स्वामी विवेकानंद के आदर्शों को दर्शाती है नई शिक्षा नीति : नायडू
स्वामी विवेकानंद के आदर्शों को दर्शाती है नई शिक्षा नीति : नायडू
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स्वामी विवेकानंद के आदर्शों को दर्शाती है नई शिक्षा नीति : नायडू

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नई दिल्ली, 10 सितम्बर (हि.स.)। उपराष्ट्रपति एम. वेंकैया नायडू ने गुरुवार को कहा कि नई शिक्षा नीति-2020 स्वामी विवेकानंद के आदर्शों को दर्शाती है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि नई शिक्षा नीति भारत को जनसांख्यिकीय लाभांश का एहसास करने और देश को 21 वीं सदी में एक ज्ञान और नवाचार केंद्र बनाने की सुविधा प्रदान करेगी। उपराष्ट्रपति गुरुवार को नई दिल्ली से ऑनलाइन माध्यम से रामकृष्ण मठ हैदराबाद के विवेकानंद इंस्टीट्यूट ऑफ ह्यूमन एक्सीलेंस (वीआईएचई) के 21 वें स्थापना दिवस समारोह को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि शिक्षा हमारे युवाओं की सोच को विकसित करने में मदद करती है। शिक्षा को हमारे बच्चों को हमारी प्राचीन सांस्कृतिक विरासत पर बहुत गर्व करने के लिए प्रोत्साहित करना चाहिए और उन्हें हमारे पुराने मूल्यों और नैतिकता के वैश्विक संदेश वाहक बनने के लिए तैयार करना चाहिए। उन्होंने स्कूली शिक्षा के शुरुआती वर्षों के दौरान अपनी मातृभाषा में बच्चों को पढ़ाने का भी आह्वान किया। उन्होंने कहा कि उत्कृष्टता को प्राप्त करना हमारी शिक्षा प्रणाली का एक अभिन्न अंग होना चाहिए और इसके लिए उसे हमारे शैक्षणिक संस्थानों की संस्कृति में शामिल किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि उत्कृष्टता अनिवार्य है और औसत दर्जे का विकल्प नहीं रह गया है। नायडू ने इस बात को रेखांकित किया कि उत्कृष्टता को पाने के लिए अनुशासन, एकाग्रचित और समर्पित प्रयास जरूरी है। उपराष्ट्रपति ने कहा कि एक राष्ट्र के रूप में हमारी यात्रा इस महत्वपूर्ण मोड़ पर है। 1893 में विश्व धर्म संसद में स्वामी विवेकानंद के संबोधन की 127 वीं वर्षगांठ की पूर्व संध्या पर नायडू ने कहा कि उन्हें शिकागो के ऐतिहासिक कला संस्थान में बोलने का सौभाग्य प्राप्त हुआ था। उन्होंने कहा कि स्वामी विवेकानंद ने दुनिया को वेदांत के प्राचीन भारतीय दर्शन के महत्व और सार्वभौमिकता, सहिष्णुता और स्वीकृति की भावना के बारे में बताया जो प्राचीन भारतीय विचारों को रेखांकित करता है। हिन्दुस्थान समाचार/सुशील/सुनीत-hindusthansamachar.in