ख्वाजा के दर पर कोरोना ने जाने से रोका तो दरवाजे पर ही लगा रहे हैं अर्जियां

ख्वाजा के दर पर कोरोना ने जाने से रोका तो दरवाजे पर ही लगा रहे हैं अर्जियां
at-the-rate-of-khwaja-if-corona-stopped-him-from-going-then-applications-are-being-made-at-the-door-itself

- डेढ़ साल से बंद है गरीब नवाज की दरगाह, श्रद्धालु मांग रहे हैं कोरोना से निजात की मन्नतें नई दिल्ली, 09 जून (हि.स.)। अजमेर स्थित ख्वाजा गरीब नवाज की दरगाह पूरी दुनिया के लोगों के लिए हमेशा से ही आकर्षण का केंद्र रही है। पिछले 14-15 महीनों से कोरोना वायरस महामारी की वजह से यह दरगाह बंद हैं। इस दौरान बीच में इसे कुछ दिनों के लिए खोला तो गया था लेकिन कोविड-19 की गाइडलाइंस की वजह से तमाम तरह की बंदिशों से श्रद्धालु दरगाह आने से बचते रहे। इधर महामारी की दूसरी लहर के विकराल रूप धारण करने के बाद इसे वापस बंद कर दिया गया। ऐसे में ख्वाजा अजमेरी के चाहने वाले दरगाह के दरवाजे पर अपनी मन्नतों की अर्जियां बांधकर ख्वाजा साहब तक अपनी दुआएं पहुंचा रहे हैं। इसमें अकीदतमंद उनसे दरगाह के खुलने और देश-दुनिया को महामारी से छुटकारा दिलाने की दरख्वास्त कर रहे हैं। ख्वाजा की दरगाह पर हमेशा बड़ी संख्या में लोगों का आना जाना लगा रहता है। देशभर से सभी धर्मों के मानने वालों का यहां पर तांता लगा रहता है लेकिन पिछले देढ़ साल से देश में फैले कोरोना वायरस महामारी के कारण दरगाह को आम लोगों के लिए बंद करना पड़ा है। दरगाह शरीफ के खादिम सलमान चिश्ती और नफीस मियां चिश्ती ने अपनी और दरगाह से जूडे लोगों की हालात का जिक्र करते हुए बताया की ख्वाजा साहब की दरगाह बंद होने से कई लोगों से उनका रोजगार छिन गया है। दरगाह बाजार और आसपास के क्षेत्र में रहने वाले अधिकांश लोगों की रोजी-रोटी दरबार शरीफ में हाजिरी लगाने वाले जायरीनों की वजह से ही चलती है। ऐसे में दरगाह का बंद होना इन लोगों के लिए मुसीबत का सबब बना हुआ है। ख्वाजा साहब के मानने वाले श्रद्धालु ख्वाजा साहब के मुख्य द्वार की चौखट चूम कर अपनी चिट्टियां दरगाह के गेट पर लटका रहे हैं। इन सभी चिट्ठियों में एक ही फरियाद लिखी होती है कि ख्वाजा साहब जल्द से जल्द इस महामारी को देश-दुनिया से खत्म करा दें ताकि लोगों को उनका रोजगार वापस मिल सके। दरगाह के खादिम समुदाय का कहना है कि सरकार को धार्मिक स्थलों को खोलने का फैसला करते हुए कुछ इस तरह के इंतजाम करने चाहिए जिससे कोरोना गाइडलाइंस के नियमों का भी पालन करवाया जा सके और लोगों के रोजगार भी प्रभावित नहीं होने पाएं। उनका कहना है कि हालांकि अभी दरगाह को खोलने के बाद भी यहां पर पहले जैसे हालात होने में कई महीनों का समय लगेगा क्योंकि महामारी की वजह से अभी भी लोग काफी डरे हुए हैं। जिन लोगों ने अपनों को खोया है, वह काफी पीड़ा में हैं। खादिमों का कहना है कि विषेशज्ञ तीसरी लहर के आने की भी बात कर रहे हैं। अगर हमारे देश में कोरोना वायरस की तीसरी लहर आती है तो उसके बचाव के लिए एक बार फिर से सब कुछ बंद करना पड़ सकता है। इसलिए अभी दरगाह को खोलने का फैसला किया जाना चाहिए ताकि दरगाह के बंद होने की वजह से जो लोग परेशान हैं, उनकी परेशानी कुछ हद तक दूर हो सके। साथ ही जो श्रद्धालु दरगाह आना चाहते है, उन्हें यहां आने की इजाजत दी जाए। हिन्दुस्थान समाचार/एम. ओवैस