शिक्षण संस्थानों का बहुआयामी होना जरूरी: डॉ निशंक
शिक्षण संस्थानों का बहुआयामी होना जरूरी: डॉ निशंक
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शिक्षण संस्थानों का बहुआयामी होना जरूरी: डॉ निशंक

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- आईआईटी खड़गपुर में नए छात्रावासों एवं अंतरराष्ट्रीय अतिथि आवासीय परिसर का शिलान्यास नई दिल्ली, 15 अक्टूबर (हि.स.)। केंद्रीय शिक्षा मंत्री डॉ. रमेश पोखरियाल निशंक ने शिक्षण संस्थानों के बहुआयामी होने की जरूरत पर बल देते हुए कहा कि प्रौद्योगिकी संस्थान को कला, मानविकी, सांस्कृतिक तथा सामाजिक जिम्मेदारियों से जुड़ी गतिविधियों में भी आगे बढ़ना चाहिए। निशंक गुरुवार को वीडियो कॉन्फ़्रेंसिंग के माध्यम से भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) खड़गपुर में नए छात्रावासों एवं अंतरराष्ट्रीय अतिथि आवासीय परिसर का शिलान्यास कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। इस दिशा में आईआईटी खड़गपुर के प्रयासों की सराहना करते हुए उन्होंने कहा कि अध्यापन के लिए ई-क्लासरूम सॉफ्टवेयर- ‘दीक्षक’, गांधीपीडिया, पी-3 सर्जिकल मास्क हेतु स्टार्टअप का विकास, कम लागत के पॉलीअनसैचुरेटेड, एंटीऑक्सीडेंट युक्त ‘वनस्पति तेल पाउडर’ तथा किसानों को सलाह एवं मार्गदर्शन देने के लिए ‘ग्रामीण कृषि मौसम सेवा’ को आरंभ कर नित्य नए कीर्तिमान स्थापित कर रहा है। केंद्रीय मंत्री ने पूर्व राष्ट्रपति डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम को याद करते हुए कहा कि कलाम की जयंती पर अंतरराष्ट्रीय अतिथि आवासीय परिसर का उद्घाटन करना बड़े हर्ष का विषय है। इसके साथ ही सावित्रीबाई फुले जैसी प्रेरक व्यक्तित्व के नाम तथा सर्वप्रिय, सर्वमान्य भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी के नाम पर छात्रावासों का शिलान्यास इस खुशी को दोगुना कर देते हैं। निशंक ने संस्थान के पूर्व छात्रों एवं एलुमनाई की सफलता के बारे में बात करते हुए कहा कि किसी भी संस्थान का सम्मान, उसका गौरव उसके छात्रों व एलुमनाई की सफलता और उनके कीर्तिमानों पर भी निर्भर करता है। सुंदर पिचाई, डी सुब्बाराव, अर्जुन मल्होत्रा, हरीश हांडे, मणिलाल भौमिक, किरीट पारिख जैसे तमाम नाम आईआईटी खड़गपुर से जुड़े हुए हैं जिनके माध्यम से इस संस्थान ने विज्ञान, तकनीक, कला, संस्कृति, अर्थव्यवस्था तथा जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में अपनी पहचान को स्थापित किया है। नई शिक्षा नीति में उच्च शिक्षा के लिए प्रावधानों के बारे में भी बात करते हुए उन्होंने कहा कि नई शिक्षा नीति के माध्यम से ब्रांडेड शिक्षा के लिए भारत एक बार फिर तैयार है। उन्होनें सभी का आह्वान करते हुए कहा, इस नीति के सफल कार्यान्वयन के लिए संस्थानों को अपने नेशनल तथा इंटरनेशनल ब्रांड एलुमनाई का एक नेटवर्क तथा टास्क फोर्स बनाना चाहिए। हम सभी को एक प्लेटफार्म देंगे और बदले में आप अपने अनुभव, अपने एक्सपर्टीज, अपने ज्ञान, अपनी विद्या का दान कीजिये। आप सभी शिक्षा नीति के अहम हिस्सा और ब्रांड एंबेसडर हैं। इस अवसर पर केंद्रीय शिक्षा राज्य मंत्री संजय धोत्रे, आईआईटी खड़गपुर के निदेशक प्रो. वीके तिवारी, उपनिदेशक प्रो. एस के भट्टाचार्य, प्रो. खनीन्द्र पाठक, प्रो. सोमेश कुमार, प्रो देबाशीष, प्रो. देसाई, तमाल नाथ, तथा संकाय के अन्य सदस्य, स्टाफ एवं छात्र सोशल मीडिया पर लाइव स्ट्रीमिंग के माध्यम से इस कार्यक्रम से जुड़े। हिन्दुस्थान समाचार/सुशील/सुनीत-hindusthansamachar.in