योगी सरकार के साढ़े तीन साल में हर दिन हुए महत्वपूर्ण निर्णय: पर्यटन मंत्री
योगी सरकार के साढ़े तीन साल में हर दिन हुए महत्वपूर्ण निर्णय: पर्यटन मंत्री
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योगी सरकार के साढ़े तीन साल में हर दिन हुए महत्वपूर्ण निर्णय: पर्यटन मंत्री

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- पूर्ववर्ती सरकारों में उपेक्षा के शिकार रहे संस्कृति और पर्यटन के केन्द्र: डॉ. नीलकंठ तिवारी - अयोध्या को विश्व की सबसे सुंदर नगरी बनाने की परियोजना पर हो रहा काम लखनऊ, 15 सितम्बर (हि.स.)। उत्तर प्रदेश की योगी सरकार अपने कार्यकाल के साढ़े तीन साल पूरा करने जा रही है। करीब 18 महीने बाद प्रदेश में विधानसभा का चुनाव है। उस समय जनता अपने जनप्रतिनिधियों का लेखा-जोखा तलब करेगी। देश की एकमात्र बहुभाषी न्यूज एजेंसी हिन्दुस्थान समाचार ने राज्य सरकार के साढ़े तीन साल को लेकर प्रदेश के सभी विधायकों से उनके क्षेत्र के विकास कार्यों पर संवाद का एक अभियान चलाया है। इसी क्रम में हिन्दुस्थान समाचार के राज्य ब्यूरो प्रमुख राजेश तिवारी ने वाराणसी दक्षिणी विधानसभा क्षेत्र के विधायक एवं प्रदेश के पर्यटन, संस्कृति एवं धर्मार्थ कार्य मंत्री डा. नीलकंठ तिवारी से साढ़े तीन साल में किये गये कार्यों और विभिन्न योजनाओं के संबंध में विस्तृत वार्ता की। इस दौरान मंत्री ने सभी सवालों का बेबाकी से जवाब दिया। कहा कि योगी सरकार में कार्य संस्कृति में बदलाव हुआ है। इस सरकार में साढ़े तीन साल के अंदर जनता के हित में प्रतिदिन कोई न कोई बड़ा निर्णय लिया गया। मुख्यमंत्री योगी के नेतृत्व में आज उत्तर प्रदेश हर प्रश्न का उत्तर देने में सक्षम हो गया है। कोरोना संकट को भी योगी सरकार ने अवसर में तब्दील करने में सफलता प्राप्त की है। प्रस्तुत है बातचीत के प्रमुख अंश... सवाल - आप पर्यटन, संस्कृति एवं धर्मार्थ कार्य जैसे महत्वपूर्ण विभागों के स्वतंत्र प्रभार वाले मंत्री हैं। साढ़े तीन साल में आपके विभागों ने क्या उल्लेखनीय कार्य किये? जवाब - देखिये, पर्यटन, संस्कृति और धर्मार्थ कार्य ये ऐसे विभाग हैं, जो देश, प्रदेश ही नहीं बल्कि पूरे समाज की आत्मा से जुड़े हुए हैं। सबके मन में जो फीलिंग्स होती हैं उससे जुड़े हैं ये विभाग। पूर्व की सरकारों द्वारा कोई भी काम इन क्षेत्रों में ठीक तरीके से नहीं किया गया। उन सरकारों ने पर्यटन की परिभाषा ही बदल दी थी। इस क्षेत्र को सीमित और संकुचित कर दिया गया था। इसे भौतिक सुख से जोड़कर एक विशेष प्रकार के लोगों के लिए ही सुविधाएं विकसित करने का प्रयास किया गया। दरअसल भारत में पर्यटन का भाव तीर्थाटन से है। हमारे यहां हजारों आध्यात्मिक व ऐतिहासिक स्थल, साधना के केंद्र, बड़े-बड़े संगीत के केंद्र, तमाम दार्शनिक, रचनाकार, कवि समेत विभिन्न प्रकार के पंथ व सम्प्रदाय के अलग-अलग स्थल हैं। सभी के अलग-अलग प्रभाव हैं। इसके अलावा प्रकृति से जुड़े सैकड़ों स्थल हैं। योगी सरकार में इन सबको लेकर पर्यटन विभाग की ओर से एक विशेष कार्य योजना बनी और सभी महत्वपूर्ण स्थलों को चिन्हित किया गया। मुख्यमंत्री के दिशा निर्देश में प्रत्येक स्थल को विकसित करने का काम भी तेजी से शुरू किया गया है। सवाल -आप ने कहा कि पिछली सरकारों में पर्यटन केन्द्रों की उपेक्षा हुई, ऐसा कैसे मानते हैं आप? जवाब - देखिये, उप्र के