'आत्मनिर्भर भारत' में महत्वपूर्ण होगी एनआईटी जैसे शिक्षण संस्थानों की भूमिका : निशंक
'आत्मनिर्भर भारत' में महत्वपूर्ण होगी एनआईटी जैसे शिक्षण संस्थानों की भूमिका : निशंक
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'आत्मनिर्भर भारत' में महत्वपूर्ण होगी एनआईटी जैसे शिक्षण संस्थानों की भूमिका : निशंक

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- शिक्षा मंत्री ने किया एनआईटी जमशेदपुर में हीरक जयंती व्याख्यान हाल का उद्घाटन नई दिल्ली, 20 अक्टूबर (हि.स.)। केंद्रीय शिक्षा मंत्री डॉ रमेश पोखरियाल निशंक ने मंगलवार को कहा कि आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (एनआईटी) जैसे उच्च शिक्षण संस्थानों की भूमिका महत्वपूर्ण होगी। निशंक ने आज वर्चुअल माध्यम से एनआईटी जमशेदपुर के 60 वर्ष पूरे होने के मौके पर अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस 130 करोड़ की लागत से तैयार हीरक जयंती व्याख्यान हाल का उद्घाटन किया। पूरी तरह से वातानुकूलित हाल में 4400 विद्यार्थियों और 160 फैकल्टी के बैठने का स्थान है। इस मौके पर केंद्रीय शिक्षा राज्य मंत्री संजय धोत्रे, एनआईटी के निदेशक प्रोफेसर करुणेश कुमार शुक्ला एवं संस्थान के अन्य विभागों के विभागाध्यक्ष, संकाय सदस्य एवं छात्र-छात्राएं भी उपस्थित थे। केंद्रीय शिक्षा मंत्री ने एनआईटी जमशेदपुर के नवाचार संबंधी उपलब्धियों का हवाला देते हुए कहा कि मुझे पूर्ण विश्वास है कि नई शिक्षा नीति तथा एनआईटी जमशेदपुर जैसे संस्थान मिलकर ‘राष्ट्र निर्माण’ तथा ‘भारत को ज्ञान की महाशक्ति’ बनाने की दिशा में अपना शत-प्रतिशत योगदान देंगे और नए, शिक्षित, सशक्त, समृद्ध एवं आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में सहायक सिद्ध होंगे। उन्होंने कहा कि भारत सरकार स्टडी इन इंडिया, स्टे इन इंडिया तथा शिक्षा के अंतरराष्ट्रीयकरण के माध्यम से भारत को शिक्षा के वैश्विक हब के रूप में स्थापित करने के लिए प्रतिबद्ध है और हमारी इस प्रतिबद्धता को पूरा करने के लिए एनआईटी जमशेदपुर जैसे संस्थानों की सहयोगी भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण होगी। निशंक ने एनआईटी जमशेदपुर द्वारा किये गए कार्यों की सराहना करते हुए कहा, 12 विभागों के साथ एनआईटी जमशेदपुर प्रतिवर्ष लगभग 1300 छात्रों को बहुआयामी शिक्षा प्रदान कर रहा है और और शिक्षा, अनुसंधान, प्रौद्योगिकी, नवाचार के साथ-साथ एंटरप्रेन्योरशिप के क्षेत्र में भी देश के उत्कृष्ट केंद्र के रूप में उभर रहा है। इस वर्ष इस संस्थान ने प्रति फैकेल्टी 1.61 पब्लिकेशन तथा कुल 234 प्रकाशन किए हैं। साथ ही इसने 8 पेटेंट, जिसमें से 5 इस वर्ष प्रकाशित किए हैं। एनआईटी जमशेदपुर के गणित विभाग ने अजमान यूनिवर्सिटी, यूएई के साथ एक इंटरनेशनल प्रोजेक्ट शुरू किया है जो कोरोना वायरस के प्रसार को समझने में मददगार साबित होगा। निशंक ने संस्थान द्वारा शुरू किये प्रोजेक्ट की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे प्रोजेक्ट निश्चित रूप से भारतीय संस्थानों तथा भारतीय शिक्षा को वैश्विक पटल पर एक नई पहचान और नया नेतृत्व देंगे। इसके अलावा निशंक ने एनआईटी जमशेदपुर के छात्रों द्वारा कोरोना संकट काल के दौरान बनाए गए एक यंत्र जिससे कोविड-19 मरीजों के मॉनिटरिंग की जा सकेगी उनकी सुरक्षा सुनिश्चित की जा सकेगी की भी प्रशंसा की। हजारीबाग जिला प्रशासन ने इस एप का प्रयोग भी किया है। कोरोना संकट काल में एनआईटी जमशेदपुर द्वारा किये गए अन्य कार्यों का उल्लेख करते हुए कहा, एनआईटी जमशेदपुर के रसायन विज्ञान विभाग ने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम, सरायकेला जैसे जिलों के लिए सैनिटाइजर का भी उत्पादन किया है। इसके अलावा ग्रामीण क्षेत्रों में पुनः प्रयोग किए जा सकने वाले मास्क तथा जागरूकता अभियान, जरूरतमंद लोगों को खाद्य सामग्री जैसी वस्तुएं व अन्य प्रशिक्षण सुविधाएं देकर संस्थान ने महामारी प्रदत्त चुनौतियों का पूरी कुशलता के साथ सामना किया है। साथ ही इंस्टीट्यूशनल सोशल रिस्पांसिबिलिटी यानी संस्थान की अपनी सामाजिक जिम्मेदारियों को समझते एवं निर्वहन करते हुए, समाज के विकास में अपना अहम योगदान भी दिया है। निशंक ने नई शिक्षा नीति के बारे में कहा कि यह शिक्षा नीति ग्लोबल माइंड सेट के साथ इंडियन, इंटरनेशनल, इंपैक्टफुल, इंटरएक्टिव और इंक्लूसिविटी के तत्वों को एक साथ समाहित करती है। उन्होंने एनआईटी का आह्वान करते हुए कहा कि शिक्षा नीति के सफल कार्यान्वयन के लिए अपने नेशनल तथा इंटरनेशनल ब्रांड एलुमनाई का एक नेटवर्क तथा टास्क फोर्स बनाएं ताकि उनके अनुभव, एक्सपर्टीज, ज्ञान, विद्या दान के माध्यम से हम इस नीति का सफल कार्यान्वयन कर सकें। उन्होंने कहा कि मुझे पूर्ण विश्वास है कि नई शिक्षा नीति तथा एनआईटी जमशेदपुर जैसे संस्थान मिलकर ‘राष्ट्र निर्माण’ तथा ‘भारत को ज्ञान की महाशक्ति’ बनाने की दिशा में अपना शत-प्रतिशत योगदान देंगे और नए, शिक्षित, सशक्त, समृद्ध एवं आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में सहायक सिद्ध होंगे। हिन्दुस्थान समाचार/सुशील-hindusthansamachar.in