​चीन ने फिर अरुणाचल प्रदेश को बताया अपना हिस्‍सा
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​चीन ने फिर अरुणाचल प्रदेश को बताया अपना हिस्‍सा

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- चीनी विदेश मंत्रालय बोला-अरुणाचल प्रदेश को कभी भी नहीं दी मान्यता - भारत के पूर्वी प्रदेश को बताया चीन के दक्षिण तिब्बत क्षेत्र का हिस्सा - पांच भारतीय बंधकों पर चीनी सेना ने नहीं दिया कोई भी जवाब नई दिल्ली, 07 सितम्बर (हि.स.)। अरुणाचल प्रदेश के ऊपरी सुबनसिरी जिले से पांच भारतीय नागरिकों के अपहरण मामले में भारतीय सेना की पूछताछ पर चीन ने अभी भी चुप्पी साध रखी है बल्कि इसके उलट एक बार फिर अरुणाचल प्रदेश को लेकर विवाद खड़ा करने की कोशिश की है। चीन के विदेश मंत्रालय ने यहां तक कह दिया कि चीन ने कभी भी अरुणाचल प्रदेश को मान्यता नहीं दी है और यह चीन के दक्षिण तिब्बत क्षेत्र का हिस्सा है। अरुणाचल प्रदेश के 5 अगवा भारतीयों के बारे में चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता झाओ लिजिन से जब पूछा गया तो उन्होंने इस बारे में जानकारी देने की बजाय अरुणाचल प्रदेश को चीन का हिस्सा बता दिया। उन्होंने कहा कि भारतीय सेना के अनुरोध के बारे में उन्हें कोई जानकारी नहीं है। लिजिन ने कहा कि चीन ने कभी अरुणाचल प्रदेश को मान्यता नहीं दी है जो चीन का दक्षिणी तिब्बत इलाका है। भारतीय सेना के पीएलए को भारतीयों को छोड़ने के लिए संदेश भेजने के सवाल पर चीनी प्रवक्ता ने कहा कि हमारे पास अभी इस बात की कोई जानकारी नहीं है। लद्दाख से लेकर अरुणाचल प्रदेश तक 3,488 किलोमीटर लंबी वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) के साथ इस समय चीन के साथ चल रहे तनाव के चलते अरुणाचल प्रदेश के सीमावर्ती इलाकों में भी पूरी तरह से चौकसी बरती जा रही है। इसके बावजूद चीनी सेना भारतीय सीमा के दुर्गम इलाकों में चोरी-छिपे घुसपैठ करने की फिराक में रहती है। भारत-तिब्बत की अंतरराष्ट्रीय सीमा पर भारतीय सेना की सेरा-7 पेट्रोलिंग है। यह जगह जिला मुख्यालय दापोर्जियो से 120 किमी दूर उत्तर की ओर है। नाचो गांव पेट्रोलिंग सेरा-7 से करीब 10 से 12 किमी दूर स्थित है। नाचो गांव निवासी तागिन समुदाय के तोच सिगंकाम, प्रशांत रिंगलिंग, दोंगतू इबिया, तानू बाकर और गारु दिरी भारतीय सेना के लिए पोर्टर के रूप में दुर्गम क्षेत्रों तक सामान की ढुलाई करते थे। इसके अलावा इलाके में सड़क व मोबाइल नेटवर्क न होने की वजह से वे गाइड के रूप में भी काम करते हैं। अरुणाचल प्रदेश के इसी भारत-तिब्बत सीमाई इलाके में उक्त पांचों युवक अपने दो अन्य साथियों के साथ 3 अगस्त को बॉर्डर इलाके के जंगलों में शिकार करने या जड़ी-बूटी इकट्ठा करने गए थे और नहीं लौटे। इस पर लापता आदिवासी युवकों में से एक के भाई ने फेसबुक पर पोस्ट की कि चीनी सेना अंतरराष्ट्रीय सीमा पर स्थित भारतीय सेना के सेरा-7 पेट्रोलिंग इलाके से इन युवकों को उठा ले गई है। इसके बाद गांव वालों ने स्थानीय प्रशासन को जानकारी दी। अरुणाचल प्रदेश के लापता इन पांचों युवकों के अपहरण की जांच के लिए एक पुलिस टीम को मैकमोहन लाइन से सटे सीमावर्ती क्षेत्र में भेजा गया। यह लाइन अपर सुबनसिरी जिले को तिब्बत से अलग करती है। इसके साथ ही प्रशासन ने भारतीय सेना को भी अवगत कराया। इस क्षेत्र के सांसद केंद्रीय खेल राज्य मंत्री किरण रिजीजू और ईस्ट अरुणाचल प्रदेश सीट से विधायक नोनिंग एरिंग ने भी इस मामले में पहल की। किरन रिजीजू ने रविवार को एक ट्विट करके पुष्टि की कि सरकार की जानकारी में यह मामला है और भारत की ओर से चीन को सन्देश भेजा गया है लेकिन अभी तक चीन की तरफ से कोई जवाब नहीं मिला है।जिस इलाके से यह घटना हुई है वह केंद्रीय खेल राज्य मंत्री किरण रिजीजू के संसदीय क्षेत्र में ही आता है, इसलिए उनका यह बयान और महत्वपूर्ण हो जाता है। भारतीय सेना के सन्देश पर चीनी सेना अभी भी चुप्पी साधे हुए है लेकिन चीन के विदेश मंत्रालय ने अरुणाचल प्रदेश को अपना हिस्सा बता दिया है। हिन्दुस्थान समाचार/सुनीत-hindusthansamachar.in