लखनऊ-गाजियाबाद में अब बिना जटिलता वाले कोरोना मरीज होटल में रहकर करा सकेंगे इलाज
लखनऊ-गाजियाबाद में अब बिना जटिलता वाले कोरोना मरीज होटल में रहकर करा सकेंगे इलाज
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लखनऊ-गाजियाबाद में अब बिना जटिलता वाले कोरोना मरीज होटल में रहकर करा सकेंगे इलाज

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- प्रदेश के अन्य शहरों में भी जल्द इस सुविधा का मिलेगा लाभ - संक्रमण प्रसार के खतरे को देखकर होम आइसोलेशन की इजाजत नहीं देगी सरकार लखनऊ, 17 जुलाई (हि.स.)। प्रदेश में कोरोना के तेजी से बढ़ रहे संक्रमण के बीच हल्के लक्षण वाले मरीजों को घरेलू एकांतवास (होम क्वारंटाइन) में रखने की मांग के बीच योगी सरकार ने साफ किया है कि वह अभी होम आइसोलेशन की इजाजत नहीं देगी, क्योंकि इससे मरीजों की लापरवाही के कारण अन्य लोगों में भी संक्रमण का खतरा रहेगा। हालांकि बिना जटिलता वाले मरीजों को लखनऊ और गाजियाबाद में चिह्नित होटलों में रहने की इजाजत अब मिल सकेगी। राज्य के अपर मुख्य सचिव, स्वास्थ्य अमित मोहन प्रसाद ने शुक्रवार को बताया कि अभी तक होम आइसोलेशन की इजाजत नहीं है, जो सोची समझी नीति है। जो लोग बिना लक्षण वाले हैं, वह भी संक्रमण फैलाते हैं। इसलिए अगर ऐसे लोग घर में आइसोलेशन में रखे जाएंगे और वह बाहर निकलते हैं तो दूसरों के भी संक्रमित होने का खतरा बना रहेगा। इसलिए हर व्यक्ति को हम प्रदेश में ही फैसिलिटी में ही आइसोलेट करते हैं। उन्होंने कहा कि कुछ लोगों द्वारा भुगतान करके लगातार बेहतर सुविधा के लिए अनुरोध किया जा रहा है। इसलिए अब सरकार ने बिना जटिलता वाले मरीजों के लिए सुलभ और सस्ता विकल्प मुहैया कराने का निर्णय किया है। इसके तहत दो शहरों लखनऊ और गाजियाबाद में इसे प्रारम्भ किया जा रहा है। इसके बाद अन्य शहरों में भी इसे शुरू किया जाएगा। इसके अन्तर्गत जिला प्रशासन किसी होटल का अधिग्रहण कर सकेगा। वर्तमान में लखनऊ और गाजियाबाद दो शहरों के लिए होटल का जो प्रस्ताव आया है, जिसमें डबल बेड वाले कमरे के लिए 2,000 के लिए रुपये प्रतिदिन देने होंगे। इसमें चिकित्सीय व्यवस्था राज्य सरकार की ओर से दी जाएगी, जिसमें डॉक्टर, नर्स, पैरामेडिकल टीम लगाई जाएगी। इसके लिए प्रतीकात्मक रूप से एकमुश्त 2,000 रुपये लिए जाएंगे। इस तरह जो एसिम्पटोमैटिक या माइल्ड लक्षण वाले मरीज अलग से शौचालय, टीवी आदि की सुविधा चाहते हैं, वह इसका इस्तेमाल कर सकते हैं। हालांकि यह सुविधा वैकल्पिक है और जो इसे लेना चाहते हैं, उन्हीं के लिए है। बाकी सरकार अपने स्तर पर सभी का नि:शुल्क इलाज कर रही हैं। राज्य के एल-1, एल-2 और एल-3 कोविड अस्पतालों में 1,51,000 बेड उपलब्ध हैं। वहीं इस सुविधा का लाभ बुजुर्ग, पहले से किसी बीमारी से ग्रसित लोग, गर्भवती स्त्री और बच्चों को नहीं मिल सकेगा। ऐसे लोगों को अस्पताल में ही रहना होगा, क्योंकि इन पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता होती है। अपर मुख्य सचिव, स्वास्थ्य ने बताया कि इसके साथ ही अगर कोई निजी चिकित्सालय अपने पूरे अस्पताल को कोविड चिकित्सालय या किसी ब्लॉक को कोविड ब्लॉक के रूप में बनाकर मरीजों को भर्ती कर इलाज करना चाहता है, तो उसके लिए भी दरें निर्धारित हैं। इस आधार पर कुछ निजी चिकित्सालय राज्य में कोविड अस्पतालों के रूप में संचालित भी किए जा रहे हैं। उल्लेखनीय है कि समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने मांग की है कि हल्के लक्षण वाले मरीजों को घर पर ही क्वारंटाइन होने की अनुमति देनी चाहिए, जिससे गंभीर मरीजों के लिए अस्पताल में जगह कम न पड़े। समाजवादी पार्टी सीमित संसाधनों का हवाला देते हुए लगातार ये मांग कर रही है। इस पर राज्य सरकार की ओर आज अपने फैसले और नई व्यवस्था को लेकर स्थिति स्पष्ट की गई है। हिन्दुस्थान समाचार/संजय/राजेश/बच्चन-hindusthansamachar.in