हरियाली में पिछड़ रहा जोधपुर, लक्ष्य को पाने में कई वर्ष लग जाएंगे
हरियाली में पिछड़ रहा जोधपुर, लक्ष्य को पाने में कई वर्ष लग जाएंगे
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हरियाली में पिछड़ रहा जोधपुर, लक्ष्य को पाने में कई वर्ष लग जाएंगे

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जोधपुर, 23 जुलाई (हि.स.)। सावन का महिना हो और बात हरियाली की ना की जाए तो बेमानी प्रतीत होती है। हरियाली के मामले में जोधपुर जिला पिछड़ा रहा है। देहरादून फॉरेस्ट की एक सर्वें रिपोर्ट के मुताबिक जिस हिसाब से हरियाली जोधपुर जिले में होनी चाहिए उसके अनुपात में नहीं हो पा रही है। रिपोर्ट के अनुसार सिरोही जिला जोधपुर से 25 गुना हरियाला है। फिर अन्य जिलों के नंबर आते है। प्रतिवर्ष जोधपुर में लाखों पौधों का रोपण तो कर दिया जाता है मगर उनकी सारसंभाल ढंग से नहीं होने से बेवक्त खत्म भी हो जाते है। इस साल जोधपुर जिले में 17 लाख पौधारोपण का लक्ष्य रखा गया है, साथ ही 18 लाख पौधें सरकारी एजेंसियों की तरफ से आमजन के सहयोग से लगाए जाएंगे। देहरादून की फारेस्ट सर्वें ऑफ इंडिया ने एक ताजा रिपोर्ट 2019 जारी की है। जिसके अनुसार जोधपुर में वनावरण का प्रतिशत केवल 1.42 प्रतिशत ही है। जबकि यह 33 फीसदी होना चाहिए। इस हिसाब से देखा जाएं तो इस लक्ष्य को पाने के लिए जोधपुर को कई वर्ष लग जाएंगे। प्रदेश में 7.08 हैक्टेयर ही वृक्षा से ढंका है। जोधपुर के 22 हजार 850 वर्गमीटर में केवल 1.42 प्रतिशत वनावरण है। जो निहायत ही कम है। इससे बेहतर स्थिति सिरोही बेल्ट की है जो जोधपुर से 25 गुना बेहतर है। जहां इतना वनावरण हो चुका है। इसके बाद अगर देखा जाएं तो बाड़मेर में 2.065, जैसलमेर में 1.48, पाली में 2.77 प्रतिशत और जालोर में 4 प्रतिशत तक वनावरण हो गया है। जोधपुर ऐतिहासिक दृष्टि से पर्यटन का मुख्य स्थल माना जाता है। पर्यटक जयपुर आने के साथ जोधपुर और जैसलमेर जाना पसंद करते है। मगर हरियाली के मामले में पिछड़ रहे जोधपुर के आने वाला समय चिंतनीय हो सकता है। इस तरफ प्रशासन को पूर्ण ध्यान देने की जरूरत है। क्या कहती है राष्ट्रीय वननीति: राष्ट्रीय वनीय नीति की बात मानें तो जोधपुर में इस समय 33 प्रतिशत भाग पर वनावरण होना चाहिए। मगर ऐसा नहीं है। जिस वर्गमीटर में यह फेला है उस हिसाब से इसका वनावरण काफी कम ही नहीं चिंता का भी विषय है। देखा जाएं तो जोधपुर शहर के विकास में नगर निगम और जोधपुर विकास प्राधिकरण का अहम रोल है। इन दो संस्थाओं के साथ ही अन्य सरकारी एजेंसियां मसलन शिक्षा विभाग, पीडब्लयूडी, पीएचईडी आदि भी है। शहरों के आधुनिकीकरण के साथ सडक़ों से हरे भरे वृक्ष काटे जाते है मगर बदले जो छायादार वृक्ष लगाए जाते है वे नगण्य है। सबसे बड़ी बात है फिर इनकी सारसंभाग खुद ये एजेंसियां तक नहीं कर पा रही। जोधपुर को हरियालीयुक्त बनाने के लिए कारगर कदमों का उठाना होगा। हिन्दुस्थान समाचार /सतीश/ ईश्वर-hindusthansamachar.in