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अविरल और निर्मल गंगा के लिए समाज की सजगता आवश्यक : मोहन भागवत

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प्रयागराज, 20 फरवरी (हि.स.)। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने शनिवार को कहा कि गंगा भारतीय जीवन की सांस्कृतिक रेखा है। इसको अविरल और निर्मल बनाने में शासन से भी ज्यादा समाज की सजगता आवश्यक है। डॉ.भागवत शनिवार को यहां माघ मेला परिसर के विहिप कैम्प में आयोजित गंगा समग्र के दो दिवसीय कार्यकर्ता बैठक को सम्बोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि आंकड़े बताते हैं कि अभी बहुत प्रयास बाकी है। नियमित कार्य करके ही हम लक्ष्य तक पहुंच सकते हैं। उन्होंने कहा कि समाज को सजग करना, हानि-लाभ से ऊपर उठकर प्रबोधन करना, टीम वर्क के जरिए तटों पर संपर्क, 5 किलोमीटर के दायरे में गंगा आरती समेत कई प्रमुख बिंदुओं पर आगे बढ़कर ही हम गंगा को अविरल और निर्मल बना सकते हैं। यह कार्य धैर्यपूर्वक एवं लंबे समय तक करना होगा। कार्यक्रम में प्रमुख रूप से पूर्व केंद्रीय मंत्री उमा भारती, संघ के सह सरकार्यवाह डॉ. कृष्णगोपाल, गंगा समग्र के राष्ट्रीय संगठन मंत्री मिथिलेश नारायण, राष्ट्रीय महामंत्री आशीष गौतम, केंद्रीय उपाध्यक्ष डॉ. मोहन सिंह, डॉ वीरेंद्र जायसवाल, पूर्वी उत्तर प्रदेश क्षेत्र के क्षेत्र प्रचारक अनिल, काशी प्रांत के प्रचारक रमेश, क्षेत्र संयोजक चिंतामणि उपस्थित थे। दो दिवसीय बैठक के आखिरी दिन प्रथम सत्र में 12 प्रांतों के करीब 600 कार्यकर्ता उपस्थिति थे। बैठक में 2014 से अब तक अविरल एवं निर्मल गंगा के लिए किए गए प्रयासों की समीक्षा के साथ-साथ आगामी कार्य योजना पर भी चर्चा हुई। हिन्दुस्थान समाचार/राम बहादुर