शिक्षाविदों ने दी हिन्दी लेखन में किसी भी प्रचलित भाषा के शब्दों के प्रयोग की सलाह
शिक्षाविदों ने दी हिन्दी लेखन में किसी भी प्रचलित भाषा के शब्दों के प्रयोग की सलाह
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शिक्षाविदों ने दी हिन्दी लेखन में किसी भी प्रचलित भाषा के शब्दों के प्रयोग की सलाह

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नई दिल्ली, 17 सितम्बर (हि.स.)। शिक्षाविदों ने गुरुवार को हिन्दी लेखन में किसी भी प्रचलित भाषा के शब्दों के प्रयोग की सलाह देते हुए कहा कि हिन्दी लिखने में गर्व महसूस किया जाना चाहिए। शिक्षा मंत्रालय 8 से 25 सितम्बर के दौरान ‘‘शिक्षक पर्व’’ का आयोजन कर रहा है। इसी कड़ी में आज ‘हिन्दी का सौंदर्य’ विषय पर वेबिनार के माध्यम से एक परिचर्चा की गई। परिचर्चा में अतिथि वक्ता के रूप में महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिन्दी विश्वविद्यालय (वर्धा) के पूर्व कुलपति प्रो. गिरीश्वर मिश्र, पूर्व संयुक्त निदेशक (रा.भा.) प्रेम सिंह तथा एनसीईआरटी की समग्र शाला भाषा कार्यक्रम समन्वयक प्रो. उषा शर्मा सम्मिलित रहीं। इस चर्चा में प्रो. गिरीश्वर मिश्र ने सौंदर्य को हर क्षण नवीनता के साथ जोड़ते हुए हिन्दी भाषा के सौंदर्य की बात की। उन्होंने बताया कि हिन्दी भाषा प्रेम की भाषा है जिसनेसबको आकर्षित किया है और सबको जोड़ा है।श्री प्रेम सिंह ने चर्चा को आगे बढ़ाते हुए इस बात पर बल दिया कि किसी भी भाषा के प्रचिलित शब्दों का प्रयोग करते हुए हिन्दी लिखी जाए, हिन्दी लिखने में गर्व महसूस किया जाए और हिन्दी के प्रयोग के लिए सकारात्मक सोच रखी जाए। प्रो. उषा शर्मा ने हिन्दी भाषा के सौंदर्य की बात करते हुए कहा किसौंदर्य उसी चीज़ में नज़र आता है जिससे दिल धड़कता है। भाषा आनंदित करे यही उसका सौंदर्य है। कार्यक्रम की संचालक मंत्रालय की निदेशक (रा.भा.) सुनीति शर्मा ने राजभाषा नीति संबंधी प्रावधानों पर चर्चा करते हुए आग्रह किया कि केंद्र सरकार के समस्त कामकाज में राजभाषा नियम, अधिनियम व आदेशों का पालन किया जाए। वह शिक्षा मंत्रालय के दोनों विभागों तथा इसके अंतर्गत आने वाले देश भर के सभी कार्यालयों, संस्थानों व विश्वविद्यालयों में राजभाषा नीति के कार्यान्वयन का कार्य देख रही हैं। हिन्दुस्थान समाचार/सुशील/सुनीत-hindusthansamachar.in