कमांडरों ने तीन दिन में तय किया ​वायुसेना के अगले दशक का रोडमैप
कमांडरों ने तीन दिन में तय किया ​वायुसेना के अगले दशक का रोडमैप
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कमांडरों ने तीन दिन में तय किया ​वायुसेना के अगले दशक का रोडमैप

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- वायुसेना प्रमुख ने विजन-2030 को एयरफोर्स में बदलावों के लिए बताया मील का पत्थर नई दिल्ली, 24 जुलाई (हि.स.)। देशभर से आये कमांडरों ने तीन दिन की कांफ्रेंस में भारतीय वायुसेना के अगले दशक में बदलाव के लिए रोडमैप तैयार किया। वर्तमान स्थितियों में सुरक्षा के खतरों का मुकाबला करने के लिए वायुसेना की तैयारियों और रणनीतियों पर चर्चा और समीक्षा करने के बाद शुक्रवार को वायु सेना कमांडर्स का यह सम्मेलन ख़त्म हो गया। वायु सेना के कमांडरों का यह सम्मेलन दिल्ली के वायु भवन में हुआ जिसका उद्घाटन 22 जुलाई को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने किया था। भारतीय वायुसेना ने अपने पूरे क्षेत्र में संभावित सुरक्षात्मक खतरों से निपटने के लिए, सैन्य तैयारियों और रणनीतियों पर चर्चा करके स्थितियों की समीक्षा की। तीनों सेनाओं में तालमेल के साथ युद्ध लड़ने के विषय पर सैन्य बलों के प्रमुख (सीडीएस) जनरल बिपिन रावत, नौ सेना प्रमुख एडमिरल करमबीर सिंह और थल सेना प्रमुख जनरल एमएम नरवणे ने इस कॉन्फ्रेंस को संबोधित किया। शीर्ष अधिकारियों ने कमांडरों के साथ-साथ वायुसेना के मुख्य अधिकारियों के साथ बातचीत की। वायु सेनाध्यक्ष एयर चीफ मार्शल आरकेएस भदौरिया ने सभी कमांडरों के साथ-साथ वायुसेना मुख्यालय की विभिन्न शाखाओं से संबंधित स्थितियों और मुद्दों की समीक्षा की। अपने समापन भाषण में वायुसेना प्रमुख भदौरिया ने विजन-2030 को रखा जिसे अगले दशक में भारतीय वायुसेना में होने वाले बदलावों के लिए मील का पत्थर बताया। उन्होंने कहा कि तेजी के साथ बदलती हुई दुनिया में उभरते हुए खतरों की पहचान करना बहुत ही महत्वपूर्ण है। उन्होंने एयर पावर की निर्माण क्षमता तेजी से बढ़ाने के साथ ही कम से कम समय सीमा में नई तकनीकों के इस्तेमाल की आवश्यकता पर भी बल दिया। एयर चीफ मार्शल ने भारतीय वायुसेना की तैयारियों और आवश्यकता को देखते हुए मजबूत और त्वरित गतिशीलता की सराहना की। उन्होंने कोविड-19 महामारी के दौरान वायुसेना द्वारा किये गए कार्यों को भी सराहा। उन्होंने कहा कि अब वायुसेना को ई-गवर्नेंस को बढ़ावा देकर स्वचालन के माध्यम से दक्षता बढ़ानी चाहिए। सीएएस ने कमांडरों से 'युद्ध की लगन' को बनाए रखने के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि 'कम के साथ अधिक' हासिल करना जारी रखना चाहिए। उन्होंने कहा कि भारतीय वायुसेना को अपने लक्ष्य पूरे करने के लिए उम्दा तकनीकों का अधिग्रहण करने, रोजगार का सृजन करने और स्वदेशी हथियारों का विकास करना जरूरी है। वायुसेना प्रमुख ने कहा कि चूंकि मानव संसाधन भारतीय वायुसेना की सबसे बहुमूल्य संपत्ति है, इसलिए भर्ती, प्रशिक्षण और रणनीतियों को बदलते हुए समय के साथ तालमेल रखना चाहिए। हिन्दुस्थान समाचार/सुनीत-hindusthansamachar.in