सुप्रीम कोर्ट में लोन मोरेटोरियम मामले की सुनवाई 18 नवम्बर के लिए टली
सुप्रीम कोर्ट में लोन मोरेटोरियम मामले की सुनवाई 18 नवम्बर के लिए टली
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सुप्रीम कोर्ट में लोन मोरेटोरियम मामले की सुनवाई 18 नवम्बर के लिए टली

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नई दिल्ली, 05 नवम्बर (हि.स.)। सुप्रीम कोर्ट ने लोन मोरेटोरियम मामले की सुनवाई गुुरुवार को फिर टल गई। इस मामले पर अब 18 नवम्बर को सुनवाई होगी। आज सॉलिसीटर जनरल तुषार मेहता के दूसरे केस में व्यस्त होने के चलते सुनवाई नहीं हो सकी। आज इस मामले में याचिका दायर करने वाले वकील ने केंद्र और रिजर्व बैंक के जवाब पर संतोष जताते हुए सुप्रीम कोर्ट से इस मामले पर सुनवाई बंद करने का आग्रह किया। कोर्ट ने सुनवाई टालते हुए कहा कि अगली सुनवाई में अलग-अलग उद्योगों की मांग पर सुनवाई करेगा। उनका कहना है कि उनके लोन को भी रीस्ट्रक्चर किया जाना चाहिए। पिछले 3 नवम्बर को भी इस मामले पर सुनवाई टल गई थी। सुनवाई के दौरान रिजर्व बैंक ने बताया था कि उसने सभी बैंकों को 2 करोड़ तक के लोन पर चक्रवृद्धि ब्याज न लेने को कहा है। वसूला गया अतिरिक ब्याज लौटाने के लिए भी कहा है। पिछले 14 अक्टूबर को सुनवाई के दौरान कोर्ट ने दो करोड़ रुपये तक के लोन पर चक्रवृद्धि ब्याज माफ करने की प्रक्रिया शुरू न होने पर सुप्रीम कोर्ट ने असंतोष जताया था। कोर्ट ने केंद्र सरकार को 2 नवम्बर तक इसके लिए नोटिफिकेशन जारी करने का निर्देश दिया था। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि अच्छी बात है कि सरकार ने आम कर्जदारों की तकलीफ समझी, पर फैसला जल्द से जल्द लागू हो। पिछले हफ्ते सरकार ने हलफनामा दाखिल कर कहा था कि कोरोना महामारी में विभिन्न क्षेत्रों को ज्यादा राहत देना संभव नहीं है। सरकार ने कहा था कि कोर्ट को राजकोषीय नीति में हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए। सरकार ने कहा था कि दो करोड़ रुपये तक के कर्ज के लिए चक्रवृद्धि ब्याज माफ करने के अलावा कोई और राहत राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था और बैंकिंग क्षेत्र के लिए हानिकारक है। कोर्ट ने पिछले 3 सितम्बर को लोन के ईएमआई का भुगतान न होने के आधार पर किसी भी खाते को एनपीए घोषित नहीं करने का अंतरिम आदेश दिया था। सुनवाई के दौरान तुषार मेहता ने कहा था कि जब मोरेटोरियम योजना लाई गई तो मकसद यह था कि व्यापारी उपलब्ध पूंजी का ज़रूरी इस्तेमाल कर सकें। उन पर बैंक की किश्त का बोझ न हो। मकसद यह नहीं था कि ब्याज माफ कर दिया जाएगा। कोरोना के हालात का हर सेक्टर पर अलग-अलग असर पड़ा है। फार्मा, आईटी जैसे सेक्टर ने अच्छा प्रदर्शन भी किया है। तब कोर्ट ने पूछा था कि हमारे सामने सवाल यह रखा गया है कि आपदा राहत कानून के तहत क्या सरकार कुछ करेगी। हर सेक्टर को स्थिति के मुताबिक राहत दी जाएगी। हिन्दुस्थान समाचार/संजय/सुनीत-hindusthansamachar.in