सड़कों-राजमार्गों की बदलती तस्वीर
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सड़कों-राजमार्गों की बदलती तस्वीर

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योगेश कुमार गोयल केन्द्र में सत्तारूढ़ मोदी सरकार के सबसे बेहतरीन कार्य करने वाले मंत्रियों की सूची में केन्द्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग और एमएसएमई मंत्री नितिन गडकरी का नाम सबसे ऊपर है। उनके नेतृत्व में सड़क परिवहन मंत्रालय देश में कुशल परिवहन प्रणाली सहित सड़क दुर्घटनाओं को कम करने के लिए निरन्तर प्रयासरत है। सौर ऊर्जा परियोजना, जल प्रबंधन तथा कृषि क्षेत्र में कुछ न कुछ नवीनीकरण करते रहे गडकरी की छवि ऐसे इनोवेटिव मंत्री की रही है, जो आधुनिक तकनीकों के सहारे कुछ नया करने की कोशिशें करते रहते हैं। अपने ऐसे ही प्रयासों की बदौलत गडकरी सड़क दुर्घटनाओं में प्रतिवर्ष होने वाली करीब डेढ़ लाख मौतों को वर्ष 2030 के तय लक्ष्य से पांच साल पहले 2025 तक ही आधा कर लेने का भरोसा जता रहे हैं। देश का पहला सिक्स लेन कंक्रीट हाईस्पीड एक्सप्रेस वे (मुंबई-पुणे हाईवे) बनाने का श्रेय गडकरी को ही जाता है। कुछ वर्ष पूर्व जब उन्हें केन्द्र सरकार द्वारा ‘राष्ट्रीय ग्रामीण सड़क विकास कमेटी’ का अध्यक्ष नियुक्त किया गया था, तब उनके द्वारा प्रधानमंत्री को सौंपी गई रिपोर्ट के आधार पर करीब 60 हजार करोड़ रुपये की अनुमानित लागत से ‘प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना’ नामक परियोजना की शुरुआत की गई थी। गडकरी सड़क निर्माण की लागत को कम से कम 25 प्रतिशत कम करने और राजमार्गों के निर्माण में आधुनिक तथा हरित प्रौद्योगिकियों के उपयोग की आवश्यकता पर जोर देते रहे हैं। देश में चल रही कई महत्वपूर्ण सड़क परियोजनाओं के अलावा कुछ माह पूर्व ही उन्होंने हरियाणा में नए आर्थिक गलियारे से जुड़ी 20 हजार करोड़ रुपये की 11 नेशनल हाईवे परियोजनाओं का उद्घाटन करते हुए उनकी आधारशिला रखी थी। इन महत्वपूर्ण परियोजनाओं से समय, ईंधन और लागत की बचत होगी, साथ ही पिछड़े इलाकों में विकास को प्रोत्साहन मिलेगा। परियोजनाओं के पूरा होने के बाद बड़े शहरों में भीड़-भाड़ कम होगी और हरियाणा के साथ पंजाब, राजस्थान, दिल्ली तथा उत्तर प्रदेश जैसे अन्य राज्यों से सम्पर्क में सुधार होगा। यात्रा में लगने वाला समय इतना बचेगा कि फिलहाल चंडीगढ़ से दिल्ली हवाई अड्डे तक पहुंचने में जहां कम से कम चार घंटे का समय लगता है, वह घटकर मात्र दो घंटे रह जाएगा। इन परियोजनाओं को दो वर्षों के भीतर पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित है। वैकल्पिक ईंधन के उपयोग को बढ़ावा देने और सरकार के ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियान को मदद करने के उद्देश्य से इन दिनों वाहन कम्पनियों से देश में अलग-अलग ईंधन के उपयोग में दक्ष इंजन वाले वाहन बनाने का आग्रह किया जा रहा है। गौरतलब है कि वैकल्पिक ईंधन में इथेनॉल, मेथनॉल, जैव डीजल, विद्युत चालित वाहन, बायो सीएनजी इत्यादि आते हैं। गडकरी का कहना है कि यदि कार कम्पनियां बीएस-4 से सीधे बीएस-6 पर आ सकती हैं तो अमेरिका, ब्राजील और कनाडा की तर्ज पर अलग-अलग ईंधन के उपयोग में दक्ष इंजन (फ्लेक्स-फ्यूल इंजन) वाले वाहन भी पेश कर सकती हैं। वह कहते हैं कि बीएमडब्ल्यू, मर्सिडीज, हुंडई, होंडा, टोयोटा