संशोधित :  किसान हितैषी मध्य प्रदेश सरकार में किसानों का शोषण, आन्‍दोलन की राह पकड़ेगा भारतीय किसान संघ
संशोधित : किसान हितैषी मध्य प्रदेश सरकार में किसानों का शोषण, आन्‍दोलन की राह पकड़ेगा भारतीय किसान संघ
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संशोधित : किसान हितैषी मध्य प्रदेश सरकार में किसानों का शोषण, आन्‍दोलन की राह पकड़ेगा भारतीय किसान संघ

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-नोट : हेडिंग में संशोधन के साथ पुन: प्रेषित भोपाल, 05 नवम्बर (हि.स.)। मध्य प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी की शिवराज सरकार को किसानों की सरकार माना जाता है, बहुत हद तक यह सच भी दिखाई देता है। मुख्यमंत्री स्वयं एक कृषक हैं और संयोग से इस वक्त जो प्रदेश के कृषि मंत्री हैं वे भी किसान हैं। इसके बावजूद इस समय में किसानों का शोषण थमने का नाम नहीं ले रहा है । चने के बाद जब मक्का फसल का समर्थन मूल्य खरीदी को लेकर मध्य प्रदेश सरकार ने मक्का उपज का पंजीयन नहीं करवाया तो जैसे राज्य में व्यापारियों के चहरे मुस्कुरा उठे, लेकिन इससे किसानों का बुरा हाल हो गया है। मध्य प्रदेश में इस कारण से छोटी जोत के किसान अपनी फसल कम दामों पर बेचने पर विवश हो गए हैं, जिसका कि पूरा लाभ व्यापारी वर्ग उठा रहा है। इसको लेकर अब भारतीय किसान संघ ने भी अपना विरोध करना शुरू कर दिया है। किसान संघ आगामी सप्ताह भर और इंतजार करेगा, यदि सरकार की तरफ से शीघ्र कोई निर्णय नहीं हुआ तो वह आन्दोलन की राह पकड़ सड़कों पर उतर पड़ेगा। दरअसल, प्रदेश के किसानों को लगातार हो रहे आर्थिक नुक़सान को देखते हुए भारतीय किसान संघ भाजपा सरकार के ख़िलाफ़ प्रदेश व्यापी आंदोलन करने की योजना बना रहा है। फ़िलहाल इस मामले को लेकर किसान संघ के प्रदेश अध्यक्ष व महामंत्री व अन्य पदाधिकारियों की बातचीत सरकार के प्रतिनिधियों से चल रही है, जिसमें कि अब तक आश्वासन के बाद आश्वासन ही दिए जा रहे हैं। इस तरह बार-बार आश्वासन दिए जाने से नाराज़ होकर आखिरकार भारतीय किसान संघ ने मध्य प्रदेश में आंदोलन की योजना बनाना शुरू कर दिया है। मक्का उपज का भाव 1000 से 1300 रुपये प्रति क्विंटल मिल रहा वर्तमान में मक्का उपज का भाव 1000 से 1300 रुपये प्रति क्विंटल मिल रहा है जबकि केंद्र सरकार ने मक्का का प्रति क्विंटल लागत मूल्य 1213 रुपये तथा समर्थन मूल्य 1850 प्रति क्विंटल तय किया है लेकिन पंजीयन न होने से किसानों को कम भाव में ही उपज बेचकर नुकसान उठाना पड़ रहा है। स्थिति यह आ गई है कि किसानों को लागत मूल्य भी नहीं मिल पा रहा है। आगामी दीपावली त्योहार को देखते हुए और गेहूं चने की बोनी के चलते किसान मजबूरी में कम भाव में अपनी मक्का उपज बेच रहे हैं। इसी प्रकार तत्काल रुपयों की व्यवस्था बनाने के लिए भी छोटी जोत के किसान अपनी फसल बेचने को मजबूर हैं। इस पूरे मामले को