अमित शाह और जेपी नड्डा ने नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति को सराहा, कहा- नए भारत के निर्माण में निभाएगी अभूतपूर्व भूमिका
अमित शाह और जेपी नड्डा ने नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति को सराहा, कहा- नए भारत के निर्माण में निभाएगी अभूतपूर्व भूमिका
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अमित शाह और जेपी नड्डा ने नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति को सराहा, कहा- नए भारत के निर्माण में निभाएगी अभूतपूर्व भूमिका

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केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने बुधवार को कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी)-2020 एक ऐतिहासिक नीतिगत निर्णय है जो नए भारत के निर्माण में अभूतपूर्व भूमिका निभाएगा। वहीं, भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा ने कहा कि नई शिक्षा नीति बहुप्रतीक्षित सुधार और नियामक ढांचा लेकर आई है जो नए भारत की जरूरतों को ध्यान में रखती है और युवाओं की ऊर्जा को आत्मनिर्भर बेहतर भारत के लिए सार्थक बनाती है। बच्चों का हो सकेगा समग्र विकास एक के बाद एक कई ट्वीट कर शाह ने कहा कि एनईपी-2020 सुनिश्चित करेगी कि समाज के हर वर्ग के छात्रों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्राप्त हो। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और शिक्षा मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक के प्रति आभार जताते हुए उन्होंने कहा कि शिक्षा किसी भी देश की नींव होती है और पिछले 34 साल से भारत को एक ऐसी ही भविष्य की नीति की सख्त जरूरत थी। इस नीति का मकसद समग्र और बहु-विषयक दृष्टिकोण से भारतीय शिक्षा प्रणाली में बड़ा आमूलचूल बदलाव लाना है। विभिन्न पहलुओं पर फोकस से देशभर में बच्चों का समग्र विकास हो सकेगा। विस्तृत विमर्श के बाद तैयार की गई नई शिक्षा नीति भाजपा अध्यक्ष नड्डा ने भी सिलसिलेवार ट्वीट कर कहा कि आज का दिन देश के लिए महत्वपूर्ण है क्योंकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्रीय कैबिनेट ने नई शिक्षा नीति 2020 को मंजूरी दे दी। उन्होंने कहा कि विस्तृत विमर्श के बाद तैयार की गई यह शिक्षा नीति गुणवत्तापूर्ण शोध को प्रोत्साहन देने के अलावा बच्चों की देखभाल व उनकी शिक्षा, विद्यार्थियों के साथ निष्पक्षता और शिक्षकों की नियुक्ति को सुदृढ बनाना सुनिश्चित करती है। New Education Policy 2020 की खास बातें – पांचवी तक पढ़ाई के लिए मातृ भाषा या स्थानीय भाषा के जरिए होगी – छठी कक्षा के बाद से ही वोकेशनल एजुकेशन की शुरुआत – यूनिवर्सिटीज और उच्च शिक्षण संस्थानों में प्रवेश के लिए कॉमन एन्ट्रेंस एग्जाम होंगे – लीगल और मेडिकल कॉलेजों को छोड़कर सभी उच्च शिक्षण संस्थानों का संचालन एकल नियामक (सिंगल रेग्युलेटर) के जरिए होगा – नई शिक्षा नीति के तहत एमफिल कोर्सेज को खत्म किया गया – सभी सरकारी और निजी उच्च शिक्षण संस्थानों के लिए एक तरह के मानदंड होंगे – बोर्ड परीक्षा रटने पर नहीं बल्कि ज्ञान के इस्तेमाल पर अधारित होगी – संस्थानों के पास ओपन डिस्टेंस लर्निंग और ऑनलाइन कार्यक्रम चलाने का विकल्प होगा -उच्च शिक्षा के लिए बनाए गए सभी तरह के डीम्ड और संबंधित विश्वविद्यालय को सिर्फ अब विश्वविद्यालय के रूप में ही जाना जाएगा-newsindialive.in