अनूप चंद्र पांडेय ने संभाला चुनाव आयुक्त का कार्यभार

अनूप चंद्र पांडेय ने संभाला चुनाव आयुक्त का कार्यभार
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नई दिल्ली, 09 जून (हि.स.)। उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्य सचिव रहे अनूप चंद्र पांडेय ने शुक्रवार भारत के नए चुनाव आयुक्त (ईसी) के रूप में पदभार ग्रहण किया। पांडेय मुख्य चुनाव आयुक्त सुशील चंद्रा और चुनाव आयुक्त राजीव कुमार की अध्यक्षता वाले तीन सदस्यीय निकाय में दूसरे चुनाव आयुक्त के रूप में शामिल हुए। आयोग के अनुसार 15 फरवरी 1959 को जन्मे अनूप चंद्र पांडेय 1984 बैच के भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारी रह चुके हैं। भारत सरकार की प्रतिष्ठित सेवा के लगभग 37 वर्षों की अवधि के दौरान पांडेय ने केंद्र के विभिन्न मंत्रालयों और विभागों और उत्तर प्रदेश के अपने राज्य संवर्ग में काम किया है। नौकरशाह अनूप चंद्र पांडेय ने पंजाब इंजीनियरिंग कॉलेज से मैकेनिकल इंजीनियरिंग में स्नातक की डिग्री और पंजाब विश्वविद्यालय से सामग्री प्रबंधन में मास्टर डिग्री प्राप्त की है। अनूप चंद्र की इतिहास के अध्ययन में गहरी रुचि है। उन्होंने मगध विश्वविद्यालय से प्राचीन भारतीय इतिहास में डॉक्टरेट की उपाधि प्राप्त की है। पांडेय अगस्त 2019 में उत्तर प्रदेश सरकार के मुख्य सचिव के रूप में सेवानिवृत्त हुए। भारत के चुनाव आयोग में शामिल होने से पहले उन्होंने राष्ट्रीय हरित अधिकरण निरीक्षण समिति (उत्तर प्रदेश) के सदस्य के रूप में कार्य किया। मुख्य सचिव के रूप में उनके प्रशासनिक नेतृत्व में राज्य ने 2019 में प्रयागराज में कुंभ मेला और वाराणसी में प्रवासी भारतीय दिवस का सफलतापूर्वक आयोजन किया। इससे पहले अनूप चंद्र ने राज्य के औद्योगिक विकास आयुक्त के रूप में कार्य किया और 2018 में लखनऊ में एक मेगा इन्वेस्टर समिट का सफलतापूर्वक आयोजन किया। उन्होंने सिंगल विंडो निवेश मित्र पोर्टल सहित उद्योगों और व्यापार क्षेत्र में विभिन्न नीतिगत सुधारों की शुरुआत की। उत्तर प्रदेश सरकार में अपर मुख्य सचिव (वित्त) रहते हुए पांडेय के प्रयासों से राज्य कृषि ऋण माफी योजना की सफल डिजाइनिंग, योजना और कार्यान्वयन हुआ। पांडेय ने केंद्र सरकार में अपनी प्रतिनियुक्ति के दौरान विविध विभागों का कार्यभार संभाला है। उन्होंने रक्षा मंत्रालय में अतिरिक्त सचिव और श्रम और रोजगार मंत्रालय में संयुक्त सचिव के रूप में कार्य किया। यहां उन्होंने जी20 और अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन जैसे विभिन्न अंतरराष्ट्रीय मंचों पर देश का प्रतिनिधित्व किया। वह स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय और उपभोक्ता मामलों के विभाग में निदेशक भी थे। उनकी लेखन में गहरी रुचि है और उन्होंने ‘प्राचीन भारत में शासन’ नामक एक पुस्तक लिखी है, जो ऋग्वैदिक काल से 650 ईस्वी तक प्राचीन भारतीय सिविल सेवा के विकास, प्रकृति, कार्यक्षेत्र, कार्यों और सभी संबंधित पहलुओं की खोज करती है। हिन्दुस्थान समाचार/अनूप