लेकर किसान संघ के प्रदेश अध्यक्ष रामभरोसे बासोतिया ने कहा कि किसानों को उनका सही भाव मिलना चाहिए, इसे लेकर हम लगातार सरकार से बातचीत कर रहे हैं और हमें मुख्यमंत्री शिवराज सिंह के द्वारा यह आश्वासन भी दिया गया है कि इस पर विचार करके किसानों के हित में जल्द ही निर्णय लिया जाएगा। किसानों का कहीं से भी प्रदेश सरकार अहित नहीं होने देगी, सभी चिंता सरकार करेगी। इसके बावजूद अब तक इस मामले को लेकर कोई निर्णय सरकार की ओर से सामने नहीं आया है। अभी इस विषय को लेकर कृषि मंत्री से भी बातचीत चल रही है । इस सप्ताह यदि सरकार कोई निर्णय नहीं लेती तो मजबूरन भारतीय किसान संघ सड़कों पर उतरेगा उन्होंने कहा कि इस सप्ताह में यदि सरकार कोई निर्णय नहीं लेती है तो मजबूरन भारतीय किसान संघ को सड़कों पर उतरना पड़ेगा और आंदोलन की राह पकड़ कर अपनी माँग मनवाने के लिए विवश होना पड़ेगा। उन्होंने 'हिन्दुस्थान समाचार एजेंसी' को बताया कि पहले भी चने की फ़सल को लेकर इसी प्रकार का मामला सामने आया था, तब व्यापारियों ने समर्थन मूल्य सरकार द्वारा घोषित नहीं किए जाने का लाभ उठाकर किसानों की फ़सल औने पौने दामों पर ख़रीदना शुरू कर दिया था। किसान भी मजबूरी में कम क़ीमत पर अपनी फ़सल बेच रहे थे लेकिन जब हमने उस समय भी सड़क पर आने की योजना बनायी और दूसरी तरफ़ व्यापारियों से बातचीत की तो उसका सुखद परिणाम सामने आया था । किसानों को चने का सही भाव मिलना शुरू हो गया था। इसी तरह से हमारा मक्का उपज को लेकर भी सीधा मानना है कि किसानों को इसका उचित दाम मिले, यदि सरकार की तरफ़ से इस सप्ताह में कोई निर्णय नहीं लिया जाता तो भारतीय किसान संघ आंदोलन की राह पर जाएगा । किसानों को समर्थन मूल्य के हिसाब से घाटा पूर्ति की जानी चाहिए भारतीय किसान संघ के प्रदेश महामंत्री चंद्रभान सिंह ने 'हिन्दुस्थान समाचार एजेंसी' से कहा है कि त्योहारी सीजन होने से इस समय कृषि उपज मंडियों में मक्का उपज की बेहतर आवक हो रही है। कम भाव पर मक्का उपज बेचने का एक कारण यह भी है कि किसानों के पास मक्का भंडारण की व्यवस्था नहीं है। भारतीय किसान संघ सरकार से यह मांग करता है कि किसानों को समर्थन मूल्य के हिसाब से घाटा पूर्ति की जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि वर्तमान में अधिकतम भाव 1300 रुपये प्रति क्विंटल के लगभग है जो नमी पर निर्भर करता है। जबकि पिछले साल 1600 से 1800 रुपये क्विंटल तक मक्का बिका है, इसलिए हमारा सीधे तौर पर कहना है कि खरीदी का प्रति क्विंटल का जो अंतर शेष है, उसकी भरपाई सरकार करे। यदि इस वर्ष भावांतर योजना या समर्थन मूल्य खरीदी के लिए मध्य प्रदेश सरकार ने मक्का उपज का पंजीयन नहीं करवाया अथवा अपने स्तर पर किसानों के हित में इस मामले को लेकर निर्णय शीघ्र नहीं किया तो भारतीय किसान संघ आन्दोलन करेगा। हिन्दुस्थान समाचार/डॉ. मयंक चतुर्वेदी/रामानुज-hindusthansamachar.in