लक्ष्मी विलास पैलेस विनिवेश मामले में गिरफ्तारी का संकट टला
लक्ष्मी विलास पैलेस विनिवेश मामले में गिरफ्तारी का संकट टला
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लक्ष्मी विलास पैलेस विनिवेश मामले में गिरफ्तारी का संकट टला

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- हाईकोर्ट ने गैर जमानती वारंट को जमानती वारंट में बदला जोधपुर, 22 सितम्बर (हि.स.)। उदयपुर की प्रसिद्ध लक्ष्मी विलास पैलेस होटल के विनिवेश के मामले में भारत होटल्स लिमिटेड की प्रबंध निदेशक ज्योत्सना सूरी, विनिवेश मंत्रालय के पूर्व सचिव प्रदीप बैजल व लाजार्ड इंडिया लिमिटेड नई दिल्ली के तत्कालीन प्रबंध निदेशक आशीष गुहा की याचिकाओं पर मंगलवार को राजस्थान हाईकोर्ट में सुनवाई हुई। राजस्थान हाईकोर्ट के न्यायाधीश दिनेश मेहता ने सीबीआई कोर्ट के आदेश पर अंतरिम रोक लगा दी है। हाईकोर्ट के अंतरिम आदेश से अब इन आरोपियों पर गिरफ्तारी का संकट भी टल गया है। हाईकोर्ट ने इन आरोपियों के विरूद्ध सीबीआई कोर्ट की ओर से जारी किए गए गैर जमानती वारंट को जमानती वारंट तब्दील कर दिया है। साथ ही लक्ष्मी विलास पैलेस होटल को सीज करने के आदेश पर रोक लगा दी है। पूर्व केंद्रीय मंत्री अरुण शौरी की याचिकाएं रजिस्टर्ड नहीं होने की वजह से उन पर सुनवाई नहीं हो पाई, हालांकि शौरी की ओर से सुनवाई करने का आग्रह किया, लेकिन कोर्ट ने सुनवाई से इनकार कर दिया। भारत होटल्स लिमिटेड की प्रबंध निदेशक ज्योत्सना की ओर से सुप्रीम कोर्ट के वकील हरीश साल्वे व राजस्थान हाईकोर्ट के अधिवक्ता उमेश कांत व्यास ने पैरवी की। साल्वे फिलहाल लंदन में है और वहां से वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए वे सुनवाई में शामिल हुए। उन्होंने दलील दी कि सीबीआई कोर्ट के आदेश में बहुत बड़ी त्रुटि है। साल्वे ने कहा कि कोर्ट का आदेश सीबीआई द्वारा जांच के दौरान जुटाए साक्ष्य व रिकॉर्ड के बिल्कुल विपरीत है।सीबीआई द्वारा केस को बंद करने के लिए लगातार दो बार पेश की गई रिपोर्ट को अनदेखा किया गया है। इस तरह अधीनस्थ कोर्ट द्वारा जो फाइडिंग रिकॉर्ड की गई है, वह पूरी तरह से गलत है तथा स्पष्ट रूप से अपने क्षेत्राधिकार के बाहर जाकर यह आदेश दिया है। इसलिए इसमें हाईकोर्ट का हस्तक्षेप करना जरूरी है। उन्होंने कहा कि सीबीआई द्वारा 13 अगस्त 2019 को पेश की गई फाइनल रिपोर्ट में स्पष्ट उल्लेख किया गया है, कि इस मामले में अभियोजन पक्ष के पास कोई साक्ष्य नहीं हैं। सीबीआई कोर्ट ने उसे अस्वीकार करते हुए जांच करने के आदेश दिए। इसके बाद जांच कर 5 जून 20 को सीबीआई ने फिर इसमें पूरक फाइनल रिपोर्ट पेश की और केस बंद करने का आग्रह किया। इसके बावजूद उसे स्वीकार नहीं कर याचिकाकर्ता के खिलाफ क्रिमिनल केस दर्ज करने तथा गिरफ्तारी वारंट से उपस्थित करने के आदेश दिए, जो कि पूरी तरह से विधि विरूद्ध है। यह था मामला सीबीआई कोर्ट ने गत 15 सितम्बर को प्रसंज्ञान लेते हुए सीबीआई कोर्ट की क्लोजर रिपोर्ट को स्वीकार करने से इनकार कर दिया था तथा 252 करोड़ रुपए के लक्ष्मी विलास पैलेस होटल को महज 7.50 करोड़ रुपए में बेचकर सरकार को 244 करोड़ रुपए का नुकसान पहुंचाने के मामले में पूर्व केंद्रीय मंत्री अरुण शौरी, भारत होटल्स लिमिटेड की प्रबंध निदेशक ज्योत्सना सूरी, पूर्व आईएएस अफसर प्रदीप बैजल, आशीष गुहा व कांतिलाल कर्मसे के खिलाफ आपराधिक मुकदमा दर्ज करने के आदेश दिए थे। इसके अलावा इन सभी गिरफ्तारी वारंट से तलब भी किया गया था। सीबीआई का आदेश आते ही हडक़ंप मच गया। कोर्ट के आदेश के बाद उदयपुर कलेक्टर ने होटल को अपने पजेशन में ले लिया और संपत्ति का सत्यापन का काम चल रहा है। हिन्दुस्थान समाचार/सतीश/ईश्वर/सुनीत-hindusthansamachar.in