विवादित बयानबाजी को लेकर पहले भी निशाने पर रहे हैं शशि थरूर
विवादित बयानबाजी को लेकर पहले भी निशाने पर रहे हैं शशि थरूर
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विवादित बयानबाजी को लेकर पहले भी निशाने पर रहे हैं शशि थरूर

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आकाश राय नई दिल्ली, 18 अक्टूबर (हि.स.)। कोविड-19 महामारी को लेकर केंद्र की मोदी सरकार को विफल बताने तथा लॉकडाउन के दौरान देश के मुसलमानों से भेदभाव का आरोप लगाने वाले कांग्रेस नेता शशि थरूर एक बार फिर अपने बयान को लेकर सुर्खियों में हैं। यह पहली बार नहीं है जब थरूर अपनी टिप्पणी या बयान को लेकर भाजपा के निशाने पर हैं। दरअसल, बीते दो साल में ही कई ऐसे मौके रहे हैं जब शशि थरूर अपनी विवादित बयानबाजी को लेकर आलोचना के शिकार हो चुके हैं। जुलाई 2018 में उन्होंने कहा था कि वर्ष 2019 में जब नरेन्द्र मोदी दोबारा सत्ता में आएंगे तो देश ‘हिन्दू-पाकिस्तान’ बन जाएगा। इसके बाद वर्ष 2018 के अक्टूबर माह में उन्होंने एक और टिप्पणी की जिसमें उन्होंने कहा कि अच्छा हिंदू नहीं चाहेगा कि विवादित ढांचा गिराकर वहां राम मंदिर बने। शशि थरूर यहीं नहीं रुके उन्होंने एक बार फिर 28 अक्टूबर, 2018 को पीएम मोदी की तुलना शिवलिंग पर बैठे बिच्छू से करने पर चर्चा में रहे। उन्होंने नरेन्द्र मोदी की तुलना शिवलिंग पर बैठे बिच्छी से करते हुए कहा कि इसे न तो हाथ से हटाया जा सकता है और न ही चप्पल से मारा जा सकता है। इसके बाद वर्ष 2019 की शुरुआत में शशि थरूर ने उत्तर प्रदेश के वर्तमान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की प्रयागराज में होने वाली कैबिनेट बैठक को लेकर टिप्पणी की। उन्होंने योगी सरकार पर निशाना साधते हुए कहा था कि ‘गंगा भी स्वच्छ रखनी है और पाप भी यहीं धोने हैं। इस संगम में सब नंगे हैं। जय गंगा मैया की।’ इसके बाद 31 जनवरी 2019 को उन्होंने एक बार फिर कहा कि “हिंदी, हिंदू, हिंदुत्व की विचारधारा देश को बांट रही है। ऐसे में हमें एकता की जरूरत है ना कि समानता की।” हिन्दुस्थान समाचार-hindusthansamachar.in