प्रमुख तीर्थस्थलों पर पहले लाखों की संख्या में लोग आते थे, लेकिन पिछली सरकारों ने इन स्थानों के लिये बुनियादी सुविधाओं पर कोई ध्यान नहीं दिया। शौचालय तक नहीं बनवाये। सड़कें दयनीय हालत में रहीं। मुख्यमंत्री योगी ने इन सभी आवश्यकताओं को केन्द्र में रखकर काम करने का निश्चय किया और आज उप्र में जितने भी तीर्थस्थल हैं, उनका सौन्दर्यीकरण व नवनिर्माण तेज गति से चल रहा है। केवल ब्रज क्षेत्र को ही देखें तो वहां मथुरा व वृंदावन के आस-पास 300 से अधिक तीर्थस्थलों पर विकास के काम हुए हैं। गलियां, सड़कें, कुंड, तालाब, गौशाला, ऑडोटोरियम, पांच बड़े पार्किंग स्थल, निवास की व्यवस्था हर क्षेत्र में वहां पर काम हुआ है। प्रसिद्ध कवि रसखान ब्रज क्षेत्र के ही थे। उनकी रचनाएं आज भी भारतवासी गुनगुनाते हैं। लेकिन, दुर्भाग्य था कि वृंदावन में उनकी समाधि स्थली खंडहर हो गई थी और पिछली सरकारों ने कोई ध्यान नहीं दिया। आज वहां सुंदरीकरण का कार्य ब्रज तीर्थ क्षेत्र विकास बोर्ड की ओर से चल रहा है। इसी तरह ताजबीवी भी बहुत चर्चित नाम था। लोग कहते हैं कि वह औरंगजेब की बहन थी। कुछ लोग कहते हैं कि उनकी पत्नी थी, जो भी हो अचानक उसके अंदर कृष्ण भक्ति का भाव आता है और जब औरंगजेब आगरा से जाने लगता है, तो वह मना कर देती है। कहती है, 'मैं तो कहीं नहीं जाऊंगी, मैं तो कृष्ण की हो गई।’’ योगी सरकार ऐसे लोगों को भी प्रतिष्ठित करने का काम कर रही है। सवाल - अयोध्या में राम मंदिर निर्माण कार्य प्रारम्भ हो गया है। पर्यटन विभाग वहां के लिये क्या करेगा? जवाब - केवल पर्यटन विभाग ही नहीं, प्रधानमंत्री की प्रेरणा से उत्तर प्रदेश की योगी सरकार अयोध्या को विश्व की सबसे सुंदर नगरी बनाने की परियोजना पर काम कर रही है। इसके लिए सभी विभागों को शामिल कर एक कमेटी बनाई गई है। कार्य योजना का पूरा खाका तैयार हो चुका है। अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से लेकर अंडर ग्राउंड पार्किंग, अंडरग्राउंड बिजली आपूर्ति, सीवर ट्रीटमेंट प्लांट जैसी कई सुविधाओं को लेकर काम शुरू कर दिया गया है। रिवर फ्रंट की रचना सर्वोत्तम करने, राम की पैड़ी की भव्यता, बड़े-बड़े होटल, सड़कों का चौड़ीकरण, सुंदर-सुंदर मार्केट पर भी शीघ्र ही काम शुरू होगा। श्रीराम नगरी से जुड़े करीब ढाई सौ स्थल हैं जिसे सूचीबद्ध किया गया है। इन सभी स्थलों को विकसित करने की योजनाओं पर काम प्रचलित हो गया है। इसके अलावा अयोध्याधाम और आसपास के क्षेत्र को एक बड़े आर्थिक जोन के रूप में विकसित किया जायेगा। देखिये, अयोध्या श्रीराम की जन्मभूमि है इस तथ्य को कौन नहीं जानता, लेकिन पांच सौ वर्षो तक उस स्थल को छला गया। उसे स्वतंत्र भारत के इतिहास में भी विकास से वंचित कर दिया गया। इस पवित्र स्थल को विवाद का ढोंग बनाया गया। वर्ष 2017 में जब योगीजी ने सत्ता संभाली तब से उनके मार्गदर्शन में अयोध्या का उत्तरोत्तर विकास हो रहा है। राम नगरी की प्रतिष्ठा स्थापित करने के लिए उसका नामकरण 'अयोध्या' किया गया। नगर निगम की स्थापना हुई। पर्यटन विभाग की तरफ से 300 करोड़ की योजनाएं चलाई जा रही हैं। गलियों का सुंदरीकरण शुरू हुआ है। राम की पैड़ी को सजाया गया। अयोध्या को विश्वपटल पर पुनः स्थापित करने के लिए योगीजी के मार्गदर्शन में दीपोत्सव आरम्भ हुआ, जो गिनीज बुक आफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज हुआ। इस बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित भाई शाह के प्रयास से करीब 500 साल का संघर्ष समाप्त हुआ और उच्चतम न्यायालय के ऐतिहासिक फैसले के बाद भगवान श्रीराम का भव्य व दिव्य मंदिर निर्माण प्रारम्भ हो गया। सवाल - आपने कहा कि अयोध्या से जुड़े अन्य स्थलों का भी विकास होगा। इनमें कौन स्थल प्रमुख हैं ? जवाब - अयोध्या नगर एवं उसके आस-पास तमाम पौराणिक स्थल हैं, उन्हें चिन्हित कर कुछ जगहों पर विकास कार्य प्रारम्भ करा दिये गये हैं। इसके अलावा अयोध्या से लेकर चित्रकूट तक राम वन गमन मार्ग भी बनने जा रहा है। प्रदेश सरकार के प्रयास से केंद्र सरकार ने इसके लिए 452 करोड़ रुपये की स्वीकृति दी है। सरकार इस परियोजना को वर्ष 2025 में आयोजित होने वाले प्रयाग कुम्भ से पहले पूर्ण करेगी। इसी तरह एक रामायण सर्किट का कंसेप्ट लिया गया है। जहां-जहां प्रभु श्रीराम गए हैं उन स्थलों को और उनसे जुड़ने वाले मार्गों को सुंदर करना है। चित्रकूट में काफी विकास कार्य हो गया है। चित्रकूट का कुछ क्षेत्र मध्य प्रदेश में आता है। वहां की सरकार से भी वार्ता चल रही है। चित्रकूट के हर स्थल को विकसित किया जायेगा। मुख्यमंत्री योगी ‘चित्रकूट धाम तीर्थ विकास परिषद’ का भी गठन करने वाले हैं। इसी तरह प्रयागराज में महर्षि भरद्वाज आश्रम एक बहुत बड़ा केंद्र है। वहां श्रृंगेरपुरधाम भी है। इसके अलावा काशी, नैमिष और शुकतीर्थ समेत जितने भी तीर्थस्थल हैं सभी को विकसित किया जा रहा है। गोरखपुर में गोरक्षपीठ और रामगढ़ ताल विकास की प्रक्रिया में है। मानसरोवर यात्रियों के लिए गाजियाबाद में एक भव्य और दिव्य 'मानसरोवर भवन' का निर्माण कर दिया गया है। 'मुख्यमंत्री पर्यटन संवर्धन योजना' के तहत प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र में एक पर्यटन केंद्र को विकसित करेंगे। इसके लिए कमेटी बन गई है। स्थलों को सूचीबद्ध किया जा रहा है। सवाल - आप वाराणसी से विधायक हैं। वह प्रधानमंत्री मोदी का भी संसदीय क्षेत्र है। ऐसे में काशी के विकास को लेकर आपकी क्या योजना है? जवाब - काशी दुनिया की सांस्कृतिक राजधानी है। पूरे जगत में सबसे न्यारी है, लेकिन किसी ने वहां के विकास पर ध्यान नहीं दिया। वर्ष 2014 में प्रधानमंत्री मोदी जब वहां से पहली बार सांसद चुने गये तभी से वाराणसी में एक साथ कई परियोजनाओं पर काम प्रारम्भ हुआ। बाबतपुर हवाई अड्डे से वाराणसी के लिए अब सुंदर सड़क बन गई है। रिंग रोड का काम तेजी से चल रहा है। प्रथम चरण का काम पूरा होने के बाद उसका लोकार्पण भी हो गया। दूसरे और तीसरे चरण के काम भी जल्द ही पूरे होंगे। देखिये, काशी अद्भुत अध्यात्मिक नगरी है। विश्व में इतने घाट एक साथ कहीं नहीं है। वहां 90 के आसपास घाट हैं और सभी घाटों की अपनी आध्यात्मिक और धार्मिक महत्व है। पहले इन घाटों की दशा बड़ी ही दयनीय थी। सीवर के पानी गंगा में गिरते थे, सीधे नाले गिरते थे, घाटों की सीढ़ियों पर गंदगी की भरमार थी। प्रधानमंत्री मोदी के आने के बाद नमामि गंगे परियोजना व अन्य विभिन्न परियोजनाओं के तहत सभी घाटों का सुंदरीकरण व नवनिर्माण किया गया। सीवर ट्रीटमेंट प्लांट के जरिये गंदगी दूर की गई। गंगा के घाटों पर लाइटिंग की अच्छी व्यवस्था हो गई है। इसी तरह बाबा विश्वनाथ धाम एक अद्भुत कृति के रूप में बन रहा है। प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री