। इसके लिए बहुत हद तक बीएसएफ जवानों की सजगता की उन्होंने सराहना की। बरामद मवेशियों की बेहतर देखरेख की व्यवस्था अश्विनी कुमार सिंह ने बताया कि सीमा पर बड़ी संख्या में मवेशियों की तस्करी रोकी जाती है और उन्हें पकड़ा भी जाता है, लेकिन सबसे बड़ी समस्या पकड़े गए मवेशियों की देखरेख होती थी। अब कई एनजीओ बीएसएफ के साथ मिलकर काम कर रही हैं। वे पकड़े गए मवेशियों को गौशाला आदि में ले जाते हैं और उनकी बेहतर देखरेख की जाती है। सिंह ने यह भी बताया कि और भी कई एनजीओ के साथ संपर्क साधे जा रहे हैं ताकि सीमा पर पकड़े जाने वाले मवेशियों की बेहतर रखरखाव हो सके। उल्लेखनीय है पाकिस्तान सीमा के मुकाबले बांग्लादेश सीमा पर वैसे शांति सबसे अधिक रहती है लेकिन यहां तस्करी जैसे अपराधिक गतिविधियां सबसे ज्यादा होती हैं। इसलिए भारत-बांग्लादेश सीमा पर बीएसएफ की चुनौतियां बड़ी है। यहां तस्करी को खत्म करना सबसे बड़ी चुनौती है। सिंह ने कहा कि बीएसएफ जवानों की सजगता और बेहतर तालमेल के जरिए इस लक्ष्य को पूरा करने हेतु प्रतिबद्ध है। सीमा पर अलार्मिंग सिस्टम, बाड़ का लगना और सीसीटीवी का सदुपयोग कर बल की क्षमता को बढ़ाया जा सकता है। बड़ी बात यह है कि भारत-बांग्लादेश सीमा पर तार के बाड़ लगाने को लेकर कई बार चर्चा हुई है। भारत- बांग्लादेश सीमा पर अत्याधुनिक तकनीक से निगरानी के लिए केंद्र सरकार प्रतिबद्ध है। हालांकि आरोप लगते हैं कि पश्चिम बंगाल सरकार बाड़ लगाने और अन्य आवश्यक इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित करने हेतु जमीन उपलब्ध नहीं कराती है।-hindusthansamachar.in