अंधेरनगरी : करोड़ों की ठगी मामले में कानपुर के डीपीआरओ की जांच में सब 'बरी' ! .

अंधेरनगरी :  करोड़ों की ठगी मामले में कानपुर के डीपीआरओ की जांच में सब 'बरी' ! .
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- निर्वाचन आयोग के आदेश को दरकिनार कर कर्मचारियों ने उम्मीदवारों से की ठगी - ठगी करने के लिए जानबूझकर बकाएदारों की नहीं जारी की गई थी सूची - जिन विभागों पर था आरोप, उन्ही विभागों के अधिकारियों को मिली जांच अजय सिंह कानपुर, 14 अप्रैल (हि.स.)। त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में नामांकन के दौरान उम्मीदवारों से सरकारी कर्मचारियों द्वारा की गई करोड़ों रुपयों की ठगी मामले में जांच कर रहे डीपीआरओ ने सबको बरी कर दिया। सूत्र बताते हैं कि जांच रिपोर्ट में किसी को भी दोषी नहीं पाया गया और न ही किसी से लिखित बयान लिये गये। पूरे मामले को लेकर सवालों की लंबी फेहरिस्त है, जिसका जवाब जनता के सामने आना चाहिये। सपा के पूर्व विधायक सतीश निगम ने तो दूसरे विभाग के जिलास्तरीय अधिकारियों की टीम से जांच कराने और दोषियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराये जाने की मांग कर दी। उत्तर प्रदेश में हो रहे त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव के पहले चरण के तहत 15 अप्रैल को कानपुर नगर जनपद में मतदान होना है। तीन और चार अप्रैल को नामांकन प्रक्रिया के दौरान जनपद के 8857 पदों के लिए 15428 उम्मीदवारों ने नामांकन कराया। उम्मीदवारों के मुताबिक इस दौरान अदेय प्रमाण पत्र के नाम पर सरकारी कर्मचारियों ने करोड़ों रुपये ठग लिए और हिन्दुस्थान समाचार ने प्रमुखता से खबर को जारी किया था। खबर का संज्ञान शासन ने लिया और जिलाधिकारी आलोक तिवारी ने दो सदस्यीय जांच कमेटी गठित कर दी। इस जांच कमेटी में जिला पंचायत राज अधिकारी (डीपीआरओ) कमल किशोर और सहायक निबन्धक सहकारी समिति अंसल कुमार रहे। दोनों अधिकारियों ने संयुक्त रुप से जांच रिपोर्ट तैयार की और जांच रिपोर्ट आलाधिकारियों को सौंप दी। सूत्र बताते हैं कि जांच रिपोर्ट में किसी को दोषी नहीं पाया गया और न ही किसी कर्मचारी का लिखित बयान लिया गया, जबकि नियमत: लिखित बयान लेना चाहिये। सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि जिन विभागों यानि पंचायत विभाग और सहकारिता विभाग पर आरोप था उन्ही विभागों के अधिकारियों ने जांच रिपोर्ट तैयार की, जिससे दोषियों पर कार्रवाई होने का सवाल ही नहीं उठता। यह है सवाल निर्वाचन आयोग ने आदेश दिया था कि जिला पंचायत राज अधिकारी, जिला पंचायत के अपर मुख्य अधिकारी/ मुख्य अधिकारी बकाएदारों की सूची तैयार कराकर नामांकन कार्यालयों पर उपलब्ध करा दें, ताकि निर्वाचन अधिकारियों/ सहायक निर्वाचन अधिकारियों को ग्राम पंचायत, क्षेत्र पंचायत तथा जिला पंचायत का निर्वाचन लड़ने वाले उम्मीदवारों के नामांकन पत्रों की जांच करने में सुविधा रहे। आयोग ने यह भी स्पष्ट किया था नामांकन प्रपत्र के अदेयता प्रमाण पत्र (ग्राम पंचायत, क्षेत्र पंचायत तथा जिला पंचायत) के स्तम्भ में सिर्फ टिक का निशान लगाना है। लेकिन कानपुर नगर जनपद में ऐसा नहीं किया गया और ऐसे में अगर यह कहा जाए कि संबंधित अधिकारियों ने उम्मीदवारों से ठगी करने के लिए कर्मचारियों को खुली छूट दे रखी थी तो अतिशयोक्ति नहीं होगी। क्योंकि उम्मीदवार यही समझकर अदेय प्रमाण पत्र के नाम पर कर्मचारियों को रुपया देते रहे। वसूली के लिए बनाये गये अदेय प्रमाण पत्र उम्मीदवारों से पांच प्रकार के अदेय प्रमाण पत्र लिये गये और उम्मीदवारों के मुताबिक कोई भी अदेय प्रमाण पत्र बनवाने में कर्मचारियों ने तीन सौ रुपये से कम नहीं लिया। जिसमें एक ग्राम पंचायत, दूसरा क्षेत्र पंचायत, तीसरा जिला पंचायत, चौथा सहकारी समिति और पांचवा भूमि विकास बैंक का रहा। सहकारी समिति और भूमि विकास बैंक के अदेय प्रमाण पत्र के लिए तो निर्वाचन विभाग के आदेश में कहीं जिक्र भी नहीं था, फिर भी उम्मीदवारों से अदेय प्रमाण पत्र जबरन लिए गये। इस पर जब सहायक निबन्धक सहकारी समिति अंसल कुमार से हिन्दुस्थान समाचार ने बात की तो किसी भी बात का संतुष्टजनक जवाब नहीं दे सके। यह जरुर कहा कि सहकारी समिति का ग्रामीणों के बीच बकाया काफी था और वसूली के लिए अदेय प्रमाण पत्र जारी किये गये। दर्ज हो मुकदमा सपा के वरिष्ठ नेता व कल्याणपुर से विधायक रहे सतीश निगम ने कहा कि अधिकारियों ने सोची समझी रणनीति के तहत अपने कर्मचारियों से उम्मीदवारों से ठगी कराई। अगर सही से जांच दूसरे विभाग के अधिकारी करें तो पंचायत राज और सहकारिता विभाग के अधिकारियों की पोल खुल जाएगी। उन्होंने आरोप लगाया कि उम्मीदवारों से जो ठगी की गई है उसका हिस्सा अधिकारियों तक पहुंचा है, वरना इतना बड़ा खेल कर्मचारी कर ही नहीं सकते। पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कराकर दोषियों पर मुकदमा दर्ज होना चाहिये, क्योंकि यह ठगी उन उम्मीदवारों से की गई है जो आने वाले दिनों में जनता का प्रतिनिधित्व करेंगे। हिन्दुस्थान समाचार