'प्राकृतिक संसाधन कभी खत्म नहीं होंगे', यह सोच ही सर्वाधिक नुकसान पहुँचा रही है

'प्राकृतिक संसाधन कभी खत्म नहीं होंगे', यह सोच ही सर्वाधिक नुकसान पहुँचा रही है
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करोड़ों वर्ष पूर्व पृथ्वी एक तपता (आग) हुआ गोला थी। जैसे-जैसे समय बीतता गया तपते हुए गोले से सागर, महाद्वीपों आदि का निर्माण हुआ। पृथ्वी पर अनुकूल जलवायु ने मानव जीवन तथा अन्य जीव सृष्टि को जीवन दिया जिससे इन सबका जीवन-अस्तित्व कायम रखने वाली प्रकृति का निर्माण हुआ। मानव क्लिक »-www.prabhasakshi.com

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