'मूक' समाज को आवाज देकर ही उनके 'नायक' बने थे बाबा साहब आंबेडकर

'मूक' समाज को आवाज देकर ही उनके 'नायक' बने थे बाबा साहब आंबेडकर
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“अगर कोई इंसान, हिंदुस्तान के क़ुदरती तत्वों और मानव समाज को एक दर्शक के नज़रिए से फ़िल्म की तरह देखता है, तो ये मुल्क नाइंसाफ़ी की पनाहगाह के सिवा कुछ नहीं दिखेगा।'' बाबा साहेब भीमराव आंबेडकर ने आज से 100 वर्ष पूर्व 31 जनवरी 1920 को अपने अख़बार 'मूकनायक' के क्लिक »-www.prabhasakshi.com