सुदर्शन टीवी के कार्यक्रम के प्रसारण पर लगी रोक अगले आदेश तक बढ़ी
सुदर्शन टीवी के कार्यक्रम के प्रसारण पर लगी रोक अगले आदेश तक बढ़ी
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सुदर्शन टीवी के कार्यक्रम के प्रसारण पर लगी रोक अगले आदेश तक बढ़ी

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नई दिल्ली, 17 सितम्बर (हि.स.)। सुप्रीम कोर्ट ने सिविल सर्विसेज में मुस्लिम समुदाय के कथित घुसपैठ को लेकर प्रसारित होने वाले सुदर्शन टीवी के कार्यक्रम के प्रसारण पर लगी रोक को अगले आदेश तक बढ़ा दिया है। इस मामले पर विस्तृत सुनवाई शुक्रवार (18 सितंबर) को होगी। कोर्ट ने कहा कि अगर बेंच 18 सितंबर को नहीं बैठी तो 21 सितंबर को सुनवाई होगी। सुनवाई के दौरान सुदर्शन टीवी की ओर से वरिष्ठ वकील श्याम दीवान ने कहा कि उन्होंने अपना हलफनामा दाखिल कर दिया है। तब याचिकाकर्ता की ओर से वकील अनूप जी चौधरी ने कहा कि उन्हें हलफनामा आज दोपहर 12 बजे मिला है। उसमें कई सारी अप्रासंगिक चीजें हैं। तब श्याम दीवान ने कहा कि इतने कम समय में जवाब तैयार करना काफी मुश्किल काम है। दीवान ने कहा कि उन्हें भी थोड़ी देर पहले हलफनामा मिला है। आप 21 सितंबर को सुनवाई कीजिए या 18 सितंबर को कर लीजिए। सुनवाई के दौरान शादान फरासत ने कहा कि शो के सभी एपिसोड यूट्यूब पर उपलब्ध हैं। तब सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि आप पेन ड्राईव कोर्ट मास्टर को दे दीजिए। सुनवाई के दौरान जस्टिस केएम जोसेफ ने श्याम दीवान से पूछा कि आपका मुवक्किल कौन है। केबल आपरेटर या ब्राडकास्टर। उन्होंने कहा कि चैनल एयर वेब का इस्तेमाल करते हैं जो कि सार्वजनिक संपत्ति है। इसलिए उन्हें धारा 19(2) का पालन करना होगा। सुनवाई के दौरान प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया की ओर से वरिष्ठ वकील प्रीतेश कपूर ने सुप्रीम कोर्ट के इस रुख का समर्थन किया। केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में दाखिल हलफनामे में कहा है कि वो इलेक्ट्रॉनिक मीडिया को रेगुलेट करने के लिए नई गाइडलाइन बनाये जाने के सुप्रीम कोर्ट के रुख से सहमत नहीं है। केंद्र ने हलफनामे में कहा है कि टीवी मीडिया कंटेंट को लेकर पहले से नियम तय किए गए हैं। शिकायतों के निवारण के लिए नियामक संस्थाएं हैं। हरेक केस में तथ्यों के आधार पर फैसला लिया जाता है। केन्द्र ने कहा कि अगर कोर्ट फिर भी मीडिया कंटेंट को लेकर गाइडलाइंस बनाना चाहता है तो सबसे पहले नियम डिजिटल मीडिया के लिए बनाने जाने की ज़रूरत है जिसकी पहुँच अपने दर्शकों या पाठकों तक सोशल मीडिया के दौर में इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के मुकाबले कहीं ज़्यादा है। सुदर्शन टीवी ने अपने हलफनामे में कहा कि वो खोजी पत्रकारिता कर रही है। कोर्ट ने पिछले 15 सितंबर को सुदर्शन टीवी के कार्यक्रम पर गहरा ऐतराज जताया था। कोर्ट ने अगले आदेश तक इस कार्यक्रम के प्रसारण पर रोक लगा दिया था। कोर्ट ने कहा था कि मीडिया की स्वतंत्रता बेलगाम नहीं हो सकती, इसके लिए कुछ नियम बनाए जाने जरूरी हैं। कोर्ट ने कहा था कि देश के सुप्रीम कोर्ट होने के नाते हम यह कहने की इजाजत नहीं दे सकते हैं कि मुस्लिम सिविल सर्विसेज में घुसपैठ कर रहे हैं। आप ये नहीं कह सकते हैं कि पत्रकारों को ये करने की असीम शक्ति है। कोर्ट ने कहा था कि किसी विदेशी संगठन की कथित साजिश पर खबर चलाना अलग बात है, लेकिन पूरे समुदाय को साजिश में शामिल कैसे कह सकते हैं। कोर्ट ने इस कार्यक्रम को पहली नजर में विषैला और समाज में बंटवारा करनेवाला कहा था। वहीं चैनल के वकील ने इसे खोजपरक पत्रकारिता बताया था। सुनवाई के दौरान जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ ने कहा था कि यूपीएससी की परीक्षा की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े करते हैं। क्या इससे ज्यादा आपत्तिजनक कुछ हो सकता है। जस्टिस केएम जोसेफ ने कहा था कि मीडिया को उतनी ही आजादी हासिल है जितनी देश के दूसरे नागरिकों को। मीडिया की आजादी बेलगाम नहीं हो सकती है। आप टीवी डिबेट का तरीका देखिए। एंकर उन गेस्ट को म्युट कर देते हैं जिनकी राय उनसे अलग होती है, सिर्फ एंकर ही बोलते रहते हैं। हिन्दुस्थान समाचार / संजय-hindusthansamachar.in