और सुजुकी अमेरिका, कनाडा और ब्राजील के बाजारों के लिए फ्लेक्स-फ्यूल इंजन वाले वाहनों का विनिर्माण कर सकती हैं तो वे इन्हें यहां क्यों नहीं शुरू करती? उनके मुताबिक वैकल्पिक ईंधन को बढ़ावा देने के लिए सरकार द्वारा 250 करोड़ रुपये से अधिक मूल्य वाली वाहन कम्पनियों को कुछ मानदंडों को पूरा करने पर खुद के पैट्रोल पंप खोलने की अनुमति देने का निर्णय लिया गया है लेकिन इन पंपों को हरित ईंधन की बिक्री भी करनी होगी। सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी के मुताबिक भारत में प्रतिवर्ष करीब पांच लाख सड़क दुर्घटनाएं होती हैं, जिनमें करीब डेढ़ लाख लोगों की मौत हो जाती है और तीन लाख व्यक्ति गंभीर रूप से घायल हो जाते हैं। उनके मुताबिक इन सड़क दुर्घटनाओं में होने वाली डेढ़ लाख मौतों में से करीब 53 हजार मौतें राजमार्गों पर ही होती हैं लेकिन मोटर वाहन (संशोधित) अधिनियम 2019 लागू होने के बाद सड़क दुर्घटनाओं में कमी आई है। उनका कहना है कि राष्ट्रीय राजमार्गों पर दुर्घटना वाले स्थानों पर दुर्घटना के कारणों की पहचान की जा चुकी है, जिन्हें दूर करने में भारत पहले ही 20 हजार करोड़ रुपये खर्च कर चुका है, इसीलिए उन्हें विश्वास है कि सड़क सुरक्षा की दिशा में किए जा रहे प्रयासों और पहलों से 2025 तक सड़क दुर्घटनाओं में मरने वालों की संख्या में 50 प्रतिशत तक कमी आएगी। राष्ट्रीय राजमार्गों से दुर्घटना वाली जगहों पर दुर्घटना के कारणों को दूर करने के लिए विश्व बैंक और एशियाई विकास बैंक (एडीबी) सात-सात हजार करोड़ रुपये प्रदान कर रहे हैं। सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी के अनुसार विश्व बैंक की सहायता से एक परियोजना को लागू करके तमिलनाडु राज्य तो सड़क दुर्घटनाओं में होने वाली मौतों को 25 प्रतिशत तक कम कर चुका है। इसी वर्ष अगस्त माह में जिओ-टैगिंग और वेब आधारित जीआईएस सक्षम निगरानी उपकरणों के माध्यम से राष्ट्रीय राजमार्गों के किनारे वृक्षारोपण की निगरानी के लिए ‘हरित पथ’ नामक एक मोबाइल एप लांच किया गया था। एनएचएआई द्वारा यह एप सभी वृक्षारोपण योजनाओं के तहत रोपे गए प्रत्येक वृक्ष के स्थान, वृद्धि, प्रजातियों के विवरण, रखरखाव गतिविधियों, लक्ष्यों और उपलब्धियों की निगरानी के लिए विकसित किया गया है। दरअसल सरकार का लक्ष्य है कि मार्च 2022 तक राजमार्गों के किनारे सौ फीसदी वृक्षारोपण के लक्ष्य को प्राप्त कर लिया जाए। पिछले दिनों अटल टनल को आम जनता के लिए खोले जाने के बाद अक्तूबर माह में कारगिल को कश्मीर से जोड़ने वाली सामरिक महत्व की 14.15 किलोमीटर लम्बी जोजिला टनल के निर्माण कार्य की शुरुआत भी की जा चुकी है। यह एशिया की दो दिशा वाली सबसे लंबी टनल होगी, जिसके पूरी हो जाने के बाद श्रीनगर, द्रास, कारगिल और लेह में सभी मौसम में कनेक्टिविटी रहेगी और लद्दाख की राजधानी लेह से श्रीनगर तक के सफर में तीन घंटे का समय बचेगा। सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय एक और महत्वपूर्ण ‘चार धाम प्रोजेक्ट’ पर भी कार्य कर रहा है, जो बहुत जल्द पूरा होने की उम्मीद है। इस प्रोजेक्ट के पूरा होने के बाद श्रद्धालुओं के लिए बद्रीनाथ, केदारनाथ, यमुनोत्री और गंगोत्री धाम जाने का मार्ग बेहद आसान और सुगम हो जाएगा। (लेखक स्वतंत्र टिप्पणीकार हैं।)-hindusthansamachar.in