सिब्बल का केंद्र पर तंज, पिछले कुछ साल में बदली लोकतंत्र की परिभाषा

सिब्बल का केंद्र पर तंज, पिछले कुछ साल में बदली लोकतंत्र की परिभाषा
सिब्बल का केंद्र पर तंज, पिछले कुछ साल में बदली लोकतंत्र की परिभाषा

नई दिल्ली, 25 जुलाई (हि.स.)। राजस्थान में जारी सियासी उठापटक के बीच कांग्रेस नेता कपिल सिब्बल ने केंद्र सरकार को निशाने पर लेते हुए कहा है कि मौजूदा समय में लोकतंत्र की नई परिभाषा गढ़ी जा रही है। राज्यपाल की शक्ति का प्रयोग पार्टी अथवा व्यक्ति विशेष द्वारा किया जा रहा है। उन्होंने सवालिया लहजे में कहा कि सरकार जो कहे वो सभी को मान लेना चाहिए, कोई विरोध नहीं होना चाहिए- अगर यही लोकतंत्र की परिभाषा है, तो क्यों संस्थाएं काम कर रही हैं? क्या जरूरत है संस्थाओं को काम करने की? वरिष्ठ कांग्रेस नेता कपिल सिब्बल ने वीडियो लिंक के जरिए संवाददाताओं से कहा, ‘‘लोकतंत्र की नई परिभाषा गढ़ी जा रही है। अब राज्यपाल लोकतंत्र के रक्षक नहीं रहे, बल्कि वे केंद्र की सत्ता के रक्षक हैं।’’ उन्होंने राजस्थान हाई कोर्ट के फैसले की पृष्ठभूमि में दावा किया कि इन दिनों सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का हाई कोर्ट में अनुशरण नहीं हो रहा है। सिब्बल ने सवाल उठाया कि जब हाई कोर्ट सुप्रीम कोर्ट के फैसले नहीं मानेगा, गर्वनर संविधान-कानून नहीं मानेंगे, संस्थाएं केवल शासक जो कहेगा वही करेंगी, तो फिर लोकतंत्र कैसे बचेगा? उन्होंने कहा कि ये संविधान की बात है, संविधान की मर्यादा की बात है। इसमें सुप्रीम कोर्ट के निर्णय भी हैं, जिसमें यह साफ कहा गया है कि गवर्नर इस बात में देरी नहीं कर सकता। यह गवर्नर साहब का कर्तव्य है। हिन्दुस्थान समाचार/आकाश/बच्चन-hindusthansamachar.in

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