स्वयं इसकी निगरानी करते रहते हैं। इस परियोजना का नतीजा यह है कि आज मां गंगा की गोदी से सीधे बाबा विश्वनाथजी की दर्शनार्थ यात्रा हो सकती है। वाराणसी गलियों का शहर है। वहां की हर गली का अपना एक ऐतिहासिक, धार्मिक अथवा व्यवसायिक महत्व है। विदेशी पर्यटक भी बनारस की गलियों में घूमते हैं। लेकिन, उसके सौंदर्यीकरण पर आज तक किसी ने ध्यान नहीं दिया। अब सभी गलियों का सुंदरीकरण हो रहा है। दीवारों पर रंग रोंगनकर काशी की महत्ता के अनुरुप उनका स्वरूप लाने का प्रयास किया जा रहा है। काशी में कुछ ऐतिहासिक मार्केट हैं। वाराणसी साड़ी का उत्पत्ति 'कुंज गली' में हुई। वहीं से पूरी दुनिया में बनारसी साड़ियां भेजी जाती हैं। उस कुंज गली को भी पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित किया जा रहा है। काशी में प्रवेश करने के हर मार्ग पर सुंदर और भव्य प्रवेश द्वार भी बनेगा। पंडित दीनदयाल उपाध्याय की स्मृति में पड़ाव पर एक अंतरराष्ट्रीय स्तर की सुंदर स्थली का निर्माण किया गया है। प्रधानमंत्री मोदी ने स्वयं इसका लोकार्पण किया। सवाल-आप संस्कृति विभाग के भी मंत्री हैं। इस विभाग का साढ़े तीन साल में क्या उल्लेखनीय योगदान है? जवाब - योगी सरकार अपनी समृद्धिशाली संस्कृति और संस्कारों को लेकर बहुत ही सजग है। उप्र में पहली बार 'संस्कृति नीति' भी बनने जा रही है। हमारे यहां संस्कार गीतों की परंपरा रही है। सुख-दुख, मांगलिक, तीर्थभाव, पितरों समेत 16 संस्कारों से जुड़े गीत हैं। संस्कृत में मंत्र हैं और संस्कृति में गीत। बच्चों के पैदा होने पर सोहर गाया जाता है। हमारी लोक परंपरा में तमाम गुदगुदाने वाले गीत भी हैं लेकिन, वे सब अब विलुप्त होते जा रहे हैं। हमारे संस्कार और लोक परंपराएं इन्हीं गीतों से जुड़ी हैं। उनमें राष्ट्रीय भाव भी है। ये गीत पीढ़ी दर पीढ़ी संचरित होते रहें, इसके लिये योगी सरकार ने काम शुरु कर दिया है। इन गीतों को सूचीबद्ध किया जा रहा है। संस्कार गीतों को लेकर राज्य स्तरीय और अंतरराज्यीय प्रतियोगिताएं भी आयोजित होंगी। प्रदेश में विभिन्न स्थानों पर हो रहे रामलीला को भी सूचीबद्ध किया जा रहा है। संस्कृति विभाग की ओर से रामलीला मैदान की चहारदीवारी, चबूतरा जैसी अन्य सुविधाओं को लेकर धन आवंटित किया गया है। सवाल-प्रदेश में पर्यटकों की संख्या बढ़ाने को लेकर आपकी सरकार की क्या योजना है? जवाब - इसके लिये हर पर्यटन केंद्र को विकसित किया जा रहा है। बुनियादी सुविधायें मजबूत की जा रही हैं। इसके अलावा सरकार ने प्रदेश के सभी पर्यटन केंद्रो, तीर्थ स्थलों व ऐतिहासिक धरोहर वाले स्थानों की ब्राण्डिंग करने की योजना बनायी है। इसके लिए एक कमेटी बन चुकी है। जल्द ही प्रदेश के हर जिले की संस्कृति, धार्मिक, ऐतिहासिक व प्रकृति से जुड़े स्थलों की वीडियो क्लिप के साथ स्क्रिप्ट राइटिंग की जायेगी। इन वीडियो क्लिप को एयरपोर्ट, रेलवे स्टेशन, रोडवेज बस अड्डों, शैक्षणिक संस्थानों जैसे प्रमुख स्थलों पर प्रचारित-प्रसारित किया जायेगा। प्रमुख तीर्थ स्थलों पर भजन कीर्तन व प्रवचन के लिए भजन कीर्तन स्थल के निर्माण की प्रक्रिया चल रही है। इससे भी पर्यटकों की संख्या में इजाफा होगा। प्रयागराज में तीर्थयात्री या पर्यटक सिर्फ माघ मेला, अर्धकुम्भ या कुम्भ में न आकर वर्ष भर आयें, इसे लेकर भी अलग योजना बनायी जा रही है। हिन्दुस्थान समाचार-hindusthansamachar.in